मप्र विधानसभा मानसून सत्र: 29 जून तक जमा होंगे लिखित प्रश्न,आएगा UCC बिल

मध्य प्रदेश विधानसभा का पावस सत्र 20 से 24 जुलाई तक आयोजित होगा। विधानसभा सचिवालय ने विभागवार प्रश्न जमा करने की समय-सीमा जारी की है। विधायकों के प्रश्न 21 से 29 जून तक ऑनलाइन-ऑफलाइन जमा होंगे।

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भोपाल।

मध्य प्रदेश विधानसभा का पावस सत्र 20 से 24 जुलाई 2026 तक आहूत किया गया है।

सत्र के लिए विधायकों द्वारा पूछे जाने वाले तारांकित-अतारांकित प्रश्नों की सूचना देने की अंतिम तिथियां विधानसभा सचिवालय ने जारी कर दी हैं.

प्रश्न ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से निर्धारित तिथियों तक जमा किए जा सकेंगे।

मानसून सत्र में ही मप्र सरकार यूसीसी बिल लाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने बुधवार को इसके संकेत दिए।

विभागवार प्रश्न जमा करने की अंतिम तिथियां

वर्ग-1   (ऑनलाइन 21 जून 2026 , ऑफलाइन  22 जून 2026)

विभाग: पंचायत एवं ग्रामीण विकास ,श्रम ,कृषि, खेल,सहकारिता ,उच्च शिक्षा ,आयुष                      ,तकनीकी शिक्षा ,कौशल विकास एवं रोजगार

वर्ग-2  (ऑनलाइन 22 जून 2026, ऑफलाइन  23 जून 2026)

विभाग:जीएडी,होम,जेल,उद्योग,जनसंपर्क,एनव्हीडीए,विमानन,खनिज,लोक सेवा,प्रवासी भारतीय,विधि,आनंद,विज्ञान एवं प्रौ.,वन,पर्यावरण,वित्त,वाणिज्य कर,योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी,एमएसएमई व कुटीर ग्रामोद्योग

वर्ग-3  (ऑनलाइन 23 जून 2026, ऑफलाइन 24 जून 2026)

विभाग: राजस्व,जल संसाधन ,परिवहन ,स्कूल शिक्षा,संस्कृति,पर्यटन,धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व,

वर्ग-4  (ऑनलाइन 24 जून 2026, ऑफलाइन 25 जून 2026)

नगरीय विकास एवं आवास,संसदीय कार्य,लोक निर्माण,ऊर्जा, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण, विमुक्त, घुमंतु एवं अर्धघुमंतु कल्याण,पशुपालन एवं डेयरी

वर्ग-5 (ऑनलाइन 28 जून 2026 ,ऑफलाइन 29 जून 2026)

विभाग: जनजातीय कार्य,लोक परिसंपत्ति प्रबंधन,भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास,खाद्य,पीएचई,महिला एवं बाल विकास,सामाजिक न्याय,उद्यानिकी व अजजा कल्याण।

मानसून सत्र में आएगा यूसीसी बिल

मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सरकार अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि आगामी मानसून सत्र में यूसीसी का प्रस्ताव विधानसभा में लाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि महाकाल की कृपा रही तो इसी सत्र में यह प्रस्ताव पारित भी हो सकता है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात के बाद यूसीसी लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने वाले राज्यों की कतार में शामिल हो गया है।

20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में यूसीसी प्रस्ताव सरकार के प्रमुख एजेंडों में शामिल रहने की संभावना है। मुख्यमंत्री के बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक बहस भी तेज हो गई है।

भाजपा ने बताया राष्ट्रीय आवश्यकता

विधानसभा में यूसीसी प्रस्ताव लाने की तैयारी को लेकर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने भी सरकार के कदम का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता केवल एक राज्य का नहीं, बल्कि पूरे देश का विषय है।

उनके अनुसार यह कानून राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समानता और सुरक्षा के दृष्टिकोण से आवश्यक है।

शर्मा ने यह भी कहा कि देश के कई राज्यों ने इस दिशा में पहल की है और मध्यप्रदेश भी अब इसे लागू करने की तैयारी पूरी कर चुका है।

रायशुमारी से मसौदे तक पहुंची प्रक्रिया

यूसीसी को व्यवहारिक रूप देने और मसौदा तैयार करने के लिए राज्य सरकार ने 27 अप्रैल को छह सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था।

समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं।

समिति में पूर्व आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, विधि विशेषज्ञ अनूप नायर, शिक्षाविद् गोपाल शर्मा और सामाजिक कार्यकर्ता बुद्धपाल सिंह सहित अन्य सदस्य शामिल हैं।

समिति को राज्य की सामाजिक परिस्थितियों और विभिन्न समुदायों की राय के आधार पर यूसीसी का प्रारूप तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है।

प्रदेशभर से जुटाए गए सुझाव

समिति ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर सामाजिक संगठनों, विशेषज्ञों और आम नागरिकों से संवाद किया। सुझाव प्राप्त करने के लिए सरकार ने एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया था। 15 मई से 15 जून तक सुझाव आमंत्रित किए गए, जबकि अब भी लोगों को संदेश भेजकर ऑनलाइन सुझाव देने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

रिपोर्ट के बाद विधानसभा में अगला कदम

समिति को गठन के 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट और प्रारूप विधेयक सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए थे। प्राप्त सुझावों और विभिन्न पक्षों से चर्चा के बाद मसौदे को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

सरकार की योजना मानसून सत्र में प्रस्ताव को विधानसभा के समक्ष रखने और पारित कराने की है। यदि प्रक्रिया तय समय पर आगे बढ़ती है तो राज्य सरकार इस वर्ष दिवाली तक यूसीसी लागू करने का लक्ष्य हासिल कर सकती है।