शिवसेना फाउंडेशन डे पर ‘ऑपरेशन टाइगर’ अफवाह, दो धड़ों का जलवा

मुंबई में शिवसेना के दो धड़ों ने अलग‑अलग तरीके से पार्टी की स्थापना दिवस मनाई, जबकि 'ऑपरेशन टाइगर' की अफवाहें सांसदों के संभावित बदलाव को लेकर राजनीतिक माहौल को गरम बना रही हैं।

10

मुंबई के विभिन्न हिस्सों में शिवसेना के दो धड़ों ने 28 वर्ष पुरानी पार्टी के फाउंडेशन डे को अलग‑अलग धूमधाम से मनाया, जिससे शहर की सड़कों पर रंगीन पोस्टर और बैनर लहराते दिखे। इस वर्ष का जश्न खास तौर पर ‘ऑपरेशन टाइगर’ की अफवाहों के बीच हुआ, जो सांसदों के संभावित बदलाव को लेकर चर्चा का केंद्र बन गया है। शिंदे‑नेतृत्व वाली धड़ ने पारंपरिक धनुष‑तीर प्रतीक को फिर से अपनाया, जबकि उद्धव ठाकरे के अनुयायियों ने अपने अलग प्रतीक और नारे के साथ उपस्थितियों को आकर्षित किया। दोनों पक्षों ने अपने-अपने नेताओं की उपलब्धियों को उजागर करते हुए भविष्य की रणनीति पर प्रकाश डाला, जबकि विपक्षी दलों ने इस विभाजन को सत्ता संतुलन के लिए एक अवसर बताया। इस जटिल राजनीतिक परिदृश्य में जनता की प्रतिक्रियाएँ मिश्रित हैं, जहाँ कई लोग दोनों धड़ों के बीच के अंतर को समझने की कोशिश कर रहे हैं।

शिवसेना के दो धड़ों ने फाउंडेशन डे का अलग‑अलग जश्न

शिवसेना (शिंदे) की धूमधाम

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली धड़ ने बंध्रा, कलानगर और मातोश्री क्षेत्रों में बड़े बैनर और ध्वज लगाकर पार्टी के इतिहास को उजागर किया, जहाँ उन्होंने 2022 के विभाजन के बाद से ली गई जीतों को प्रमुखता दी। इस कार्यक्रम में कई वरिष्ठ विधायक और सांसद उपस्थित थे, जिन्होंने शिंदे को ‘सच्चा नेता’ कहकर समर्थन जताया।

शिवसेना (UBT) की अलग रिवाज

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली धड़ ने अपने स्वयं के प्रतीक ‘हाथी’ के साथ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें पार्टी के संस्थापक बाल ठाकरे की तस्वीरें और उनके विचारों को दर्शाया गया। इस समारोह में कई युवा कार्यकर्ता और पार्टी के पुराने सदस्य शामिल हुए, जिन्होंने भविष्य में पार्टी को पुनर्स्थापित करने की आशा व्यक्त की।

ऑपरेशन टाइगर की पृष्ठभूमि और वर्तमान अफवाहें

ऑपरेशन टाइगर का उद्भव

‘ऑपरेशन टाइगर’ शब्द पहली बार तब उभरा जब शिंदे‑नेतृत्व वाली शिवसेना के कुछ वरिष्ठ सदस्य ने कहा कि कई सांसद शिंदे के साथ मिलकर गठबंधन को सुदृढ़ करने की कोशिश कर रहे हैं। इस शब्द को मीडिया ने एक संभावित राजनैतिक रणनीति के रूप में पेश किया, जिससे जनता में जिज्ञासा और अटकलें दोनों बढ़ी।

एमपी defections की संभावनाएँ

शिवसेना MLC चंद्रकांत रघुवंशी ने दावा किया कि छह सांसद पहले ही शिंदे की धड़ के साथ संपर्क में हैं और उनके साथ जुड़ने की इच्छा जताई है, परन्तु इन दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह अफवाहें विपक्षी दलों को भी अपनी रणनीति पुनः विचार करने पर मजबूर कर रही हैं।

पार्टी विभाजन के ऐतिहासिक आँकड़े और कानूनी निर्णय

2022 में हुए विभाजन के बाद से शिवसेना की दो धड़ें लगातार चुनावी और कानूनी लड़ाइयों में लगी रही हैं, जिससे पार्टी की पहचान और वोट बैंक पर गहरा असर पड़ा है।

  • विभाजन का कारण: एकनाथ शिंदे ने 2022 में 100 से अधिक विधायक के साथ सरकार में भरोसा तोड़ने के बाद पार्टी से अलग हो गए, जिससे दो धड़ें बन गईं।
  • इलेक्शन कमिशन का फैसला: भारत के चुनाव आयोग ने शिंदे की धड़ को आधिकारिक रूप से शिवसेना का प्रतीक (धनुष‑तीर) सौंपा, जबकि उद्धव ठाकरे की धड़ को ‘UBT’ टैग दिया गया।
  • वोट शेयर पर प्रभाव: 2022 के बाद के स्थानीय चुनावों में शिंदे की धड़ ने लगभग 45% वोट शेयर हासिल किया, जबकि उद्धव की धड़ ने शेष 55% को विभाजित किया, जिससे गठबंधन राजनीति में नई चुनौतियाँ उत्पन्न हुईं।

भविष्य की राजनीति और सार्वजनिक प्रतिक्रिया

जनमत में बदलाव

सर्वेक्षण दिखाते हैं कि मुंबई के युवा मतदाता अब दोनों धड़ों के बीच की नीति अंतर को लेकर अधिक सजग हो रहे हैं, और कई लोग दोनों पक्षों को मिलाकर एक नई गठबंधन की मांग कर रहे हैं। यह बदलाव आगामी विधानसभा चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

आगामी चुनावों पर असर

यदि ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत सांसदों का वास्तविक स्थानांतरण हो जाता है, तो यह शिंदे की धड़ को राष्ट्रीय स्तर पर शक्ति प्रदान कर सकता है, जबकि उद्धव ठाकरे की धड़ को पुनर्संरचना की आवश्यकता पड़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस परिवर्तन से महाराष्ट्र की राजनीति में नई गठबंधन संरचनाएँ उभर सकती हैं, जो राज्य के विकास एजेंडा को पुनः दिशा देगी।