उमरिया सहित दर्जनभर जिलों में एक मादा मच्छर का आतंक,बना सकता है विकलांग

मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से इंसान की लिम्फ नोड ग्रंथियों में असर पड़ता है। जिससे व्यक्ति लिम्फेटिक फाइलेरियासिस ग्रस्त हो सकता है। इस बीमारी की जद में आकर व्यक्ति जीवन भर के लिए दिव्यांग हो सकता है। इससे बचाव के लिए संबंधित दवाओं का सेवन जरूरी है।”

भोपाल।आदिवासी बाहुल्य जिला उमरिया सहित प्रदेश के दर्जनभर जिलों में लोग एक मच्छर से आतंकित हैं। मादा क्यूलेक्स नामक यह मच्छर मनुष्य में विकलांगता पैदा कर रहा है। इससे बचाव के लिए राज्य सरकार 10 से 22 फरवरी तक प्रभावित ​जिलों में दवा वितरण कार्यक्रम चलाएगी।

अधिकारिक सूत्रों के अनुसार,मप्र के 12 जिलों में क्यूलेक्स मच्छर का खतरा मंड़रा रहा है। इसके काटने से इंसान की लिम्फ नोड ग्रंथियों में असर पड़ता है। जिससे व्यक्ति लिम्फेटिक फाइलेरियासिस ग्रस्त हो सकता है। इस मच्छर के संक्रमण के शिकार लोगों में फाईलेरिया यानि हाथीपांव की बीमारी हो सकती है। इस बीमारी की जद में आकर व्यक्ति जीवन भर के लिए दिव्यांग हो सकता है।

गंदे पानी में पनपता है मादा क्यूलेक्स मच्छर

डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर साफ पानी में पैदा होता है और यह दिन के समय काटता है। जबकि क्यूलेक्स गंदे पानी में पैदा होता है और शाम व रात में काटता है। यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को संबंधित रोग का शिकार बना सकता है।

खास बात यह कि मादा क्यूलेक्स के शिकार व्यक्ति में फाईलेरिया रोग के लक्षण उसके संक्रमित होने के पांच से सात वर्ष नजर आते हैं।

इसके बाद इसका कोई इलाज नहीं रह जाता है। पूरी दुनिया में दिव्यांगता उसका यह सबसे बड़ा दूसरा कारण है। इससे ग्रसित व्यक्ति के हाथ, पैर अंडकोष तथा महिलाओं के स्तन का आकार काफी बढ़ जाता है।

जिसको क्रमश: लिम्फोइडिमा तथा हाइड्रोशील के नाम से जाना जाता है।

इस बीमारी से बचाव के लिए फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन करने के साथ ही अपने घरों के आसपास गंदा पानी जमा न होने दें।

मच्छरों से खुद को और परिवार के सदस्यों को बचाएं।

इन​ जिलों में मादा क्यूलेक्स का आतंक
मप्र के 12 जिले छतरपुर, दतिया, कटनी, पन्ना, उमरिया, रीवा, टीकमगढ़, निवाड़ी, सागर, दमोह, सतना और छिंदवाड़ा में फाइलेरिया के खतरा बताया गया है। इन जिलों में 10 से 22 फरवरी तक अभियान चलाकर दवाएं खिलाई जाएंगी।

बचाव में ये दवाएं हैं कारगर

हर साल में एक बार दो साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमार लोगों को छोड़कर सबको फाइलेरिया रोधी डीईसी (डाय इथाइल कार्बामैजीन), एलबेंडाजोल और आईवरमैक्टिन की गोलियां खाना जरूरी है।

5 साल से छोटे बच्चों को आईवरमैक्टिन गोली नहीं दी जाती है। रीवा छतरपुर और पन्ना में आईडीए के फॉर्मुले पर तीन दवाएं दी जा रहीं हैं।

आईडीए यानि आईवरमैक्टिन, डीईसी और एलबेंडाजोल की गोलियां खिलाई जा रहीं हैं। बाकी 9 जिलों में डीईसी और एलबेंडाजोल की दवाएं दी जाएंगी।

बस ध्यान रहे कि दवाएं खाली पेट नहीं खानी है। कुशल डॉक्टर के परामर्श बिना दवा का सेवन कतई न करें।

गोली खिलाने के लिए नापी जा रही ऊंचाई

 

इस बार के फाइलेरिया उन्मूलन अभियान में आईवरमैक्टिन गोली को भी खिलाया जाएगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग व्यक्तियों की ऊंचाई के अनुसार गोली का वितरण कर रहा है।

इसके लिए मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को ऊंचाई नापने के लिए टेप और एक छडी दी गई है जिसमें पांच रंग बने हैं। ऊंचाई और रंगों के अनुसार गोलियों की संख्या तय की जाएगी।

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