MP : डिप्टी CM के पूर्व OSD दीपम रायचुरा सस्पेंड, फर्जी FDR और रिश्वत के आरोपों से घिरे

मध्यप्रदेश में पूर्व OSD दीपम रायचुरा सस्पेंड। शराब दुकानों की ₹2.75 करोड़ की कथित फर्जी FDR, लाइसेंस ट्रांसफर में गड़बड़ी और रिश्वत के आरोपों की पूरी खबर।

भोपाल।

मध्यप्रदेश में शराब दुकानों के टेंडर और लाइसेंस ट्रांसफर से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर बड़ी कार्रवाई हुई है।

डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के पूर्व OSD दीपम रायचुरा को निलंबित कर दिया गया है।

(दीपम रायचुरा)

आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने सोमवार रात निलंबन आदेश जारी किया।

रायचुरा पर सरकारी प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियों के आरोप हैं।

(आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना)

जांच में 2.75 करोड़ रुपये से अधिक की कथित फर्जी बैंक एफडीआर स्वीकार करने का मामला सामने आया।

इसके अलावा, पार्टनरशिप डीड के बिना शराब दुकान का लाइसेंस ट्रांसफर करने पर भी सवाल उठे हैं।

मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया, जब भोपाल की दो शराब दुकानों के बदले

एक करोड़ रुपये की कथित रिश्वत लेने का आरोप सामने आया।

यह आरोप करीब 930 करोड़ रुपये की ठगी के आरोपी मोहित गोगिया के बयान से जुड़ा है।

हालांकि, रिश्वत के आरोपों को जांच और न्यायिक प्रक्रिया में प्रमाणित किया जाना बाकी है।

रायचुरा को इससे पहले शराब दुकान टेंडर में गड़बड़ियों की

खबरें सामने आने के बाद OSD पद से हटाया गया था।

अब विभागीय जांच में सामने आए बिंदुओं के आधार पर निलंबन की कार्रवाई की गई है।

₹2.75 करोड़ की FDR पर सवाल, बैंक ने जारी करने से किया इनकार

जांच का सबसे अहम बिंदु शराब दुकानों की सिक्योरिटी के लिए जमा कराई गई बैंक एफडीआर है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, AU स्मॉल फाइनेंस बैंक की

2 करोड़ 75 लाख 53 हजार 535 रुपये की एफडीआर स्वीकार की गई थी।

इस पर 12 मई 2024 की तारीख दर्ज थी।

रिकॉर्ड में 20 मई को सत्यापन किए जाने का उल्लेख भी था।

लेकिन बाद में बैंक ने पत्र जारी कर स्पष्ट किया कि उसने यह एफडीआर जारी ही नहीं की थी।

एफडीआर के सत्यापन की जिम्मेदारी आबकारी उपनिरीक्षक वर्षा उइके की थी।

जांच के दौरान उन्होंने बताया कि सत्यापन के लिए उन्हें कोई पत्र नहीं मिला था।

एफडीआर पर संबंधित बैंक शाखा का नाम भी दर्ज नहीं था।

इसके बावजूद लाइसेंसी जसवंत के ईमेल से प्राप्त सत्यापन रिपोर्ट स्वीकार कर ली गई।

विभागीय जांच में एफडीआर और सत्यापन रिपोर्ट, दोनों को फर्जी पाया गया।

सवाल यह है कि बैंक से स्वतंत्र सत्यापन किए बिना इतनी बड़ी राशि की FDR कैसे स्वीकार की गई?

साथ ही, सत्यापन प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

22 दिन की देरी के बाद जमा हुई ₹1.37 करोड़ की सिक्योरिटी

                                                          (जांच एजेंसी को दिया गया मोगिया का लिखित बयान)

जांच में सिक्योरिटी राशि जमा करने में देरी का मामला भी सामने आया है।

नियमों के अनुसार, 1 करोड़ 37 लाख 76 हजार 768 रुपये की नकद राशि

50 प्रतिशत सिक्योरिटी के रूप में जमा की जानी थी।

लेकिन यह राशि निर्धारित समय से 22 दिन बाद जमा हुई।

इसके बावजूद देरी के लिए संबंधित पक्ष पर कार्रवाई नहीं की गई।

जांच के मुताबिक, दूसरी सिक्योरिटी लिए बिना ही राशि को समायोजित कर लिया गया।

इससे आबकारी विभाग की प्रक्रिया और वित्तीय नियंत्रण पर सवाल उठे हैं।

पार्टनरशिप डीड के बिना लाइसेंस ट्रांसफर का आरोप

मेसर्स मां माइंस के शराब दुकान लाइसेंस ट्रांसफर में भी कथित अनियमितताएं सामने आईं।

