AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को बड़ा झटका, ₹10,000 के पीस बॉन्ड नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

दिल्ली हाई कोर्ट ने AISA अध्यक्ष नेहा बोरा की पीस बॉन्ड नोटिस के खिलाफ याचिका खारिज कर दी। मामला 10,000 रुपये के निजी मुचलके और मंडी हाउस में हुए प्रदर्शन से जुड़ा है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को बड़ा झटका देते हुए स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के पीस बॉन्ड नोटिस को चुनौती देने वाली उनकी याचिका खारिज कर दी है। 23 अक्टूबर 2026 को जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की पीठ ने याचिका पर राहत देने से इनकार किया। यह नोटिस जांच के दौरान शांति बनाए रखने के लिए 10,000 रुपये के निजी मुचलके और एक जमानतदार से संबंधित है।

हालांकि, अदालत ने साथ ही निर्देश दिया कि नेहा बोरा को कार्यवाही में इस्तेमाल की गई सभी संबंधित सामग्री उपलब्ध कराई जाए। मामले में विस्तृत आदेश का इंतजार है। इसलिए याचिका खारिज होने को आरोपों पर अंतिम न्यायिक फैसला या किसी अपराध में दोष सिद्ध होना नहीं समझना चाहिए।

क्या है नेहा बोरा का पीस बॉन्ड मामला?

नेहा बोरा ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की ओर से जारी उस नोटिस को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें जांच के दौरान शांति बनाए रखने के लिए 10,000 रुपये का निजी मुचलका और एक जमानतदार देने को कहा गया था।

यह नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धाराओं 126 और 130 के तहत जारी किया गया था। ये प्रावधान संभावित रूप से शांति भंग होने की आशंका की स्थिति में एहतियाती कार्रवाई से जुड़े हैं।

नेहा बोरा की ओर से दलील दी गई थी कि नोटिस अस्पष्ट और गलत तथ्यों पर आधारित है। उन्होंने इस कार्रवाई को शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन को रोकने की कोशिश बताया था।

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16 अक्टूबर को क्या हुआ था?

यह मामला 16 अक्टूबर को दिल्ली के मंडी हाउस इलाके में हुए एक प्रदर्शन से जुड़ा है। नेहा बोरा ‘लेहरा दो तिरंगा’ मार्च में शामिल होने के लिए वहां पहुंची थीं। यह प्रदर्शन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से संबंधित था।

पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था और अगले दिन तड़के आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद रिहा कर दिया था। इसके बाद स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड से संबंधित नोटिस जारी किया।

नोटिस में आरोप लगाया गया था कि प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी की गई और निषेधाज्ञा के बावजूद बार-बार प्रदर्शन संबंधी गतिविधियां हुईं। ये प्रशासन की ओर से लगाए गए आरोप हैं; इन्हें अदालत द्वारा सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

हाई कोर्ट में नेहा बोरा के वकील ने क्या दलील दी?

नेहा बोरा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत में कहा कि नोटिस पर्याप्त और स्पष्ट सामग्री के बिना जारी किया गया। उनकी दलील थी कि शांतिपूर्ण विरोध करना और लोकतांत्रिक तरीके से सरकार बदलने की मांग करना अपने आप में गैरकानूनी नहीं है।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जांच पूरी होने से पहले ही निजी मुचलका देने की आवश्यकता कैसे तय की जा सकती है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि इस कार्रवाई से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा के अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित होती है।

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सरकार ने अदालत में क्या कहा?

दिल्ली पुलिस और सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने याचिका का विरोध किया। सरकार की दलील थी कि यह कार्रवाई एहतियाती प्रकृति की है और मजिस्ट्रेट के पास पुलिस रिपोर्ट, जनरल डायरी की प्रविष्टियों तथा अन्य सामग्री के आधार पर कार्यवाही शुरू करने का आधार था।

सरकार ने यह भी कहा कि नोटिस के जरिए नेहा बोरा को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

अदालत ने दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश क्यों दिया?

याचिका खारिज करने के साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि नेहा बोरा को कार्यवाही में भरोसा की गई संबंधित सामग्री उपलब्ध कराई जाए। इससे उन्हें नोटिस के आधार और प्रशासन की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों को समझने का अवसर मिलेगा।

यह निर्देश मामले का महत्वपूर्ण पहलू है। अदालत ने याचिका पर राहत नहीं दी, लेकिन कार्यवाही में इस्तेमाल की गई सामग्री उपलब्ध कराने को कहा। विस्तृत आदेश आने पर अदालत के तर्क और निर्देशों की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

पीस बॉन्ड क्या होता है?

पीस बॉन्ड या शांति बनाए रखने का बंधपत्र एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसके तहत सक्षम मजिस्ट्रेट संभावित शांति भंग होने की आशंका के आधार पर किसी व्यक्ति से निर्धारित अवधि तक शांति बनाए रखने का आश्वासन मांग सकता है।

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ऐसी कार्यवाही अपने आप में किसी अपराध में दोषसिद्धि नहीं होती। संबंधित व्यक्ति को नोटिस में लगाए गए आरोपों का जवाब देने और कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का अवसर मिलता है।

नेहा बोरा के मामले में अदालत ने उनकी याचिका खारिज की है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर इसे किसी आपराधिक आरोप में दोषी ठहराए जाने के बराबर नहीं माना जा सकता।

आगे क्या होगा?

अब मामले में विस्तृत न्यायिक आदेश और मजिस्ट्रेट के समक्ष जारी कार्यवाही पर नजर रहेगी। नेहा बोरा को संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। पीस बॉन्ड की प्रक्रिया और उससे जुड़े अगले कदमों की स्थिति आधिकारिक आदेश तथा आगे की कार्यवाही से स्पष्ट होगी।

दिल्ली हाई कोर्ट ने AISA अध्यक्ष नेहा बोरा की पीस बॉन्ड नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया। यह फैसला नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका पर है, न कि किसी अपराध में नेहा बोरा की दोषसिद्धि पर।