मध्य प्रदेश गठन के साथ ही सीहोर विधानसभा Sehore Constituency अस्तित्व में आई…शुरुआती एक दशक तक यह कांग्रेस के प्रभाव वाली सीट रही। …तब भोपाल व इछावर सीहोर में शामिल थे..70के दशक में यहां जनसंघ का प्रभाव बढ़ा और आपातकाल के दौर के बाद तो यह सीट पूरी तरह पहले जनता पार्टी और बाद में बीजेपी BJP का गढ़ बन गई..
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस वक्त मप्र भाजपा के पोस्टर मेन हैं..भोपाल से लेकर दिल्ली तक पार्टी उनके भरोसे एमपी में पांचवी बार सरकार बनाने की तैयारी में है..
प्रदेश भाजपा में आज मूल व आयातित के बीच प्रतिद्वंदिता देखी जा रही है,लेकिन भोपाल से लगे सीहोर में बीते तीन दशक से किसी मूल भाजपाई का टिकट नहीं मिला..
2013 के चुनाव के ठीक पहले एक मामले में सक्सेना को सजा हुई तो भाजपा ने उनकी पत्नी उषा को अपना उम्मीदवार बनाया..वहीं कांग्रेस ने नए चेहरे हरीश राठौर को मौका दिया।
रमेश सक्सेना की भाजपा में आमद के बाद जिले में भाजपा की राजनीति उनके इर्द-गिर्द ही रही। ऐसा 2013 तक हुआ। इन 20 सालों में जनसंघ और जनता पार्टी के कार्यकर्ता घर बैठते गए।नगर पालिका चुनाव में भी यही हुआ।