लाल किला ब्लास्ट केस: जूते में छिपा था रिमोट सिस्टम, कमरे में रखा था पेशाब; NIA चार्जशीट में चौंकाने वाले खुलासे

लाल किला ब्लास्ट मामले में NIA की चार्जशीट से कथित रिमोट सिस्टम, AI के इस्तेमाल और हमले की साजिश से जुड़े कई अहम खुलासे सामने आए हैं।

नई दिल्ली: दिल्ली के लाल किले के पास नवंबर 2025 में हुए कार ब्लास्ट मामले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की चार्जशीट से कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी उमर उन नबी ने हमले की साजिश को अंजाम देने के लिए बेहद गोपनीय तरीके अपनाए थे। चार्जशीट में यह भी दावा किया गया है कि रिमोट से विस्फोट कराने से जुड़ा उपकरण जूते में छिपाया गया था।

NIA की जांच में आरोपी के ठिकाने से जुड़ी कई ऐसी बातें सामने आई हैं, जिनसे कथित साजिश की तैयारी और उसके तौर-तरीकों का पता चलता है। जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी ने नूंह में छिपे रहने के दौरान अपने कमरे में पेशाब को पॉलीथिन में जमा करके रखा था। इस सामग्री का इस्तेमाल कथित तौर पर विस्फोटक तैयार करने की योजना में किया जाना था।

रिमोट सिस्टम को जूते में छिपाने का दावा

NIA की चार्जशीट के अनुसार, आरोपी ने विस्फोट से जुड़े रिमोट सिस्टम को छिपाकर रखने की कोशिश की थी। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इसके लिए जूते का इस्तेमाल किया गया।

जांच में सामने आई इस जानकारी से यह संकेत मिलता है कि आरोपियों ने सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचने के लिए रोजमर्रा की वस्तुओं का इस्तेमाल करने की कोशिश की थी। मामले की जांच में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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कमरे में पेशाब जमा करने की बात सामने आई

चार्जशीट में सबसे असामान्य खुलासों में से एक आरोपी द्वारा पेशाब को पॉलीथिन में जमा करके रखने से जुड़ा है। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर इसे बाद में एक रासायनिक प्रक्रिया के लिए इस्तेमाल करने की योजना बनाई थी।

हालांकि, इस मामले में विस्फोटक तैयार करने की किसी भी प्रक्रिया या तकनीकी विवरण को सार्वजनिक रूप से दोहराना उचित नहीं है। जांच एजेंसी की चार्जशीट में दर्ज दावे अब अदालत की प्रक्रिया का हिस्सा हैं और मामले में अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

AI और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से भी जुड़ी जांच

लाल किला ब्लास्ट मामले की जांच में डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल का पहलू भी सामने आया है। NIA के मुताबिक, आरोपी जसीर बिलाल वानी ने कथित तौर पर AI टूल्स और ChatGPT की मदद से IED से जुड़ी जानकारी हासिल करने की कोशिश की थी। उसने ऑनलाइन वीडियो और अन्य सामग्री भी देखी थी।

जांच एजेंसी का यह दावा आतंकवाद की बदलती रणनीति को लेकर सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौती की ओर भी इशारा करता है। इंटरनेट और AI टूल्स तक आसान पहुंच का दुरुपयोग हिंसक गतिविधियों की योजना बनाने के लिए किए जाने की आशंका अब सुरक्षा जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही है।

लाल किले के बाहर हुआ था धमाका

10 नवंबर 2025 को दिल्ली के लाल किले के पास एक कार में विस्फोट हुआ था। NIA की जांच के अनुसार, इस घटना में इस्तेमाल वाहन को कथित तौर पर एक वाहन-आधारित विस्फोटक उपकरण के रूप में तैयार किया गया था। इस हमले में 11 लोगों की मौत हुई थी और 29 लोग घायल हुए थे।

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जांच में उमर उन नबी को कथित आतंकी मॉड्यूल का प्रमुख ऑपरेशनल व्यक्ति बताया गया है। चार्जशीट में उसके कथित नेटवर्क, संपर्कों और हमले की तैयारी से जुड़े कई पहलुओं का उल्लेख किया गया है।

लाल मंदिर भी था कथित तौर पर निशाने पर

जांच में एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। CCTV फुटेज के आधार पर NIA ने कथित तौर पर यह पाया कि धमाके से कुछ मिनट पहले आरोपी ने चांदनी चौक स्थित लाल मंदिर के आसपास कार खड़ी करने की कोशिश की थी।

रिपोर्टों के मुताबिक, भारी ट्रैफिक और पुलिस की मौजूदगी के कारण वह वहां नहीं रुक सका और बाद में लाल किले की तरफ चला गया। इसके कुछ समय बाद लाल किले के गेट नंबर 4 के पास धमाका हुआ।

जांच में डिजिटल और फॉरेंसिक सबूत अहम

पूरे मामले में CCTV फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, ऑनलाइन गतिविधियों और अन्य फॉरेंसिक साक्ष्यों को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। NIA की चार्जशीट में कथित तौर पर आरोपियों की गतिविधियों, संपर्कों और तैयारी से जुड़ी जानकारी शामिल की गई है।

जांच एजेंसी का आरोप है कि यह कोई अचानक की गई कार्रवाई नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक संगठित और लंबे समय से चल रही साजिश थी। हालांकि, चार्जशीट में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगा।

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AI के दुरुपयोग ने बढ़ाई चिंता

इस मामले में AI और ऑनलाइन संसाधनों के कथित इस्तेमाल ने एक अलग बहस भी शुरू कर दी है। तकनीक जहां शिक्षा, रिसर्च और रचनात्मक काम में उपयोगी है, वहीं इसके गलत इस्तेमाल को लेकर सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां पैदा हो रही हैं।

लाल किला ब्लास्ट मामले में NIA द्वारा पेश किए गए डिजिटल साक्ष्यों से यह सवाल भी उठता है कि हिंसक गतिविधियों के लिए ऑनलाइन उपलब्ध जानकारी के दुरुपयोग को रोकने के लिए किस तरह की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत है।

लाल किला ब्लास्ट मामले में NIA की चार्जशीट से जांच की दिशा और कथित साजिश से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आए हैं। जूते में कथित तौर पर रिमोट सिस्टम छिपाने से लेकर कमरे में संदिग्ध सामग्री जमा करने और AI व ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल तक, जांच में कई पहलुओं पर ध्यान दिया गया है।

हालांकि, ये सभी बातें जांच एजेंसी के आरोप और चार्जशीट में दर्ज दावे हैं। मामले में आरोपियों की कानूनी जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण अदालत के फैसले से ही होगा।