Mahidpur constituency of Ujjain : यहां बीजेपी,कांग्रेस के बीच हमेशा रही कांटे की टक्कर

रवि अवस्थी,भोपाल। महिदपुर उज्जैन जिले में क्षिप्रा किनारे बसा एक नगर..यहां कभी मराठा व ब्रिटिश के बीच बड़ा युद्ध हुआ था..इसके बाद ही मंदसौर संधि हुई और मालवा में तब अंग्रेजों की यह बड़ी छावनी बन गया…लेकिन अंग्रेजों के खिलाफ महिदपुर वासियों की लड़ाई जारी रही..इसके चलते 1882 में अंग्रेजों को अपनी यह छावनी हटानी पड़ी..

महिदपुर विधानसभा में सियासत का मिजाज आज भी कुछ ऐसा है..यहां से दो बार विधायक बनी तेजतर्रार कल्पना परुलेकर मौका पड़ने पर अपनी ही सरकार के खिलाफ सही बात कहने से भी नहीं चूकीं..

महिदपुर विधानसभा उज्जैन जिले की एक अहम सीट..मध्य प्रदेश गठन के साथ ही महिदपुर सीट विधानसभा का हिस्सा बनी..इस सीट के लिए अब तक हुए 14 चुनाव में बीजेपी ने 8 बार तो कांग्रेस को 6 बार जीत मिली..इसे देखते हुए महिदपुर को बीजेपी के प्रभाव वाला क्षेत्र कहा जा सकता है..लेकिन जीत उसके लिए भी कभी आसान नहीं रही…

बीते एक दशक से यहां बीजेपी विधायक बहादुर सिंह चौहान लगातार चुनाव जीतते रहे..शिक्षक से नेता बने चौहान तीन बार के विधायक हैं..पहला चुनाव उन्होंने उमा लहर में वर्ष 2003 में जीता..लेकिन अगले ही चुनाव में कांग्रेस की पूर्व विधायक डॉ कल्पना परुलेकर ने उन्हें शिकस्त दी..परुलेकर दूसरी बार विधानसभा जरूर पहुंची..

लेकिन इस बार वह क्षेत्र के मुद्दों की जगह गलत सलाहकारों के फेर में आकर विधानसभा सचिवालय व अन्य गैर जरूरी मामलों में उलझ कर रह गईं..इससे उनके अपने क्षेत्र में भी उनकी साख प्रभावित हुई..

प्रत्याशी चयन में चूक का भुगता खामियाजा

बहादुर सिंह चौहान(Photo) Present MLA Of BJP

बीते दो चुनाव से महिदपुर में कमल खिल रहा है तो इसकी बड़ी वजह कांग्रेस की प्रत्याशी चयन में चूक बताई जाती है..पिछले यानी 2018 के ही चुनाव की बात करें तो कांग्रेस से बागी होकर निर्दलीय मैदान में उतरे दिनेश जैन ने करीब 35% वोट हासिल किए..इसके चलते कांग्रेस प्रत्याशी सरदार सिंह चौहान को महज 14 % वोट ही मिले और वह अपनी जमानत गंवा बैठे..जबकि सरदार सिंह को कांग्रेस ने चौहान जाति के वोट काटने के इरादे से मैदान में उतारा था…

लेकिन बीजेपी के बहादुर सिंह चौहान(Photo) की अपने समाज पर पकड़ मजबूत साबित हुई और वह 15 हजार से अधिक मतों से विजयी रहे…2013 के चुनाव में भी कांग्रेस के बागी दिनेश जैन ने बतौर निर्दलीय प्रत्याशी 37 फीसद से अधिक वोट हासिल कर कांग्रेस की कल्पना परुलेकर की जमानत जब्त करवाई थी…

2003 में अपनी सिटिंग एमएलए कल्पना परुलेकर(Photo) का टिकट काटकर प्रताप गुरू को प्रत्याशी बनाया..इस चुनाव में कल्पना ने दल बदल कर एनसीपी से चुनाव लड़ा और कांग्रेस के वोट काटे…अंतत:2008 के चुनाव में कांग्रेस को कल्पना ने अपना उम्मीदवार बनाया और वह विजयी रहीं..आइए,आंकड़ों से जानते हैं कैसे रहे महिदपुर सीट पर पिछले चार चुनाव के नतीजे…
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वर्ष          बीजेपी             कांग्रेस               तीसरा स्थान     विजयी दल   मार्जिन

2003   बहादुर सिंह     प्रताप गुरू           कल्पना/एनसीपी    बीजेपी                …
मत %   49                  30                           12 …          ….                18,717

2008  बहादुर सिंह    कल्पना                   केएल राठी निर्द.  कांग्रेस                …
मत %     43             45                            06 …                                 1,930

2013  बहादुर सिंह   कल्पना                   दिनेश जैन निर्द.    बीजेपी             …
मत %   53              5.0                           37                   …              20,634

2018 बहादुर सिंह    सरदार सिंह            दिनेश जैन निर्द.     बीजेपी                      …
मत %    45               14                        35                     …              15,220
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सियासी दांव पेंच जारी
बीजेपी से तीन बार के विधायक बहादुर सिंह चौहान इस बार भी टिकट के प्रबल दावेदार हैं.. जीत के लिए हर सियासी दांव पेंच भी अपनाए जा रहे हैं..सालभर पहले ही विधायक की पहल पर जनपद अध्यक्ष पद की दावेदार कांग्रेस की रीता बडगुर्जर ने बीजेपी का दामन थाम लिया..इससे पहले कांग्रेस से बागी होकर दो चुनाव में प्रमुख दलों के प्रत्याशियों को पसीना छुड़ा चुके दिनेश जैन के खिलाफ करीब 30 करोड़ रुपए के राजस्व चोरी मामले में प्रकरण दर्ज किया गया..

क्षेत्र में विकास कार्यों की भी बहार आई हुई है..बावजूद इसके विधायक की कार्यशैली को लेकर आमजन में असंतोष बताया जा रहा है..माना जा रहा है कि बीजेपी इस बार महिदपुर से चेहरा बदल सकती है..वहीं दिनेश जैन अब कांग्रेस में वापस आ चुके हैं..

यह भी चर्चा है कि पार्टी इस बार दिनेश पर दांव लगा सकती है..बीजेपी से अन्य दावेदारों की बात करें तो मंडी अध्यक्ष रहे कैलाशपुरी गोस्वामी,अधिवक्ता भगवान सिंह पंवार,पूर्व विधायक बाबूलाल जैन के चुनाव प्रभारी रहे ओम जैन दावेदारों में शामिल हैं..।

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