टीएमसी को एक और बड़ा झटका लगा है क्योंकि पार्टी की राज्यसभा सांसद और बंगाली सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री कोयल मलिक ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। कोयल मलिक ने मात्र तीन महीने पहले पश्चिम बंगाल का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली थी। टीएमसी ने उन्हें नामित किया था, लेकिन अब उनके अचानक इस्तीफे ने पार्टी में हलचल मचा दी है और पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। इसके अलावा, यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब टीएमसी पहले से ही अंदरूनी कलह और विभाजन की खबरों से जूझ रही है।
कोयल मलिक का राजनीतिक सफर
कोयल मलिक ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत टीएमसी से की थी। उन्हें टीएमसी ने राज्यसभा सदस्य के रूप में नामित किया था। हालांकि, अब उनके इस्तीफे ने पार्टी में हलचल मचा दी है।
कोयल मलिक का यह कदम पश्चिम बंगाल की सियासी गलियारों में तीखी बहस छेड़ने वाला साबित हो रहा है। राजनीति में आने से पहले कोयल मलिक बंगाली फिल्म इंडस्ट्री की सबसे लोकप्रिय और सफल अभिनेत्रियों में शुमार थीं।
टीएमसी के लिए बड़ा झटका
कोयल मलिक का इस्तीफा टीएमसी के लिए न सिर्फ सांस्कृतिक चेहरे के नुकसान का प्रतीक है, बल्कि पार्टी की आंतरिक स्थिति को लेकर उठ रहे सवालों को और मजबूत करता है।
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कोयल मलिक ने इस्तीफा देने के पीछे क्या वजह बताई है, लेकिन उनका यह कदम पश्चिम बंगाल की सियासी गलियारों में तीखी बहस छेड़ने वाला साबित हो रहा है।
कोयल मलिक का फिल्मी करियर
कोयल मलिक ने साल 2003 में सुपरहिट फिल्म ‘नेटर गुरु’ से अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद ‘बंधन’ (2004), ‘शुभदृष्टि’ (2005), ‘पागलू’ (2011), ‘हेमलॉक सोसाइटी’ (2012) और ‘मितिन माशी’ थ्रिलर सीरीज जैसी कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाई।
- कोयल मलिक ने अपने फिल्मी करियर में कई अवॉर्ड जीते हैं।
- उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड (बांग्ला), दो बीएफजेए अवॉर्ड और वर्ष 2023 में पश्चिम बंगाल सरकार का प्रतिष्ठित ‘महानायक सम्मान’ समेत कई सम्मान मिल चुके हैं।
- वे बंगाली सिनेमा के दिग्गज अभिनेता रंजीत मलिक और दीपा मलिक की बेटी हैं।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चाएं
कोयल मलिक के इस्तीफे ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
टीएमसी के नेताओं ने कोयल मलिक के इस्तीफे पर चुप्पी साध रखी है, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे टीएमसी की आंतरिक कलह का नतीजा बताया है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह एक बड़ा मुद्दा बन गया है।