मैनिट संवारेगा गुना का केदारनाथ धाम,इस सावन भी Live होंगे भोलेनाथ के दर्शन!

गुना के प्राचीन केदारनाथ धाम के जीर्णोद्धार की तैयारी मैनिट की तकनीकी रिपोर्ट पर निर्भर है। सुरक्षा कारणों से तीन साल से बंद मंदिर इस सावन भी नहीं खुलेगा। श्रद्धालुओं के लिए लाइव दर्शन की व्यवस्था रहेगी।

शिवकुमार जोगी,गुना।

मध्यप्रदेश के गुना जिले का प्रसिद्ध और प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा केदारनाथ धाम एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह है इसके जीर्णोद्धार की तैयारी। भोपाल स्थित मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MANIT) की तकनीकी टीम मंदिर को सुरक्षित बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभाने जा रही है। टीम दो माह पहले मंदिर का विस्तृत निरीक्षण कर चुकी है और अब उसकी तकनीकी रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट मिलते ही जिला प्रशासन मंदिर संरक्षण और मरम्मत का काम शुरू करेगा।

हालांकि, इस साल भी 30 जुलाई से शुरू हो रहे श्रावण मास में श्रद्धालुओं को मंदिर के अंदर प्रवेश की अनुमति मिलने की संभावना बेहद कम है। ऐसे में पिछले वर्ष की तरह इस बार भी भक्तों को लाइव पूजा और बाहर से दर्शन कर ही संतोष करना पड़ेगा।

जंगल और पहाड़ियों के बीच बसा है आस्था का केंद्र

गुना जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर बमोरी विधानसभा के महोदरा गांव के घने जंगलों और कंटीली पहाड़ियों के बीच स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों में गिना जाता है। प्राकृतिक झरनों और गुफाओं के बीच स्थित होने के कारण इसे स्थानीय लोग ‘गुना का केदारनाथ धाम’ भी कहते हैं।

लेकिन पिछले तीन वर्षों से लगातार लैंडस्लाइड और चट्टानों में दरारें आने के कारण मंदिर की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। इसके चलते प्रशासन ने श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी थी, जो आज भी जारी है।

सबसे बड़ा खतरा मंदिर के ऊपर लटकी विशाल शिला

जिला कलेक्टर किशोर कुमार कान्याल ने जनप्रचार से चर्चा में बताया कि मंदिर के ऊपर स्थित एक विशाल शिला बेहद खतरनाक स्थिति में है। यदि समय रहते इसका वैज्ञानिक समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में मंदिर को नुकसान पहुंच सकता है।

उन्होंने बताया कि इसी कारण मैनिट से तकनीकी सहयोग लिया गया है। मैनिट की विशेषज्ञ टीम ने स्थल का निरीक्षण कर प्रारंभिक तौर पर माना है कि यदि आवश्यक संरचनात्मक सुधार समय पर कर दिए जाएं तो मंदिर को करीब 40 से 50 वर्षों तक किसी बड़े खतरे से बचाया जा सकता है।

रिपोर्ट मिलते ही शुरू होगा जीर्णोद्धार

कलेक्टर कान्याल ने कहा कि जैसे ही मैनिट की अंतिम तकनीकी रिपोर्ट प्राप्त होगी, उसी के आधार पर जीर्णोद्धार कार्य शुरू कराया जाएगा। प्रक्रिया में कुछ समय अवश्य लग सकता है, लेकिन प्रशासन की प्राथमिकता है कि जल्द से जल्द मंदिर को सुरक्षित बनाकर श्रद्धालुओं के लिए खोला जाए।

उन्होंने कहा कि इस धाम के प्रति उनकी व्यक्तिगत आस्था भी है और वे चाहते हैं कि जल्द ही भक्त फिर से यहां पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना कर सकें।

इस सावन भी नहीं खुलेंगे मंदिर के पट!

इस वर्ष श्रावण मास 30 जुलाई से शुरू हो रहा है, जबकि पहला सोमवार 3 अगस्त को पड़ेगा। ऐसे में हजारों शिवभक्तों की निगाहें प्रशासन के निर्णय पर टिकी हैं।

हालांकि अब तक मैनिट की अंतिम रिपोर्ट नहीं आने से मंदिर के पट खुलने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है। जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पिछले वर्ष की तरह इस बार भी मंदिर से पूजा का लाइव प्रसारण कराने की तैयारी शुरू कर दी है।

महंत बोले- हमें भी रिपोर्ट का इंतजार

जनप्रचार की टीम ने मंदिर के महंत शिवनाथ गणेश गिरि महाराज से चर्चा की। उन्होंने बताया कि अभी तक प्रशासन की ओर से कोई नई सूचना नहीं मिली है और न ही भोपाल की टीम की रिपोर्ट मंदिर प्रबंधन को प्राप्त हुई है। महंत ने कहा कि उन्हें भी श्रद्धालुओं की तरह रिपोर्ट का इंतजार है।

फिलहाल भक्त आश्रम परिसर में स्थापित सिंहासन के दर्शन कर ही लौट रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द वैज्ञानिक रिपोर्ट आएगी और वर्षों से बंद पड़े इस ऐतिहासिक शिवधाम के द्वार एक बार फिर श्रद्धालुओं के लिए खुल सकेंगे।

जनप्रचार नॉलेज
स्थान: महोदरा गांव, बमोरी विधानसभा, जिला गुना
दूरी: गुना मुख्यालय से लगभग 30 किमी
बंद कब से: करीब पिछले तीन वर्षों से
कारण: लैंडस्लाइड और चट्टानों में दरार
निरीक्षण: मैनिट भोपाल की तकनीकी टीम कर चुकी है
रिपोर्ट: जल्द आने की उम्मीद
सावन 2026: 30 जुलाई से प्रारंभ
पहला सोमवार: 3 अगस्त
इस बार व्यवस्था: लाइव दर्शन और पूजा प्रसारण
संभावित सोशल मीडिया हेडिंग