राज्यसभा सीट पर आखिरी दांव: आयोग के फैसले पर टिकी कांग्रेस की उम्मीदें

” मीनाक्षी नटराजन के नामांकन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। कांग्रेस ने इसे लेकर चुनाव आयोग में दस्तक दी है। गेंद फिलहाल आयोग के ​पाले में है। चुनाव कार्यक्रम अनुसार,कल यानी गुरुवार को नाम वापसी की अंतिम तिथि है,​यदि कोई बड़ा उलटफेर नहीं हुआ तो मप्र से बीजेपी के तीनों उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन तय माना जा रहा है।”

भोपाल/नई दिल्ली।
मध्य प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र को खारिज किए जाने के बाद कांग्रेस और चुनाव आयोग आमने-सामने आ गए हैं।

कांग्रेस ने आयोग के फैसले को कानून की गलत व्याख्या बताते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

पार्टी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता और सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने चुनाव आयोग के समक्ष विस्तृत प्रतिवेदन सौंपकर नामांकन रद्द करने के आदेश को चुनौती दी है।

सिंघवी बोले- कानून का गलत इस्तेमाल हुआ

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मीना नटराजन के खिलाफ ऐसा कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है, जिसका खुलासा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33 ए के तहत अनिवार्य हो।

उनका दावा है कि उम्मीदवार को केवल एक न्यायालयीन नोटिस मिला है, जबकि किसी भी मामले में अभी तक न्यायालय ने संज्ञान (Cognizance) नहीं लिया है।

सिंघवी ने आयोग के निर्णय को “तथ्यों और कानून दोनों के विपरीत” बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।

धारा 33 ए पर छिड़ी नई बहस

विवाद का केंद्र जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33 ए है, जिसके तहत उम्मीदवारों को गंभीर आपराधिक मामलों की जानकारी चुनावी शपथ पत्र में देना अनिवार्य होता है।

कांग्रेस का तर्क है कि केवल निजी शिकायत या नोटिस को आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता, जब तक अदालत उस पर विधिवत संज्ञान न ले ले।

पार्टी का कहना है कि ऐसे मामलों को आपराधिक प्रकरण मानकर नामांकन खारिज करना कानून की भावना के विपरीत है और इससे चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

कांग्रेस ने दी न्यायालय जाने की चेतावनी

कांग्रेस ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि चुनाव आयोग अपने निर्णय पर पुनर्विचार नहीं करता है तो मामला अदालत तक पहुंच सकता है।

पार्टी का मानना है कि यह सिर्फ एक उम्मीदवार का मामला नहीं, बल्कि चुनावी कानूनों की व्याख्या और उम्मीदवारों के अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न है।

बाड़ेबंदी छोड़ एकजुट हुए कांग्रेसी

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद कांग्रेस ने इसे अपनी राजनीतिक साख से जोड़ लिया है। पार्टी नेतृत्व ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विरोध का मोर्चा खोल दिया है। अब तक संभावित भितरघात से बचने के लिए बाड़ेबंदी में जुटे कांग्रेस विधायक और नेता इस मुद्दे पर एकजुट दिखाई दे रहे हैं।

बुधवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में पार्टी नेताओं ने विरोध प्रदर्शन कर चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

राष्ट्रपति से मिलेंगे कांग्रेस विधायक

जीतू पटवारी ने कहा कि राज्यसभा सीट की “चोरी” के खिलाफ कांग्रेस का आंदोलन जारी रहेगा। मुख्यमंत्री निवास का घेराव किया जाएगा और शुक्रवार को कांग्रेस विधायक दिल्ली जाकर राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे। राष्ट्रपति भवन तक मार्च निकालने की भी तैयारी है।

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताते हुए कहा कि देश कठिन दौर से गुजर रहा है। वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि यह केवल प्रशासनिक फैसला नहीं बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर हमला है।

गुरुवार को साफ होगी तस्वीर

राज्यसभा चुनाव के लिए नाम वापसी की अंतिम तिथि गुरुवार, 11 जून है। मध्य प्रदेश की तीन रिक्त सीटों के लिए कुल चार उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें से मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त हो चुका है।

ऐसे में फिलहाल तीन सीटों के लिए तीन उम्मीदवार ही शेष हैं। यदि चुनाव आयोग की ओर से कोई बड़ा फैसला नहीं आता या नामांकन बहाल नहीं होता, तो नाम वापसी की समयसीमा समाप्त होते ही भाजपा के तीनों उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन लगभग तय माना जा रहा है।

देर रात तक नहीं आया आयोग का फैसला

कांग्रेस के प्रतिवेदन पर आयोग ने शीघ्र निर्णय का संकेत दिया था, लेकिन देर रात तक कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया। ऐसे में अब सभी की निगाहें गुरुवार पर टिकी हैं, जब राज्यसभा चुनाव की पूरी तस्वीर साफ हो सकती है।

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