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जबलपुर।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने वन विभाग के एक मामले में सख्त रुख अपनाया है।
कोर्ट ने टैक्सपेयर्स के पैसे की बर्बादी पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
मामला RP No. 1111 of 2023 से जुड़ा है।
यह रिव्यू पिटीशन Conservator of Forest and Ex-Officio Divisional and Others Vs Ganga Singh and Others है।
दरअसल, कोर्ट के सामने देरी माफी के आवेदन के समर्थन में अतिरिक्त प्रस्तुतियां रखी गई थीं।
इन प्रस्तुतियों से कोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ।
इसके बाद कोर्ट ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है।
18 सितंबर को देना होगा जवाब
कोर्ट ने PCCF को 18 सितंबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने को कहा है।
उन्हें कोर्ट के सवालों का जवाब देना होगा।
खास तौर पर कोर्ट ने पूछा है कि अधिकारी प्रभारी ने रिव्यू पिटीशन दाखिल करने के लिए निजी वकील क्यों नियुक्त किया।
साथ ही कोर्ट ने यह भी पूछा है कि इससे राज्य के खजाने को हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा।
‘अधिकारी टैक्सपेयर्स के पैसे के संरक्षक’
कोर्ट ने अपने आदेश में अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे अधिकारी टैक्सपेयर्स की मेहनत की कमाई के संरक्षक हैं।
इसलिए उन्हें अपनी इच्छा और मनमर्जी से सरकारी पैसा बर्बाद करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
सरकारी अधिवक्ता अनुभव जैन ने PCCF को बुलाने पर आपत्ति जताई थी।
हालांकि, कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।
इसलिए PCCF की व्यक्तिगत मौजूदगी जरूरी है।
मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर 2026 को होगी।
आदेश जस्टिस विवेक अग्रवाल ने पारित किया है।
Court Order के मुख्य बिंदु
अतिरिक्त प्रस्तुतियों से हाईकोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ।
PCCF को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया गया।
निजी वकील नियुक्त करने का कारण पूछा जाएगा।
सरकारी खजाने को हुए नुकसान पर जवाब मांगा गया।
कोर्ट ने टैक्सपेयर्स के पैसे की बर्बादी पर नाराजगी जताई।
अगली सुनवाई 18 सितंबर 2026 को होगी।
Tags: Forest Department , Ganga Singh , Jabalpur High Court , Madhya Pradesh High Court , MP High court , MP High Court order , PCCF , private counsel , RP 1111 of 2023 , taxpayers money , Vivek Agarwal
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