लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले रोजगार का मुद्दा फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से अगले छह महीनों में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र देने के ऐलान पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के पास अपना वादा पूरा करने के लिए बहुत कम समय बचा है, क्योंकि अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव को लेकर आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी।
एक लाख नौकरियों के ऐलान पर अखिलेश का निशाना
लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने योगी सरकार के रोजगार संबंधी ऐलान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार अब एक लाख युवाओं को नौकरी देने की बात कर रही है, जबकि विधानसभा चुनाव नजदीक हैं।
अखिलेश ने कहा कि जनवरी के बाद चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के साथ आदर्श आचार संहिता लागू हो सकती है। ऐसे में उन्होंने सरकार से पूछा कि इतने कम समय में एक लाख नियुक्तियां कैसे पूरी की जाएंगी।
योगी आदित्यनाथ ने 25 अगस्त को घोषणा की थी कि राज्य सरकार अगले छह महीनों के भीतर एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र देगी। मुख्यमंत्री ने भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाने के लिए किए गए प्रशासनिक सुधारों का भी उल्लेख किया था।
2027 चुनाव से पहले रोजगार बना बड़ा मुद्दा
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की शुरुआत में प्रस्तावित हैं। चुनाव से पहले रोजगार, शिक्षा, कानून-व्यवस्था और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
अखिलेश यादव ने रोजगार के मुद्दे को योगी सरकार के खिलाफ राजनीतिक सवाल के तौर पर उठाया है। वहीं, राज्य सरकार रोजगार और भर्ती प्रक्रिया में सुधार को अपनी उपलब्धियों में गिना रही है।
स्कूलों के मुद्दे पर भी अखिलेश का हमला
अखिलेश यादव ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में करीब 26 हजार प्राथमिक विद्यालय बंद हुए हैं।
सपा प्रमुख ने कहा कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में लौटती है तो इन स्कूलों को दोबारा खोला जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों के बंद होने का सबसे ज्यादा असर पिछड़े वर्ग, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों पर पड़ा है।
अखिलेश ने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं की शिक्षा पर इसके प्रभाव का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि आसपास स्कूल उपलब्ध नहीं होने से लड़कियों के लिए पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो सकता है।
जातीय जनगणना और प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी उठाया
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने जातीय जनगणना की मांग को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि विभिन्न सामाजिक समूहों को उनकी आबादी के अनुपात में अधिकार और प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का हवाला देते हुए सामाजिक प्रतिनिधित्व को राजनीतिक एजेंडे का अहम हिस्सा बताया। सपा प्रमुख पहले भी कह चुके हैं कि यदि केंद्र सरकार जातीय जनगणना नहीं कराती है तो उत्तर प्रदेश में सत्ता में आने पर समाजवादी पार्टी सरकार गठन के बाद इसे कराने की दिशा में कदम उठाएगी।
मंदिर में चढ़ावे की चोरी को लेकर भी BJP पर हमला
अखिलेश यादव ने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मुद्दे को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने इस मामले को उठाते हुए भाजपा की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए और सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
उन्होंने भाजपा को लेकर तीखी राजनीतिक टिप्पणी की और आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोग जनता और धार्मिक आस्था से जुड़े संसाधनों का दुरुपयोग कर रहे हैं। ये आरोप अखिलेश यादव की राजनीतिक टिप्पणी हैं और इन्हें उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
E20 पेट्रोल को लेकर भी साधा निशाना
अखिलेश यादव ने पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को लेकर चल रही बहस का भी जिक्र किया। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए E20 ईंधन विवाद को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
उन्होंने भाजपा पर जनता को भ्रमित करने का आरोप लगाया और पेट्रोल में मिलावट को लेकर राजनीतिक तंज कसा।
चुनाव से पहले तेज हो रही सियासी बयानबाजी
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी के साथ ही भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक टकराव तेज होता दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हालिया कार्यक्रमों में पिछली सपा सरकार के कामकाज पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि अखिलेश यादव मौजूदा भाजपा सरकार की रोजगार, शिक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी नीतियों को निशाना बना रहे हैं।
रोजगार के क्षेत्र में एक लाख सरकारी नियुक्तियों का नया ऐलान इसी राजनीतिक माहौल में हुआ है। ऐसे में आने वाले महीनों में नौकरी और युवाओं से जुड़े मुद्दे चुनावी राजनीति में और महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
रोजगार से लेकर सामाजिक न्याय तक, सपा का फोकस
अखिलेश यादव ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में रोजगार के साथ शिक्षा, जातीय जनगणना और सामाजिक प्रतिनिधित्व को भी प्रमुखता दी। इससे संकेत मिलता है कि समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव से पहले इन मुद्दों को अपने राजनीतिक अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की तैयारी में है।
दूसरी ओर, भाजपा सरकार भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियुक्तियों को तेज करने को लेकर अपने रिकॉर्ड को सामने रख रही है।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले रोजगार का मुद्दा एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अगले छह महीनों में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र देने का ऐलान किया है। अखिलेश यादव ने इस घोषणा के समय पर सवाल उठाते हुए कहा है कि चुनावी आचार संहिता लागू होने से पहले सरकार के पास बहुत कम समय है। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षा, जातीय जनगणना और सामाजिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर भी भाजपा सरकार को घेरा है।