MP: निजी विश्वविद्यालयों की फीस समिति बनी, डॉ. आचार्य को अध्यक्ष की जिम्मेदारी

मध्य प्रदेश सरकार ने निजी विश्वविद्यालयों में प्रवेश और फीस निर्धारण के लिए समिति गठित की है। डॉ. राजकुमार आचार्य अध्यक्ष बनाए गए हैं। आदेश में उनके पदनाम को लेकर सवाल उठे हैं।

भोपाल(9826019364)।

मध्य प्रदेश सरकार ने निजी विश्वविद्यालयों में प्रवेश और फीस निर्धारण की प्रक्रिया के लिए मप्र प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति का गठन किया है।

जीवाजी विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति रहे डॉ. राजकुमार आचार्य को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

सामान्य प्रशासन विभाग के उपसचिव जयेंद्र सिंह विजयवत के हस्ताक्षर से बुधवार को इस संबंध में आदेश जारी किया गया।

विधि और वित्त विभाग के सचिव होंगे सदस्य

समिति में विधि एवं वित्त विभाग के सचिवों को सदस्य बनाया गया है।

इसके अलावा, चिकित्सा शिक्षा और तकनीकी शिक्षा विभाग के संचालक भी समिति में शामिल होंगे।

यदि संबंधित विभागों के संचालक सदस्य नहीं बनते हैं, तो अतिरिक्त संचालक यह जिम्मेदारी संभालेंगे।

आदेश में पदनाम को लेकर सवाल

समिति गठन के आदेश में डॉ. राजकुमार आचार्य को जीवाजी विश्वविद्यालय का कुलपति बताया गया है।

हालांकि, उच्च शिक्षा विभाग में कुलपति के स्थान पर कुलगुरु पदनाम का इस्तेमाल किया जा रहा है।

वहीं, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, डॉ. आचार्य जीवाजी विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलगुरु रहे हैं।

इसी महीने प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत को विश्वविद्यालय का कुलगुरु नियुक्त किया गया है।

ऐसे में समिति के आदेश में दर्ज पदनाम और वर्तमान स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

पुरानी कार्यप्रणाली को लेकर उठते रहे हैं सवाल

मप्र प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति की कार्यप्रणाली पहले भी चर्चा में रही है।

निजी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से जुड़े फीस निर्धारण के मामलों में समिति पर सवाल उठते रहे हैं।

आरोप लगाए जाते रहे हैं कि निजी संस्थानों के साथ कथित सांठगांठ के जरिए फीस तय होती रही है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और उनका अंतिम निष्कर्ष अलग-अलग मामलों पर निर्भर करता है।

समिति के पूर्व अध्यक्ष पर निजी संस्थानों से शुल्क वृद्धि के प्रस्ताव मंगाने के आरोप भी लगे थे।

नए अध्यक्ष के सामने पारदर्शिता की चुनौती

आरजीपीवी की करोड़ों रुपये की राशि निजी खातों में जमा कराने के मामले में आरोपी रहे

सुनील कुमार गुप्ता भी अतीत में इस समिति में महत्वपूर्ण पद पर रह चुके हैं।

हालांकि, किसी मामले में आरोपी होना दोष सिद्ध होने के समान नहीं है।

ऐसे में नए अध्यक्ष के सामने समिति की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने की चुनौती होगी।

फीस निर्धारण की प्रक्रिया में स्पष्ट नियम और जवाबदेही सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण रहेगा।

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