नई दिल्ली: दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए CJP प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई के बीच यूट्यूबर ध्रुव राठी ने हिरासत से रिहा होने के बाद गंभीर आरोप लगाए हैं। ध्रुव राठी ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर दावा किया कि उन्हें उनके घर से जबरन उठाया गया, चोट पहुंचाई गई और करीब 22-23 घंटे तक फोन तथा वकील तक पहुंच नहीं दी गई। उन्होंने अपना पासपोर्ट दिखाते हुए भारतीय नागरिक होने की बात भी स्पष्ट की। दूसरी ओर, CJP के तीन प्रमुख नेताओं अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत से सशर्त रिहाई मिल गई है।

ध्रुव राठी ने पासपोर्ट दिखाकर क्या कहा?
यूट्यूबर ध्रुव राठी ने रिहाई के बाद जारी वीडियो में अपना पासपोर्ट दिखाते हुए कहा कि वह भारतीय नागरिक हैं और उनके भी दूसरे नागरिकों की तरह समान अधिकार हैं। उन्होंने उन दावों को गलत बताया, जिनके मुताबिक वह विदेशी पासपोर्ट धारक होने के कारण प्रदर्शन में शामिल नहीं हो सकते।
ध्रुव राठी ने कहा कि भारतीय नागरिक होने के नाते उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने और अपनी बात रखने का अधिकार है। उन्होंने अपने वीडियो में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ बताया।
बेडरूम से उठाने और मारपीट का आरोप
ध्रुव राठी के मुताबिक, 10 अक्टूबर की सुबह करीब सात बजे वह अपने बेडरूम में सो रहे थे। उनका आरोप है कि कुछ लोग सादे कपड़ों में उनके घर पहुंचे और उनकी मां के दरवाजा खोलने पर कथित तौर पर धक्का देकर अंदर घुस आए।
राठी ने दावा किया कि ये लोग उन्हें बेडरूम से अपने साथ ले गए। उन्होंने इस कार्रवाई को गिरफ्तारी या सामान्य हिरासत के बजाय ‘अपहरण’ बताया। उनके मुताबिक, घर से बाहर निकलने पर वहां 50 से ज्यादा लोग मौजूद थे।
यूट्यूबर ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें एक पुलिस स्टेशन से दूसरे पुलिस स्टेशन ले जाया गया, उनका फोन छीन लिया गया और वकील से संपर्क करने की सुविधा नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्हें चोटें भी आईं।
हालांकि, ये सभी आरोप ध्रुव राठी की ओर से लगाए गए हैं। पुलिस का विस्तृत पक्ष और इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अलग से जरूरी है।
मोदी सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
ध्रुव राठी ने अपनी वीडियो में केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। उन्होंने देश में लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर चिंता जताई। राठी ने CJP नेताओं और अन्य प्रदर्शनकारियों की हिरासत का जिक्र करते हुए इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताया।
उन्होंने यह दावा भी किया कि रिहाई के बाद उनके आसपास कई लोग निगरानी रख रहे हैं और उन्हें अघोषित हाउस अरेस्ट जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
CJP के अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका रिहा
इस बीच, CJP के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दिपके तथा सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को रविवार, 11 अक्टूबर को कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने तीनों को रिहा करने का आदेश दिया।
तीनों नेताओं को शनिवार को मुंबई से दिल्ली पहुंचने के बाद विमान से ही हिरासत में लिया गया था। वे जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली आए थे। इस प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जानी थी।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, तीनों नेताओं को एक साल तक शांति भंग करने वाली गतिविधियों में शामिल नहीं होने की शर्त पर राहत मिली। मामले में जमानत या बॉन्ड से जुड़ी शर्तों का विवरण संबंधित अदालती आदेश से सत्यापित किया जाना चाहिए।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन
CJP का प्रदर्शन कथित मतदाता सूची अनियमितताओं और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर आयोजित किया गया था। संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई थी।
प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के अन्य इलाकों में प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग की। कई लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरें भी सामने आईं।
CJP नेताओं की रिहाई और ध्रुव राठी के आरोपों के बाद पुलिस की कार्रवाई, शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और नागरिक स्वतंत्रता को लेकर बहस तेज हो गई है।
अब आगे क्या?
एक तरफ CJP नेताओं को अदालत से राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ ध्रुव राठी ने अपनी हिरासत को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। अब इन आरोपों पर पुलिस का आधिकारिक पक्ष और संबंधित घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने दिल्ली में प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस की एहतियाती कार्रवाई और नागरिकों के अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले समय में CJP की आगे की रणनीति और ध्रुव राठी के आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।