Nagda-Khachrod constituency: बीते 3 दशक से यहां रहा विधायक बदलने का ट्रेंड

रवि अवस्थी,भोपाल। नागदा,मालवा की संस्कृति में रचा-बसा एक औद्योगिक नगर..मध्य प्रदेश का पहला नगर जहां देश के प्रमुख औद्योगिक समूह आदित्य बिड़ला ने 50 के दशक में ग्रेसिम मिल्स की स्थापना की..मिल्स ही नहीं,स्कूल,अस्पताल,विशाल उद्यान व एक समूचा बिड़ला ग्राम बसाने का काम भी इस समूह ने यहां किया..नागदा रेलवे का प्रमुख जंक्शन भी है..

देखा जाए तो अपनी संस्कृति को सहेजने के साथ ही नागदा क्षेत्र के लोगों की सोच आधुनिक व प्रगतिवादी भी रही..वर्ष 2008 के परिसीमन में नागदा को एक अन्य संपन्न शहर खाचरौद का साथ मिला तो यह विधानसभा क्षेत्र सियासी तौर पर भी मजबूत हुआ..शुरुआती दौर में यह भले ही जनसंघ का गढ़ रहा..लेकिन बीते तीन दशक से यहां हर चुनाव में विधायक बदलने का ट्रेंड बना हुआ है..

. वर्ष 2008 में अस्तित्व में आई यह विस सीट
. नागदा,खाचरौद औद्योगिक,व्यावसायिक शहर
. बिड़ला समूह की ग्रेसिम मिल प्रमुख पहचान
. 50 के दशक में शुरू हुआ नागदा का विकास
. नागदा को अब अलग जिला बनवाने की तैयारी
………………

नागदा का नाम जुड़ने से पहले खाचरौद स्वतंत्र सीट रही..80 के दशक तक यहां हिंदू महासभा,जनसंघ व जनता पार्टी का कब्जा रहा..कांग्रेस को यहां पहली जीत 1985 में मिली..लेकिन 90 के दशक से एक बार बीजेपी तो एक बार कांग्रेस प्रतिनिधि चुने जाने का जो ट्रेंड शुरू हुआ वह नई सीट बनने के बाद भी जारी है..

वर्ष 1993 में इसमें ब्रेक भी लगा तब कांग्रेस के ही पूर्व विधायक टिकट कटने से नाराज होकर निर्दलीय ही मैदान में उतरे व बीजेपी एवं कांग्रेस दोनों को करारी शिकस्त दी..इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व विधायक रणछोड़ लाल आंजना तो अपनी जमानत अपनी गंवा बैठे थे..उन्हें महज 8 प्रतिशत वोट मिले थे..जबकि बीजेपी के सिटिंग एमएलए को सिर्फ 36 प्रतिशत वोट मिले…

नई विधानसभा के बीते तीन चुनाव के परिणामों पर ही गौर किया जाए तो वर्ष 2008 के पहले चुनाव में पूर्व विधायक दिलीप सिंह गुर्जर ने बीजेपी के दिलीप सिंह शेखावत को  9 हजार 892 मतों से शिकस्त दी..तो 2013 के चुनाव में शेखावत ने अपनी हार का बदला लेते हुए इस बार गुर्जर को 16 हजार से अधिक मतों से पराजित किया..वर्ष 2018 के चुनाव में गुर्जर जीते लेकिन इस बार उनकी जीत का मार्जिन घटकर सिर्फ 5 हजार 117 रह गया….
……………………………………………………..

बीते तीन चुनाव के नतीजे

वर्ष            बीजेपी             कांग्रेस           तीसरा दल       विजयी     मार्जिन
2008  दिलीप शेखावत   दिलीप गुर्जर   जगदीश धाकड़     कांग्रेस      9,892
मत       47,337(42%)   57,229(50%)     4187(4 %)      …           ….

2013   दिलीप शेखावत   दिलीप गुर्जर    नयाबुद्दीन (सपा) बीजेपी  16,115
मत        78,036(53%)    61,921(42%)  1975(1%)         ….          ….

2018   दिलीप शेखावत   दिलीप गुर्जर    नयाबुद्दीन (सपा)   बीजेपी   5,117
           78,706(47%)      83,823(50%)  1,318(1%)            ….        ….
        ……………………………………………………..

नागदा-खाचरौद विधानसभा में मतदाताओं की कुल संख्या 2 लाख 16 हजार 2 सौ 56 है.. ठाकुर,गुर्जर व ब्राह्मण बाहुल्य इस सीट पर इन जातियों के प्रतिनिधियों का दबदबा रहा है..चंबल बेसिन का यह क्षेत्र कृषि प्रधान है..ज्यादातर किसान संपन्न की श्रेणी में आते हैं..नागदा औद्योगिक क्षेत्र में रोजगार के अवसर सुलभ होने से क्षेत्र में बाहरी श्रमिक भी बहुतायत में हैं..

जिला मुख्यालय उज्जैन से खाचरौद नजदीक है,लेकिन नागदा की दूरी करीब 60 किमी. है..इसे देखते हुए नागदा को अलग जिला बनाने की मांग लंबे अरसे से जारी है,बल्कि यह चुनावी मुद्दा भी है..

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने तो इसकी घोषणा ही कर दी थी..माना जा रहा है जल्दी ही नागदा को प्रदेश का 54 वां जिला बनाया जा सकता है..

दिलीप गुर्जर MLA Congress

…………………………………………

कुल मतदाता 02,16,256
हर चुनाव में बदलते हैं MLA
90 से चल रहा है यह ट्रेंड
शेखावत,गुर्जर बाहुल्य सीट
नागदा को जिला बनाने की मांग
………………………………………….

कांग्रेस में ऐन वक्त तक पाला बदलने की सियासत नहीं हुई तो चार बार के विधायक दिलीप सिंह गुर्जर के टिकट को कोई खतरा फिलहाल नहीं है…।

भाजपा में तो एक अनार सौ बीमार जैसे हालात हैं..शिवराज सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त असंगठित कामगार कल्याण बोर्ड के चेयरमैन सुल्तान सिंह शेखावत व उनके इंजीनियर बेटे मोती सिंह शेखावत दावेदारों में शामिल हैं..इनके अलावा पूर्व विधायक दिलीप सिंह शेखावत(Photo ) की पिछले तीन चुनाव में से हो हारने के कारण दावेदारी कमजोर हुई है..

पूर्व विधायक लाल सिंह राणावत Lal singh ranawat ,तेज बहादुर सिंह चौहान,सांसद प्रतिनिधि प्रकाश जैन Prakash Jain व पूर्व नपा उपाध्यक्ष राजेश धाकड़,विजय कुमार सेठी,केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से जुड़े सूर्य प्रकाश शर्मा,राधेश्याम बंबोरिया तथा अनोखी लाल भंडारी Anokhilal Bhandari के नाम भी चर्चा में है..

दावेदारी को लेकर बीजेपी में मचे घमासान का नजारा चंद माह पहले हुए नगरीय निकाय चुनाव में भी देखा गया..जब पार्टी को बागी हुए नागदा के 29 व खाचरौद के 7 नेताओं को निलंबित करना पड़ा था… नतीजा यह हुआ कि खाचरौद में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा…

एक अनार सौ बीमार…
टिकट को लेकर बीजेपी में घमासान
एक अनार सौ बीमार वाले हालात
कांग्रेस से गुर्जर का नाम लगभग तय

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *