SIR विवाद: दिल्ली से भोपाल तक चुनाव आयोग पर सवाल, कांग्रेस ने घेराव का ऐलान

SIR को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर विवाद बढ़ गया है। दिल्ली में CJP ने CEC के इस्तीफे की मांग की। वहीं, मध्यप्रदेश कांग्रेस ने 28 सितंबर को घेराव का ऐलान किया।

नई दिल्ली/भोपाल।

SIR को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है।

अब इसका असर दिल्ली से लेकर मध्यप्रदेश तक दिखाई दे रहा है।

दरअसल, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में चुनाव आयोग के भीतर

SIR से जुड़े फैसलों को लेकर दर्ज आपत्तियों का दावा किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने

पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों पर लिखित आपत्ति दर्ज की।

इसके बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यशैली पर सवाल तेज कर दिए हैं।

वहीं, चुनाव आयोग ने कहा है कि बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय और सुझाव आना सामान्य प्रक्रिया है।

आयोग के अनुसार, SIR समेत सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

दिल्ली में CJP का CEC को 48 घंटे का अल्टीमेटम

इसी विवाद के बीच दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि SIR के जरिए बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं।

उन्होंने इसे मताधिकार से जुड़ा गंभीर मामला बताया।

पार्टी ने 48 घंटे में इस्तीफा नहीं देने पर देशभर में आंदोलन की चेतावनी दी है।

हालांकि, ये आरोप CJP के हैं।

चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े अंतिम फैसलों को सर्वसम्मत बताया है।

विवाद की जड़ में 14 लिखित आपत्तियां

इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, संधू और जोशी ने

28 अक्टूबर 2025 से 14 अगस्त 2026 के बीच कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज कीं।

इनमें मतदाता सूची, नए मतदाताओं के पंजीयन, नाम जोड़ने-हटाने और मतदाता डेटाबेस से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ आपत्तियों में Form-6 और चुनावी डेटा की पहुंच को लेकर भी सवाल उठाए गए।

दूसरी ओर, आयोग ने कहा कि अलग-अलग टिप्पणियां और तकनीकी सुझाव निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से हुए।

अब मध्यप्रदेश में कांग्रेस का प्रदर्शन

स विवाद की गूंज मध्यप्रदेश में भी सुनाई दे रही है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने SIR और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची में नाम हटाने के कारणों का पूरा विवरण सार्वजनिक होना चाहिए।

पार्टी ने विधानसभा और बूथ स्तर पर डेटा स्पष्ट करने की मांग की है।

पटवारी के अनुसार, कांग्रेस यह जानना चाहती है कि कितने नाम हटाए गए।

इनमें कितने मतदाता स्थानांतरित हुए, कितने मृत पाए गए और कितने नाम डुप्लीकेट थे।

28 सितंबर को भोपाल में घेराव का ऐलान

कांग्रेस ने इस मुद्दे पर आंदोलन का कार्यक्रम भी घोषित किया है।

पटवारी के अनुसार, 28 सितंबर को भोपाल में राज्य निर्वाचन आयोग की इकाई का घेराव किया जाएगा।

इसके बाद 29 सितंबर को जिला मुख्यालयों पर कलेक्टर कार्यालयों के घेराव की बात कही गई है।

कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे, मतदाता सूची से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच

और वास्तविक मतदाताओं को अपना पक्ष रखने का अवसर देने की मांग की है।

कांग्रेस ने पारदर्शिता पर उठाए सवाल

पटवारी ने कहा कि प्रत्येक मतदाता को यह जानने का अधिकार है कि उसका नाम मतदाता सूची में है या नहीं।

यदि नाम हटाया गया है तो उसका कारण भी स्पष्ट होना चाहिए।

कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया है कि मतदाता सूची में बदलाव किस आधार पर हुए।

सत्यापन किस अधिकारी ने किया और दावे-आपत्ति की प्रक्रिया कैसे अपनाई गई।

पार्टी ने आगामी पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग भी रखी है।

विवाद अब राजनीतिक आंदोलन की ओर

SIR पर शुरू हुआ विवाद अब केवल मतदाता सूची की प्रक्रिया तक सीमित नहीं है।

विपक्ष इसे चुनावी संस्थाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता से जोड़ रहा है।

वहीं, चुनाव आयोग अपने फैसलों को संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा बता रहा है।

ऐसे में अब आगे की राजनीतिक और कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी।

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