नई दिल्ली।
भारत ड्रोन रोधी तकनीक को और मजबूत करने की तैयारी में है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO ने 30 किलोवाट क्षमता वाला लेजर आधारित सिस्टम विकसित किया है।
अब इसे परीक्षण से उत्पादन की दिशा में ले जाने की तैयारी है।
यह Directed Energy Weapon (DEW) है।
इसे खासतौर पर ड्रोन और मानवरहित हवाई वाहनों से निपटने के लिए विकसित किया गया है।
5 किमी तक ड्रोन को निष्क्रिय करने की क्षमता

यह सिस्टम ट्रक पर लगाया गया है। इसकी क्षमता करीब 5 किलोमीटर तक बताई गई है।
इसका इस्तेमाल ड्रोन स्वॉर्म, फिक्स्ड-विंग UAV और निगरानी सेंसरों के खिलाफ किया जा सकता है।
हालांकि, 5 किलोमीटर इसकी बताई गई अधिकतम प्रभावी दूरी है।
वास्तविक प्रदर्शन मौसम, लक्ष्य की प्रकृति और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
कैसे काम करता है लेजर हथियार?

लेजर सिस्टम किसी मिसाइल की तरह गोला या इंटरसेप्टर नहीं छोड़ता।
यह लक्ष्य पर बहुत ज्यादा केंद्रित ऊर्जा की किरण डालता है।
पहले रडार या इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर लक्ष्य का पता लगाते हैं।
इसके बाद लेजर बीम को लक्ष्य पर केंद्रित किया जाता है।
ऊर्जा कुछ समय तक एक ही हिस्से पर पड़ती है।
इससे ड्रोन के महत्वपूर्ण हिस्से या सेंसर क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।
DRDO की सामग्री के अनुसार, सिस्टम ने ड्रोन और निगरानी सेंसरों के खिलाफ अपनी क्षमता प्रदर्शित की है।
मिसाइल की जगह लेजर क्यों अहम?

ड्रोन युद्ध में संख्या सबसे बड़ी चुनौती है।
एक साथ बड़ी संख्या में ड्रोन भेजे जा सकते हैं।
ऐसे में हर छोटे ड्रोन को रोकने के लिए महंगी मिसाइल का इस्तेमाल महंगा पड़ सकता है।
लेजर सिस्टम इस समस्या का एक अलग विकल्प देता है।
इसमें कोई पारंपरिक इंटरसेप्टर मिसाइल खर्च नहीं होती।
सिस्टम को पर्याप्त बिजली मिलने तक लगातार अलग-अलग लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता मिलती है।
इसी वजह से Counter-Drone और Counter-Swarm
तकनीक में Directed Energy Weapons को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
30kW सिस्टम का परीक्षण पूरा

DRDO के 30kW-क्लास सिस्टम के अंतिम परीक्षण अगस्त 2025 में पूरे होने की जानकारी सामने आई है।
अब DRDO अगले चरण में उद्योग के साथ मिलकर इसके उत्पादन की दिशा में बढ़ रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, अगले छह महीनों में उद्योग भागीदार की तलाश की जाएगी।
इससे यह स्पष्ट है कि सिस्टम अभी बड़े पैमाने पर तैनाती के बजाय उत्पादन और सैन्य उपयोग की तैयारी के चरण में है।
30kW से पहले 2kW सिस्टम भी विकसित
भारत ने लेजर आधारित काउंटर-ड्रोन तकनीक में छोटे सिस्टम भी विकसित किए हैं।
DRDO की रिपोर्टों के अनुसार, 2kW श्रेणी के DEW सिस्टम का उपयोग छोटे ड्रोन के खिलाफ किया गया है।
2025 में जम्मू क्षेत्र में ऐसे लेजर सिस्टम से ड्रोन को निष्क्रिय किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।
अब 30kW सिस्टम इस तकनीक को ज्यादा क्षमता और ज्यादा दूरी तक ले जाने की दिशा में अगला कदम है।
50kW और 100kW सिस्टम पर भी काम
DRDO की योजना यहीं खत्म नहीं होती। संगठन ज्यादा क्षमता वाले 50kW और 100kW-क्लास Directed Energy Weapons पर भी काम कर रहा है।
इनका उद्देश्य भविष्य में ज्यादा बड़े और जटिल हवाई खतरों से निपटने की क्षमता विकसित करना है।
भारत की Layered Air Defence में नई परत

30kW लेजर सिस्टम को भारत की व्यापक Layered Air Defence क्षमता का हिस्सा बनाया जा सकता है।
इस व्यवस्था में अलग-अलग स्तरों पर रडार, मिसाइल, गन, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और काउंटर-ड्रोन सिस्टम काम करते हैं।
लेजर हथियार इसमें एक अतिरिक्त विकल्प देगा। खासकर बड़ी संख्या में आने वाले छोटे ड्रोन के खिलाफ इसकी उपयोगिता महत्वपूर्ण हो सकती है।
DRDO के लिए अगली बड़ी चुनौती

तकनीक विकसित करना पहला चरण है।
इसके बाद उसे बड़ी संख्या में बनाना और सेना की जरूरतों के अनुसार तैनात करना बड़ी चुनौती होगी।
इसके लिए विश्वसनीय पावर सप्लाई, बीम कंट्रोल, सेंसर और अलग-अलग मौसम में प्रदर्शन जैसे पहलू महत्वपूर्ण होंगे।
DRDO अब उद्योग के साथ मिलकर इस तकनीक को प्रयोगशाला और परीक्षण क्षेत्र से उत्पादन स्तर तक ले जाने की दिशा में काम कर रहा है।
काउंटर-ड्रोन क्षमता में महत्वपूर्ण तकनीकी विकास
DRDO का 30kW लेजर सिस्टम भारत की काउंटर-ड्रोन क्षमता में महत्वपूर्ण तकनीकी विकास है।
यह करीब 5 किमी तक ड्रोन और अन्य हवाई लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए विकसित किया गया है।
अब इसे उत्पादन की दिशा में ले जाने की तैयारी है।
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