लखनऊ: उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) के दौरान 16.18 लाख Form-6 आवेदन जमा होने और इनसे जुड़े विवरण सार्वजनिक नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठाए गए हैं। एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि इन आवेदनों से जुड़े मतदाताओं की जानकारी उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है। हालांकि, उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि 16.18 लाख का आंकड़ा नए वोटरों के जुड़ने का नहीं, बल्कि SIR की प्रक्रिया के दौरान जमा किए गए Form-6 आवेदनों का है।
क्या है 16.18 लाख Form-6 का मामला?
रिपोर्ट के मुताबिक, SIR के शुरुआती चरण में उत्तर प्रदेश में करीब 16.18 लाख Form-6 आवेदन जमा किए गए थे। Form-6 वह आवेदन पत्र है, जिसके जरिए पात्र व्यक्ति अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए आवेदन करता है।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि इन 16.18 लाख आवेदनों से संबंधित नाम और विवरण वेबसाइट पर उस तरह उपलब्ध नहीं कराए गए, जैसा चुनावी नियमों के तहत दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया में किया जाता है। इसी आधार पर इन आवेदनों को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए।
हालांकि, उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने इस दावे को गलत धारणा पर आधारित बताया है। CEO कार्यालय के अनुसार 16.18 लाख का आंकड़ा उन Form-6 आवेदनों का है, जिन्हें SIR के दौरान घर-घर जाकर गणना प्रक्रिया में बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) ने पात्र लोगों से प्राप्त किया था।
चुनाव आयोग ने क्या सफाई दी?
यूपी CEO कार्यालय के मुताबिक, SIR की गणना प्रक्रिया 27 अक्टूबर 2025 से 6 जनवरी 2026 तक चली। इस दौरान BLOs ने घर-घर जाकर उन पात्र लोगों को Form-6 उपलब्ध कराए और उनसे आवेदन लिए, जिनका नाम 27 अक्टूबर 2025 को मौजूद मतदाता सूची में नहीं था।
आयोग का कहना है कि इन आवेदनों को केवल इस आधार पर मतदाता सूची में शामिल नहीं माना जा सकता कि Form-6 जमा किया गया था। आवेदन मिलने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसकी जांच और आगे की कार्रवाई की जाती है।
CEO कार्यालय ने यह भी स्पष्ट किया कि 6 जनवरी 2026 को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद प्राप्त Form-6 आवेदनों को दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान Form-9 के तहत प्रकाशित किया जाना था। इसी कारण SIR के दौरान पहले से एकत्र किए गए 16.18 लाख Form-6 आवेदनों को बाद में प्राप्त दावों के समान मानना सही नहीं है।
क्या 16.18 लाख नए वोटर सीधे जुड़ गए?
यही इस पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू है। 16.18 लाख Form-6 आवेदन जमा होने का अर्थ यह नहीं है कि 16.18 लाख लोगों के नाम अपने आप मतदाता सूची में जुड़ गए।
Form-6 नाम जुड़वाने के लिए आवेदन है। आवेदन जमा होने के बाद पात्रता और दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी होने पर ही नाम मतदाता सूची में शामिल किया जाता है। इसलिए आवेदन संख्या और अंतिम रूप से जोड़े गए मतदाताओं की संख्या को एक ही मानना उचित नहीं होगा। यूपी CEO ने भी इसी आधार पर रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों को खारिज किया है।
यूपी की वोटर लिस्ट में पहले भी हुआ बड़ा बदलाव
SIR के बाद उत्तर प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या में बड़ा बदलाव दर्ज हुआ। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित अंतिम सूची में करीब 13.39 करोड़ मतदाता थे। इससे पहले 27 अक्टूबर 2025 की सूची में करीब 15.44 करोड़ मतदाता दर्ज थे। यानी SIR के दौरान करीब 2.04 करोड़ नाम हटाए गए।
इसी पृष्ठभूमि में 16.18 लाख Form-6 आवेदनों से जुड़ा विवाद राजनीतिक और चुनावी तौर पर महत्वपूर्ण हो गया है। उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक दल लगातार सवाल उठाते रहे हैं।
Form-6 को लेकर पहले भी उठा था विवाद
Form-6 इस साल पहले भी चर्चा में रहा है। ऑनलाइन Form-6 में SIR से संबंधित अतिरिक्त घोषणा जोड़े जाने को लेकर सवाल उठे थे। इस घोषणा में आवेदकों से पुराने SIR में उनके या उनके माता-पिता/दादा-दादी के नाम से संबंधित जानकारी मांगी गई थी। इस बदलाव को लेकर कानूनी और प्रक्रियात्मक सवाल भी उठे।
बाद में चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR के बाद सामान्य अवधि में मतदाता पंजीकरण के लिए निर्धारित नियमों के मुताबिक Form-6 का इस्तेमाल किया जाएगा और अतिरिक्त घोषणा की जरूरत नहीं होगी।
फिलहाल 16.18 लाख Form-6 आवेदनों को लेकर मुख्य विवाद आवेदन के आंकड़े, उनके प्रकाशन और उन्हें अंतिम मतदाता सूची में शामिल किए जाने की प्रक्रिया से जुड़ा है। एक ओर रिपोर्ट में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए गए हैं, वहीं उत्तर प्रदेश CEO कार्यालय ने कहा है कि रिपोर्ट गलत धारणाओं पर आधारित है और SIR की पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग के निर्देशों के मुताबिक की गई।