रिकॉर्ड के मुताबिक, ट्रांसफर की राशि 10 जुलाई 2024 को प्राप्त हुई थी।

हालांकि, कलेक्टर भोपाल का आदेश 27 दिसंबर 2024 को जारी हुआ।

जांच में कहा गया कि लाइसेंस ट्रांसफर से पहले आवश्यक पार्टनरशिप डीड नहीं ली गई थी।

आदेश में विजय सिंह को फर्म का भागीदार बताया गया।

लेकिन सप्लीमेंट्री पार्टनरशिप डीड में उनका नाम दर्ज नहीं था।

इसके बावजूद विजय सिंह की 76 लाख रुपये की बैंक गारंटी स्वीकार कर ली गई।

यह गारंटी ICICI बैंक की नेहरू नगर, भिलाई शाखा से संबंधित बताई गई है।

रिकॉर्ड के अनुसार, इसे 15 जुलाई 2024 को जमा किया गया था।

जांच में यह भी सामने आया कि विजय सिंह न तो मूल लाइसेंसधारी थे और न ही फर्म के भागीदार।

उनका फर्म से कोई लिखित संबंध भी नहीं पाया गया।

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व्यक्तिगत खाते के चेक स्वीकार करने पर भी सवाल

जांच में विजय सिंह के व्यक्तिगत बैंक खाते से जुड़े चेक स्वीकार किए जाने पर भी आपत्ति दर्ज की गई।

सरकारी राजस्व की वसूली ऐसे व्यक्ति पर निर्भर हो गई,

जिसका लाइसेंसी फर्म से कानूनी संबंध स्पष्ट नहीं था।

इसके अलावा, प्रताप धाकड़ और विजय सिंह को मेसर्स मां माइंस तथा

बिलखरिया कंपोजिट शराब दुकान से जुड़ा भागीदार या लाइसेंसी बताया गया।

लेकिन विजय सिंह का नाम पार्टनरशिप डीड में नहीं था।

इसी तरह, आशीष धाकड़ को भी मेसर्स मां माइंस का भागीदार बताया गया।

जांच के मुताबिक, न तो वे फर्म के मालिक थे और न ही सप्लीमेंट्री पार्टनरशिप डीड में उनका नाम दर्ज था।

इन तथ्यों के आधार पर विभागीय जांच में लाइसेंस ट्रांसफर, भागीदारी

और बैंक गारंटी स्वीकार करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।

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₹1 करोड़ रिश्वत लेने का आरोप, 50 लाख नकद देने का दावा

दीपम रायचुरा पर भोपाल में दो शराब दुकानें दिलाने के बदले एक करोड़ रुपये की रिश्वत लेने का आरोप भी है।

यह आरोप मोहित गोगिया के बयान से सामने आया।

गोगिया पर करीब 930 करोड़ रुपये की ठगी का आरोप है।

उसने दावा किया कि रायचुरा को एक करोड़ रुपये दिए गए थे।

इसमें 50 लाख रुपये नकद और बाकी 50 लाख रुपये बैंक खाते के माध्यम से ट्रांसफर करने की बात कही गई।

निलंबन के दौरान ग्वालियर रहेगा मुख्यालय

दीपम रायचुरा जिला आबकारी अधिकारी, द्वितीय श्रेणी के पद पर पदस्थ थे।

वे राज्यस्तरीय उड़नदस्ते में प्रभारी सहायक आबकारी आयुक्त की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे।

आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने विभागीय जांच के आधार पर निलंबन आदेश जारी किया।

निलंबन अवधि में रायचुरा का मुख्यालय आबकारी आयुक्त कार्यालय, ग्वालियर निर्धारित किया गया है।

अब इस मामले में विभागीय जांच की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

जांच में यह स्पष्ट करना होगा कि कथित अनियमितताओं के लिए किन अधिकारियों

और संबंधित पक्षों की क्या भूमिका रही।

साथ ही, शराब दुकान लाइसेंस जारी करने और

ट्रांसफर करने की प्रक्रिया में जिम्मेदारी भी तय करनी होगी।

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  • मध्यप्रदेश आबकारी विभाग (MP Excise Department)

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  • भोपाल आबकारी विभाग (Bhopal Excise Department)

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