MP: डॉक्टर भर्ती के बाद पोस्टिंग विवाद, उम्मीदवारों और स्वास्थ्य विभाग के बीच मतभेद

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रवि अवस्थी,भोपाल।

मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग पहली बार एक साथ करीब 1220 चिकित्सा अधिकारियों की नियुक्ति करने जा रहा है। हालांकि पदस्थापना प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही यह विवादों में घिर गई है।

चयनित उम्मीदवारों का आरोप है कि रिक्त पदों की पूरी और अद्यतन जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, जबकि स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि पदस्थापना आवश्यकता और उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर की जा रही है।

पोस्टिंग प्रक्रिया पर उठे सवाल

स्वास्थ्य विभाग ने वर्ष 2024 में 1832 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। मप्र लोक सेवा आयोग द्वारा 1649 पदों के विरुद्ध 1220 चिकित्सा अधिकारियों की चयन सूची जारी की जा चुकी है।

इतनी बड़ी संख्या में डॉक्टरों की भर्ती प्रदेश के चिकित्सा इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक मानी जा रही है।

43 जिलों तक सीमित की चॉइस फिलिंग

विभाग ने 30 मई को चॉइस फिलिंग प्रक्रिया शुरू करते हुए 48 जिलों के पीएचसी और सीएचसी की सूची जारी की।

इसकी अंतिम तिथि 3 जून रखी गई है। इसमें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर सहित कुछ जिलों को शामिल नहीं किया गया।

इसी को लेकर चयनित उम्मीदवार सवाल उठा रहे हैं कि रिक्तियों की पूरी तस्वीर उनके सामने क्यों नहीं रखी गई?

स्वास्थ्य केंद्रो की सूची 10 साल पुरानी

सूत्रों का दावा है कि विभाग ने स्वास्थ्य केंद्रों की जो सूची जारी की,वह करीब एक दशक पुरानी है। इसे अंतिम बार साल 2019 में अपडेट किया गया था।

इनमें ‘इन -सर्विस ‘ वाले वे पद भी शामिल हैं,जो पदस्थापना पर अतिरिक्त लाभ की श्रेणी में आते हैं। इन पदों पर कार्यरत चिकित्सकों को पीजी करने पर वर्षवार 10 प्रतिशत बोनस अंको का लाभ मिलता है। 05 साल की सेवा ​अनिवार्य है। वहीं,उल्लंघन पर बड़ी आर्थिक पेनाल्टी भी अदा करनी होती है।

विभाग ही नियमों की अनदेखी पर उतारू
इस मामले में विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल का तर्क है कि नए चिकित्सा अधिकारियों की पदस्थापना में इन-सर्विस पदों का तत्काल कोई विशेष लाभ नहीं है।

वर्णवाल के अनुसार , चॉइस फिलिंग उन्हीं स्थानों के लिए कराई जा रही है, जहां चिकित्सकों की अधिक आवश्यकता है।

वहीं स्वास्थ्य आयुक्त एस. धनुराजू ने इस विषय पर टिप्पणी करने से इनकार किया है। जबकि,
संचालनालय स्तर पर जिम्मेदार अधि​कारियों ने भी गोलमोल जवाब दिया।

चयनित उम्मीदवारों ने रखी ये मांगें

इधर,एमपी पीएससी से चयनित उम्मीदवारों में विभाग द्वारा पैदा की गई इस गफलत को लेकर असंतोष है। उन्होंने आधा दर्जन मांगे विभाग के सामने रखी हैं। इनमें कहा गया कि

1. चिकित्सा अधिकारियों के सभी वास्तविक एवं अंतिम रिक्त पदों की जिला-वार, विकासखंड-वार एवं संस्थान-अद्यतन सूची सार्वजनिक पोर्टल पर प्रकाशित की जाए।

2. स्थानांतरण नीति के अंतर्गत संचालित समस्त स्थानांतरण प्रक्रियाओं के पूर्ण होने के उपरांत रिक्तियों का पुनः सत्यापन कर अंतिम सूची जारी की जाए।

3. अंतिम एवं अद्यतन रिक्तियों के आधार पर ही चयनित चिकित्सा अधिकारियों से चॉइस फिलिंग कराई जाए।

4. अभ्यर्थियों के लिए मेरिट, श्रेणीवार उपलब्ध रिक्तियां तथा पदस्थापना प्रक्रिया से संबंधित सभी आवश्यक विवरण पारदर्शी रूप से सार्वजनिक किए जाएं।

5. यदि आवश्यक हो तो चॉइस फिलिंग की वर्तमान समय-सीमा को पुनर्निर्धारित किया जाए ताकि किसी भी अभ्यर्थी के हित प्रभावित न हों।

6. पदस्थापना प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता, निष्पक्षता एवं समान अवसर सुनिश्चित करने हेतु समस्त रिक्तियों एवं चयन मानदंडों का सार्वजनिक प्रकटीकरण किया जाए।