MP:लघु वनोपज संघ की भर्ती में आरक्षण की अनदेखी, पारदर्शिता कठघरे में

लघु वनोपज संघ की भर्ती प्रक्रिया पर आरक्षण नियमों और चयन समितियों की विशेषज्ञता को लेकर सवाल उठे हैं।

भोपाल(9826019364)।

मध्य प्रदेश राज्य लघु वनोपज संघ की प्रस्तावित भर्ती प्रक्रिया सवालों के घेरे में है।

मामला आरक्षण और चयन समितियों से जुड़ा है।

सूत्रों के मुताबिक, संघ ने वैज्ञानिक रसायन के दो पदों के लिए आवेदन बुलाए थे।

इसके अलावा लैब सहायक, रसायन, माइक्रोबायोलॉजी और बॉटनी के एक-एक पद थे।

इन पदों के लिए पहली बार 9 दिसंबर 2025 को आवेदन बुलाए गए।

इसके बाद 29 जून 2026 को दोबारा आवेदन आमंत्रित किए गए।

इसी तरह मार्केटिंग असिस्टेंट और मार्केटिंग को-ऑर्डिनेटर के एक-एक पद के लिए भी आवेदन मांगे गए हैं।

आरक्षण प्रक्रिया पर उठे सवाल

हैरत की बात यह कि उक्त सभी पदों की भर्ती में आरक्षण प्रक्रिया को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।

जबकि संविदा पदों पर भर्ती में भी आरक्षण प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।

इसे लेकर सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने 28 सितंबर 2017 को एक अधिसूचना भी जारी की।

GAD समय-समय पर परिपत्र जारी कर विभागों को भर्ती में आरक्षण प्रक्रिया का पालन करने के निर्देश देते रहा है।

बावजूद इसके लघु वनोपज संघ में भर्ती मनमाने तरीके से की जा रही है।

चयन में गजब की केमिस्ट्री!

संघ के जिम्मेदारों ने संबंधित पदों पर चयन समि​ति बनाने में भी गजब की “केमिस्ट्री” का परिचय दिया।

रसायन विषय के वैज्ञानिक व लैब सहायक पद के लिए बनी समिति में एक आयुर्वेद चिकित्सक को शामिल किया गया है।

जिनका रसायन शास्त्र से दूर-दूर तक नाता नहीं।

कमोबेश यही स्थिति माइक्रोबायलॉजी व बॉटनी विषय से जुड़े पदों की है।

सहकारिता की आड़ का आरोप

सहकारिता की आड़ में दोहरी व्यवस्था?

लघु वनोपज संघ स्वयं को स्वायत्तशासी सहकारी संस्था बताता रहा है।

जबकि इसके संचालन का समूचा खर्च सरकार वहन कर रही है।

अफसरों और कर्मचारियों से लेकर वाहनों तथा अन्य सुविधाएं।

यहां तक कि संघ का कार्यालय भी सरकारी भवन में संचालित हो रहा है।

ऐसे में सवाल उठता है कि सुविधाओं के लिए सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल

और नियमों के सवाल पर सहकारी संस्था का हवाला क्यों दिया जाता है?

आरोप है कि इसी व्यवस्था की आड़ में संघ के कामकाज को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।

इनमें बरखेड़ा पठानी स्थित अनुसंधान केंद्र का मामला भी शामिल बताया जाता है।

यहां नकली दवाएं तैयार करने के मामले सामने आ चुके हैं।

इसके अलावा प्रदेश से महुआ ब्रिटेन भेजने और उसके ” बैरंग लौटने” का मामला भी चर्चा में रहा है।

विदेशी संस्था को संघ की ब्रांडिंग का काम देने और अधूरे काम पर भी
भुगतान को लेकर भी सवाल उठ चुके हैं।

मौजूदा भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों ने एक बार फिर संघ की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर बहस छेड़ दी है।

RTI को लेकर पहले भी विवाद

राज्य लघु वनोपज संघ के कामकाज को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं।

इनमें सूचना के अधिकार कानून का मामला प्रमुख है।

बताया जाता है कि संघ ने एक समय खुद को RTI कानून से बाहर बताया था।

इसके बाद राज्य सूचना आयोग ने एक मामले में संघ को RTI के दायरे में माना।

आयोग के फैसले के खिलाफ संघ ने हाईकोर्ट का रुख किया।

इसके बाद मामले में स्थगनादेश मिलने की बात सामने आई।

करीब पांच साल से बनी है स्थिति

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, हाईकोर्ट में दाखिल याचिका पर करीब पांच साल से यथास्थिति बनी हुई है।

इस दौरान आयोग या अन्य पक्ष की ओर से विरोध दर्ज नहीं होने की बात भी सामने आई है।

वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित अन्य जनप्रतिनिधि संघ को RTI के दायरे में लाने की मांग उठाते रहे हैं।

संघ एमडी से नहीं मिला जवाब

भर्ती प्रक्रिया पर संघ का पक्ष जानने का प्रयास किया गया।

इसके लिए संघ की एमडी कमलिका मोहंता से दो बार फोन पर संपर्क किया गया।

उन्हें व्हाट्सऐप संदेश भी भेजा गया।

एक बार उन्होंने जवाब लिखने का प्रयास किया,

लेकिन तत्काल ही इसे डिलीट भी कर दिया।

 खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

उनका पक्ष मिलने पर उसे खबर में शामिल किया जाएगा।

(main photo AI generated)

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