राम मंदिर चढ़ावा केस : बड़े चेहरों को बचाया, 8अदने कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में दर्ज FIR में आठ आरोपियों के नाम शामिल किए गए हैं। तीन की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि SIT रिपोर्ट में चर्चा में रहे वरिष्ठ पदाधिकारियों के नाम मुकदमे में शामिल नहीं हैं।

अयोध्या।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में दर्ज हुई FIR ने जांच की दिशा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से गुरुवार को दर्ज कराई गई FIR में आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है, जबकि पहले सामने आई SIT की शुरुआती रिपोर्ट में 17 लोगों के नाम होने की चर्चा थी। इनमें ट्रस्ट महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और निर्माण प्रभारी गोपाल राव जैसे वरिष्ठ पदाधिकारियों के नाम भी बताए जा रहे थे, लेकिन FIR में इन्हें शामिल नहीं किया गया।

ट्रस्ट सदस्य की शिकायत पर दर्ज हुआ मुकदमा

ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने तीन आरोपियों—रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा—को गिरफ्तार कर लिया है। शेष आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चार पुलिस टीमें गठित की गई हैं।

इन 8 लोगों को बनाया गया आरोपी

FIR में जिन लोगों के नाम शामिल हैं—

रामशंकर यादव (टिन्नू)
लवकुश मिश्रा
अनुकल्प मिश्रा
अविनाश शुक्ला
मनीष यादव
रमाशंकर मिश्रा
सुभाष चंद्र श्रीवास्तव
करुणेश पांडेय

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13 जून को बनी थी SIT

राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच के लिए 13 जून को विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया था। टीम ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर अब FIR दर्ज की गई है।

जांच में क्या मिला था

सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान दानपात्रों की चाबियां टिन्नू यादव के पास मिलने की बात सामने आई थी। SIT ने ऐसे करीब 150 सेवादारों और कर्मचारियों की पहचान भी की थी, जिनकी आर्थिक स्थिति 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अचानक बदली बताई गई थी। हालांकि, इन तथ्यों पर आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है।

इस्तीफे की चर्चा भी हुई थी

इस बीच चंपत राय के इस्तीफे की खबरें भी सामने आई थीं, लेकिन मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव ने इन्हें सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि ऐसी कोई स्थिति नहीं है। बहरहाल, FIR में जिन लोगों के नाम नहीं हैं, उनके संबंध में किसी भी प्रकार की आपराधिक जिम्मेदारी अभी स्थापित नहीं हुई है। आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।