अखिलेश से दूरी; यूपी चुनाव से पहले छोटे दलों का राहुल गांधी पर भरोसा, कांग्रेस की बढ़ी उम्मीद?

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले छोटे दल कांग्रेस और राहुल गांधी के करीब आते दिख रहे हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य समेत कई नेताओं की राहुल गांधी से मुलाकात हुई है। वहीं सपा से दूरी और कांग्रेस-सपा के बीच सीट बंटवारे की खींचतान ने यूपी के सियासी समीकरण को नया मोड़ दे दिया है।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले विपक्षी खेमे में गठबंधन और सीट बंटवारे को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग को लेकर अभी सहमति नहीं बनी है। इसी बीच उत्तर प्रदेश के कई छोटे दल और क्षेत्रीय नेता कांग्रेस की ओर रुख करते नजर आ रहे हैं। इन नेताओं की राहुल गांधी से मुलाकातों ने यूपी के सियासी समीकरण को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।

छोटे दलों को कांग्रेस से क्यों दिख रही उम्मीद?

दरअसल, समाजवादी पार्टी ने इस बार छोटे दलों से पहले की तुलना में दूरी बनाई है। 2022 से पहले बने भागीदारी मोर्चे से जुड़े कई राजनीतिक दल और नेता अब कांग्रेस के संपर्क में हैं। उन्हें उम्मीद है कि अगर कांग्रेस और सपा के बीच सीट बंटवारे में कांग्रेस को बड़ी संख्या में सीटें मिलती हैं, तो उसके हिस्से से छोटे दलों को भी चुनाव लड़ने का मौका मिल सकता है।

हाल के दिनों में अपनी जनता पार्टी के स्वामी प्रसाद मौर्य और संजय चौहान ने राहुल गांधी से मुलाकात की है। वहीं अपना दल (कामेरावादी) से जुड़े पंकज निरंजन भी कांग्रेस नेताओं के संपर्क में हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य ने राहुल गांधी से मुलाकात के बाद अपनी पार्टी के INDIA गठबंधन में शामिल होने का ऐलान भी किया है।

See also  उमरिया:वार्ड कांग्रेस कमेटी गठन को लेकर चंदिया में बैठक संपन्न

कांग्रेस चाहती है ज्यादा सीटें

छोटे दलों की सक्रियता ऐसे समय बढ़ी है, जब कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीटों को लेकर खींचतान चल रही है। कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छा जता रही है। पार्टी की ओर से 200 सीटों तक पर चुनाव लड़ने की तैयारी की बात कही गई है, जबकि सपा अपने मजबूत जनाधार के आधार पर सीट बंटवारे में बड़ी हिस्सेदारी चाहती है।

कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम का कहना है कि पार्टी सभी 403 विधानसभा सीटों पर तैयारी कर रही है। उनके मुताबिक संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का काम जारी है और बातचीत के आधार पर सीटों पर समझौता किया जा सकता है।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने मांगी करीब एक दर्जन सीटें

स्वामी प्रसाद मौर्य की सक्रियता भी इस पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने अपनी पार्टी के लिए करीब एक दर्जन सीटों की मांग रखी है। हालांकि, मौर्य चाहते हैं कि उनकी पार्टी अपने चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़े, जबकि कांग्रेस की ओर से इस व्यवस्था को लेकर सहमति नहीं है।

मौर्य ने राहुल गांधी से मुलाकात के बाद कहा कि सीटों और चुनावी रणनीति पर बाद में फैसला होगा। उन्होंने INDIA गठबंधन के साथ मिलकर बीजेपी को हटाने की बात कही है।

See also  राहुल गांधी का PM मोदी पर हमला, बोले- लड़के गाली दें तो कुछ नहीं, लड़कियों ने दी तो ‘कल्चरल शॉक’ क्यों?

2017 में बीजेपी ने भी अपनाई थी ऐसी रणनीति

यूपी की राजनीति में छोटे दलों को साथ लेने की रणनीति नई नहीं है। 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने भी छोटे दलों और अलग-अलग सामाजिक समूहों में प्रभाव रखने वाले नेताओं को अपने साथ जोड़ा था। इस रणनीति का पार्टी को चुनावी फायदा मिला था। अब कांग्रेस भी छोटे दलों और जातीय-सामाजिक प्रभाव वाले नेताओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करती दिख रही है।

हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह है कि कांग्रेस और सपा के बीच सीट शेयरिंग किस फॉर्मूले पर तय होती है। दोनों दलों के बीच सहमति बनती है या खींचतान लंबी चलती है, इसका असर छोटे दलों के अगले कदम पर भी पड़ सकता है। फिलहाल राहुल गांधी के साथ इन नेताओं की लगातार मुलाकातों ने यूपी की चुनावी राजनीति में कांग्रेस की सक्रियता और संभावित गठबंधन की तस्वीर को जरूर दिलचस्प बना दिया है।