MP: बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी का रिजल्ट सिस्टम सवालों में: कहीं टॉपर को जीरो, कहीं गैरहाजिर छात्र पास

बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी के रिजल्ट में जीरो नंबर, गलत विषय और गैरहाजिरी की शिकायतें सामने आईं। पिछले साल भी गैरहाजिर छात्रा के पास होने का मामला सामने आया था।

भोपाल(9826019364)।
बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी के रिजल्ट ने हजारों छात्रों की चिंता बढ़ा दी है।
हालिया परिणामों में कई गंभीर गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आई हैं।
कहीं परीक्षा देने वाले छात्र को गैरहाजिर बता दिया गया।
कहीं वास्तविक नंबरों की जगह जीरो दर्ज कर दिया गया।
इतना ही नहीं, कुछ मार्कशीट में ऐसे विषय भी जोड़ दिए गए, जिन्हें छात्रों ने चुना ही नहीं था।
इससे छात्रों को कॉलेज और यूनिवर्सिटी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
वहीं, यूनिवर्सिटी ने शिकायतों की जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी बनाई है।

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टॉपर छात्रा को मिला जीरो, जांच में खुली गड़बड़ी

सिवनी की छात्रा सुहानी का मामला इसका उदाहरण है।
छात्रा के अनुसार वह पढ़ाई में हमेशा अच्छे प्रदर्शन करती रही है।
इसके बावजूद रिजल्ट में एक विषय में उसे जीरो नंबर मिले।
उसे इस विषय में फेल कर दिया गया।
सुहानी ने यूनिवर्सिटी में शिकायत दर्ज कराई।
इसके बाद उसकी ओएमआर शीट की जांच की गई।
जांच में ओएमआर शीट और एजेंसी के तैयार किए रिजल्ट में अंतर मिला।

ओएमआर रिकॉर्ड के मुताबिक छात्रा पास थी।

लेकिन तैयार रिजल्ट में उसे फेल दिखाया गया था।

जिस विषय को चुना नहीं, उसी में जीरो

भोपाल के बीकॉम छात्र तूफान अहिरवार की शिकायत भी अलग तरह की है।
उनकी मार्कशीट में ‘टूर एंड ट्रेवल्स’ विषय दर्ज था।
छात्र का कहना है कि उन्होंने यह विषय चुना ही नहीं था।
इसके बावजूद विषय मार्कशीट में जुड़ा मिला।
उसमें जीरो नंबर भी दर्ज कर दिए गए।
नतीजा यह हुआ कि छात्र को फेल घोषित कर दिया गया।
तोहफान के मुताबिक वह तीन से चार बार यूनिवर्सिटी जा चुके हैं।
उन्हें समस्या के जल्द समाधान का भरोसा दिया जा रहा है।

परीक्षा दी, फिर भी रिजल्ट में गैरहाजिर

शिकायतों का सिलसिला केवल जीरो नंबर तक सीमित नहीं है।
कई छात्रों ने परीक्षा देने के बावजूद रिजल्ट में गैरहाजिर किए जाने की शिकायत की है।
कुछ ने अपने वास्तविक नंबर गलत दर्ज होने की बात भी कही है।
यानी रिजल्ट में कई स्तरों पर सवाल उठ रहे हैं।
कहीं नंबर गलत हैं। कहीं विषय गलत जुड़ा है। कहीं उपस्थित छात्र को गैरहाजिर बताया गया है।

यूनिवर्सिटी ने एजेंसी पर कार्रवाई शुरू की

यूनिवर्सिटी के सहायक कुलसचिव सुनील नायक के अनुसार कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं।
इनमें जीरो नंबर और उपस्थित होने के बावजूद अनुपस्थित दर्ज किए जाने की शिकायतें शामिल हैं।
उनके मुताबिक रिजल्ट तैयार करने वाली एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है।
एजेंसी पर पेनल्टी भी लगाई गई है।
मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी बनाई गई है।
इसमें दो वरिष्ठ प्रोफेसर, रजिस्ट्रार और आईटी सेल अध्यक्ष शामिल हैं।
ओएमआर, रिजल्ट और एजेंसी डेटा का होगा मिलान
अब शिकायतों की जांच मूल रिकॉर्ड के आधार पर की जा रही है।
इसके लिए ओएमआर शीट, तैयार रिजल्ट और एजेंसी के डेटा का मिलान होगा।
इससे गलती की वास्तविक वजह सामने लाने की कोशिश की जाएगी।
यूनिवर्सिटी ने एजेंसी को नोटिस भी जारी किया है। उससे रिजल्ट में सामने आई गड़बड़ियों पर जवाब मांगा गया है।

पिछले साल भी सामने आया था चौंकाने वाला मामला

                                                                 (कुलसचिव के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपते प्रभावित बच्चे।) File Photo March 2025
बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी के रिजल्ट को लेकर सवाल पहली बार नहीं उठे हैं।
पिछले साल सीहोर जिले के भैरूंदा शासकीय कॉलेज में भी ऐसा मामला सामने आया था।
यहां 48 विद्यार्थियों ने एमएससी जूलॉजी की परीक्षा दी थी।
कॉलेज रिकॉर्ड के मुताबिक 47 विद्यार्थी परीक्षा में उपस्थित थे।
एक छात्रा  परीक्षा देने नहीं पहुंची थी।
इसके बावजूद रिजल्ट में स्थिति उलट नजर आई।
एक ही पेपर में 48 में से 42 विद्यार्थियों को फेल कर दिया गया।
वहीं, परीक्षा में अनुपस्थित रही छात्रा को उसी विषय में पास कर दिया गया।

कॉलेज रिकॉर्ड ने भी उठाए सवाल

मामला एमएससी जूलॉजी तृतीय सेमेस्टर के ‘कशेरुकी प्राणियों की तुलनात्मक शरीर रचना विज्ञान’ विषय से जुड़ा था।
परीक्षा 10 दिसंबर 2024 को पहली पाली में हुई थी। कॉलेज के रिकॉर्ड में संबंधित छात्रा की अनुपस्थिति दर्ज थी।
रिजल्ट जारी होने के बाद विद्यार्थियों को मामले की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने यूनिवर्सिटी के कुलसचिव के नाम ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन एसडीएम मदन सिंह रघुवंशी और कॉलेज प्राचार्य भारत सिंह हरियाले को भी दिया गया था।

अब सबसे बड़ा सवाल: गलती की कीमत छात्र क्यों चुकाए?

हालिया शिकायतों और पिछले मामले ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
छात्रों के लिए रिजल्ट केवल अंकतालिका नहीं होता। इसी के आधार पर आगे की पढ़ाई और करियर के फैसले होते हैं।
ऐसे में रिकॉर्ड की गलती से कोई छात्र फेल हो जाए, तो नुकसान सिर्फ एक नंबर का नहीं होता।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर गलती एजेंसी या सिस्टम की है, तो उसका खामियाजा छात्रों को क्यों भुगतना पड़े?
अब निगाहें यूनिवर्सिटी की जांच पर हैं। देखना होगा कि जांच में जिम्मेदारी किसकी तय होती है और प्रभावित छात्रों को कितनी जल्दी राहत मिलती है।