ED रेड के बाद हरीश रावत का बड़ा दांव, कांग्रेस के पद छोड़ने की पेशकश,फिर दी सफाई

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने ED कार्रवाई के बाद कांग्रेस में अपनी दो संगठनात्मक जिम्मेदारियां छोड़ने की पेशकश की है। उन्होंने कहा कि उनके किसी मामले से पार्टी की भ्रष्टाचार विरोधी लड़ाई कमजोर नहीं होनी चाहिए।

देहरादून/नई दिल्ली।

उत्तराखंड की राजनीति में हरीश रावत से जुड़ा मामला अब नया मोड़ ले चुका है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कांग्रेस में अपनी दोनों मौजूदा जिम्मेदारियां छोड़ने की पेशकश की है।

रावत ने सोशल मीडिया पर लंबी पोस्ट लिखी।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस समय भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है।

ऐसे में अगर उनके किसी मामले से पार्टी के संघर्ष को नुकसान पहुंचता है, तो वह ऐसा नहीं चाहते।

इसीलिए उन्होंने उत्तराखंड PCC सदस्य

और AICC स्थायी आमंत्रित सदस्य पद से हटने की इच्छा जताई है।

ED की कार्रवाई के बाद लिया फैसला

दरअसल, 10 सितंबर को हरीश रावत के पूर्व OSD चंदन सिंह जीना के घर ED ने छापेमारी की थी।

ED की कार्रवाई में करीब 1.28 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त किए जाने की बात सामने आई है।

जीना फिलहाल रावत के पर्सनल असिस्टेंट (PA) के रूप में जुड़े हैं।

वह रावत के मुख्यमंत्री कार्यकाल में OSD भी रह चुके हैं।

इसके बाद रावत ने पार्टी की भूमिका को लेकर अपनी स्थिति साफ की।

उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि इस कार्रवाई का

राजनीतिक असर कांग्रेस की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम पर पड़े।

रावत बोले- सरकारी पद पर हूं ही नहीं

रावत ने अपनी पोस्ट में एक और बात स्पष्ट की।

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उन्होंने कहा कि वह फिलहाल किसी सरकारी पद पर नहीं हैं।

इसलिए सरकारी पद से इस्तीफे का सवाल नहीं है।

उनका फैसला पार्टी में मिली जिम्मेदारियों को लेकर है।

यानी रावत ने खुद को कांग्रेस की संगठनात्मक जिम्मेदारियों से अलग करने की पेशकश की है।

चंदन जीना पर रावत का क्या कहना है?

रावत ने चंदन सिंह जीना के साथ अपने पुराने संबंधों का भी जिक्र किया।

उन्होंने बताया कि जीना उनके OSD रह चुके हैं।

उनके मुख्यमंत्री रहते जीना ने पार्टी और सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली थीं।

हालांकि, रावत ने जीना पर लगे मौजूदा आरोपों पर अंतिम टिप्पणी से दूरी रखी।

उन्होंने कहा कि फिलहाल उन्हें आरोपों पर विश्वास नहीं है।

जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक तथ्य सामने आएंगे।

क्या यह इस्तीफा है?

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर है।

रावत ने कांग्रेस में अपनी दो संगठनात्मक जिम्मेदारियों से हटने की पेशकश की है।

इसलिए इसे सीधे तौर पर राजनीति छोड़ने या कांग्रेस से अलग होने का फैसला कहना सही नहीं होगा।

बाद में रावत ने दी सफाई

हरीश रावत के त्यागपत्र की खबर सामने आने के बाद कांग्रेस में हलचल बढ़ गई।

हालांकि, रावत ने शनिवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे एक और सोशल मीडिया पोस्ट साझा की।

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इसमें उन्होंने अपनी पहली पोस्ट को लेकर स्थिति स्पष्ट की।

रावत ने कहा कि मीडिया के कुछ हिस्सों में उनके कांग्रेस से इस्तीफा देने की खबर चलाई जा रही है।

उन्होंने साफ किया कि उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता नहीं छोड़ी है।

उनके मुताबिक, कांग्रेस से उनका रिश्ता बेहद गहरा है और वह पार्टी के साथ बने रहेंगे।

रावत ने कहा कि देहरादून में ED की कार्रवाई के बाद उन्होंने सिर्फ यह कहा था कि

यदि इससे कांग्रेस की भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के नैरेटिव पर असर पड़ता है,

तो वह पार्टी में मिली अपनी जिम्मेदारियों से हटना चाहेंगे।

इन जिम्मेदारियों में प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी के सदस्य और AICC की वर्किंग कमेटी से जुड़ी जिम्मेदारी शामिल है।

https://www.facebook.com/Harishrawatcmuk

अब कांग्रेस के सामने क्या चुनौती?

रावत के इस कदम से कांग्रेस के सामने भी राजनीतिक सवाल खड़े हो सकते हैं।

एक तरफ पार्टी भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को घेर रही है।

दूसरी तरफ, रावत से जुड़े पूर्व OSD के खिलाफ ED कार्रवाई हुई है।

ऐसे में रावत ने खुद अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस नेतृत्व उनकी पेशकश पर क्या फैसला करता है।

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