ममता के किले में सबसे बड़ी सेंध! 28 में से 20 सांसद NDA के साथ, बंगाल की राजनीति में भूचाल

"पश्चिम बंगाल में टीएमसी के 58 विधायकों के बाद अब 28 में से 20 सांसदों ने ममता बनर्जी का साथ छोड़ने का फैसला लिया है। बागी सांसद लोकसभा में एनडीए को समर्थन देंगे। इसे ममता के किले में सबसे बड़ी सेंध माना जा रहा है। साथ ही,टीएमसी में जारी इस बगावत ने ममता की सियासी पकड़ पर तो सवाल खड़े किए ही,देश की राजनीति में भी एक बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। "

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कोलकाता।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक संकट गहराता नजर आ रहा है। विधानसभा में विधायकों की बगावत के बाद अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों का बड़ा वर्ग भी पार्टी नेतृत्व से दूरी बनाता दिखाई दे रहा है।

दावा किया जा रहा है कि लोकसभा के 28 में से 20 सांसदों ने NDA सरकार को समर्थन देने का फैसला किया है।

स्पीकर को दी समर्थन की जानकारी

पूर्व TMC नेता और सांसद काकोली घोष दस्तीदार के मुताबिक, बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को NDA समर्थन की जानकारी दे दी है।

साथ ही लोकसभा में अलग संसदीय दल के रूप में बैठने की मांग भी की गई है। यदि यह दावा सही साबित होता है तो यह TMC के लिए अब तक का सबसे बड़ा संसदीय झटका होगा।

बागी सांसदों की बैठक, शुभेंदु अधिकारी भी पहुंचे

सूत्रों के अनुसार TMC सांसद शताब्दी रॉय के आवास पर बागी सांसदों की महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें जून मालिया, बापी हलदार, अबू ताहिर खान और असित कुमार मल सहित कई सांसद शामिल हुए। बैठक के दौरान पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी सांसदों से मिलने पहुंचे।

दिल्ली में भी चली रणनीति

बताया जा रहा है कि इससे पहले 11 सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक की थी। वहीं रविवार देर रात दिल्ली में भी बागी सांसदों की एक गोपनीय बैठक हुई, जिसमें पार्टी नेतृत्व को लेकर असंतोष खुलकर सामने आया।

दल-बदल कानून से बच सकता है बागी गुट

राजनीतिक जानकारों के अनुसार बागी सांसदों की संख्या कुल सांसदों के दो-तिहाई से अधिक है। ऐसे में यदि यह समूह स्वयं को अलग दल या वास्तविक TMC के रूप में प्रस्तुत करता है, तो दल-बदल कानून की कार्रवाई से बच सकता है।

NDA को मिलेगा बड़ा संख्याबल

लोकसभा में NDA के पास वर्तमान में 293 सांसद हैं। TMC के 20 सांसदों का समर्थन मिलने पर यह संख्या बढ़कर 313 तक पहुंच सकती है। इससे केंद्र सरकार को महत्वपूर्ण विधेयकों और संवैधानिक संशोधनों पर राजनीतिक मजबूती मिलने की संभावना है।

विधानसभा में भी टूट चुकी है TMC

सांसदों की बगावत से पहले पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी TMC को बड़ा झटका लग चुका है। पार्टी के 80 में से 58 विधायक अलग गुट बनाकर ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता घोषित कर चुके हैं। इससे बंगाल की राजनीति में TMC की स्थिति लगातार कमजोर होती दिख रही है।

सुखेंदु शेखर का इस्तीफा बना चर्चा का केंद्र

राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर ने पार्टी और सांसद पद दोनों से इस्तीफा देते हुए ममता सरकार के 15 वर्षों के शासन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पार्टी में लोकतांत्रिक संवाद की कमी और नेतृत्व की कार्यशैली से असंतोष बढ़ता गया, जिसके कारण यह स्थिति बनी।

महुआ मोइत्रा और अधीर रंजन के तीखे हमले

TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने बागी नेताओं को “जनादेश के साथ विश्वासघात” करने वाला बताया, जबकि कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि यदि सांसद भाजपा का समर्थन करना चाहते हैं तो उन्हें सीधे BJP में शामिल हो जाना चाहिए, अलग गुट बनाना सिर्फ कानूनी प्रावधानों से बचने की कोशिश है।

देश में बदलती राजनीति के संकेत

TMC में विधायकों और सांसदों की लगातार बगावत ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। यदि सांसदों का यह दावा वास्तविक रूप लेता है, तो यह सिर्फ ममता बनर्जी के लिए नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के समीकरणों के लिए भी बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।