भोपाल।
राजधानी भोपाल के करीब दो दशक से लंबित नए मास्टर प्लान का इंतजार अब खत्म हो गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार, 26 सितंबर को भोपाल विकास योजना-2047 के प्रारूप का प्रकाशन कर दिया।
अब इस ड्राफ्ट पर आम लोगों से दावे, आपत्तियां और सुझाव लिए जाएंगे।
नई विकास योजना अगले करीब दो दशकों में भोपाल के विस्तार, यातायात, आवास, रोजगार, पर्यावरण और नागरिक सुविधाओं की दिशा तय करेगी।
प्रस्तावित योजना में 1016.90 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र और 254 गांव शामिल किए गए हैं।
इसे करीब 45 लाख की अनुमानित आबादी को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
51 किमी का बनेगा ग्रोथ कॉरिडोर
भोपाल विकास योजना-2047 की प्रमुख योजनाओं में 51 किलोमीटर लंबा ग्रोथ कॉरिडोर शामिल है।
यह नर्मदापुरम मार्ग से इंदौर मार्ग तक प्रस्तावित बायपास के आसपास विकसित किया जाएगा।
इस कॉरिडोर की चौड़ाई करीब 75 मीटर प्रस्तावित है।
इसके दोनों ओर 300-300 मीटर क्षेत्र में अधिक घनत्व और मिश्रित भूमि उपयोग का प्रस्ताव है।
यहां ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट यानी TOD जोन विकसित करने की योजना है।
254 गांव आएंगे योजना के दायरे में
नए प्लान में भोपाल के विकास क्षेत्र का दायरा काफी बढ़ाया गया है।
पहले की योजना में 146 गांव शामिल थे। अब यह संख्या बढ़कर 254 गांव हो गई है।
योजना क्षेत्र करीब 601 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 1016.90 वर्ग किलोमीटर प्रस्तावित किया गया है।
इस तरह भोपाल के आसपास के बड़े हिस्से को भी भविष्य की नियोजित विकास व्यवस्था में शामिल किया जाएगा।
हरित क्षेत्र 27 फीसदी करने का प्रस्ताव
भोपाल को झीलों और हरियाली के शहर के रूप में विकसित करने पर भी जोर दिया गया है।
ड्राफ्ट में हरित क्षेत्र को मौजूदा करीब 16 प्रतिशत से बढ़ाकर 27.01 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।
इसके तहत करीब 16,489.94 हेक्टेयर क्षेत्र हरित क्षेत्र के रूप में प्रस्तावित किया गया है।
भोजताल, वन क्षेत्र और बाघों के भ्रमण क्षेत्र के संरक्षण को भी योजना में प्रमुखता दी गई है।
ग्रीन TDR का भी प्रावधान
ड्राफ्ट में ग्रीन TDR का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
इसका उद्देश्य हरित क्षेत्र में आने वाली जमीन के मालिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए विकास अधिकारों का इस्तेमाल करना है।
मुख्यमंत्री के अनुसार इससे हरित क्षेत्र की जमीन के स्वामियों को क्षतिपूर्ति का रास्ता मिलेगा।
साथ ही विकासकर्ताओं को अनुमत क्षेत्रों में अतिरिक्त विकास अधिकार मिल सकेंगे।
रहवासी इलाकों में कारोबार के नियम होंगे स्पष्ट
मास्टर प्लान में रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर भी नियम प्रस्तावित हैं।
सड़क की चौड़ाई के आधार पर मिश्रित भूमि उपयोग की व्यवस्था की गई है।
ड्राफ्ट में 12 से 24 मीटर तक की सड़कों पर कारोबार को लेकर प्रतिबंधों का उल्लेख है।
वहीं बड़ी सड़कों पर बड़े व्यावसायिक उपयोग की गुंजाइश रखी गई है।
मेट्रो और नए परिवहन नेटवर्क पर जोर
नई योजना में परिवहन और मोबिलिटी को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
मेट्रो सहित आधुनिक परिवहन व्यवस्था के विस्तार को ध्यान में रखकर विकास का ढांचा तैयार किया गया है।
ग्रोथ कॉरिडोर और ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट के जरिए आवासीय, व्यावसायिक और रोजगार गतिविधियों को परिवहन नेटवर्क से जोड़ने का प्रस्ताव है।
2047 तक सीवरेज नेटवर्क का लक्ष्य
तक सीवरेज नेटवर्क का लक्ष्यड्राफ्ट में नागरिक सुविधाओं को भी प्राथमिकता दी गई है।
इसमें 2047 तक पूरे शहर को सीवरेज नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य प्रस्तावित किया गया है।
इसके अलावा सड़क, जल निकासी, सार्वजनिक परिवहन, आवास और अन्य बुनियादी सुविधाओं को भविष्य की आबादी के हिसाब से विकसित करने की योजना है।
पुरानी बस्तियों के पुनर्विकास का प्रस्ताव
घनी और पुरानी बस्तियों के पुनर्विकास की भी योजना में जगह है।
रिपोर्ट के अनुसार कुछ क्षेत्रों में 70 प्रतिशत रहवासियों की सहमति से पुनर्विकास का रास्ता प्रस्तावित किया गया है।
इससे पुराने और घने इलाकों में आवासीय ढांचे को नए सिरे से विकसित करने की संभावना बनेगी।
भानपुर खंती में गोल्फ कोर्स का प्रस्ताव
योजना में भानपुर खंती क्षेत्र के पुनर्विकास का भी प्रस्ताव सामने आया है।
यहां गोल्फ कोर्स और ग्रीन बफर विकसित करने की योजना बताई गई है।
नए आउटर बायपास के दोनों ओर 50-50 मीटर का ग्रीन बेल्ट रखने का भी प्रस्ताव है।
करीब 59 हजार करोड़ के निवेश की चुनौती
इतने बड़े प्लान को जमीन पर उतारना आसान नहीं होगा।
रिपोर्ट के अनुसार योजना के क्रियान्वयन के लिए करीब 59 हजार करोड़ रुपये के निवेश की चुनौती सामने है।
करीब 7 हजार हेक्टेयर भूमि अर्जन भी प्रस्तावित विकास के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा रहेगा।
यानी ड्राफ्ट जारी होना पहला चरण है।
असली चुनौती प्रस्तावित सड़कों, इंफ्रास्ट्रक्चर, सीवरेज और अन्य सुविधाओं के लिए जमीन और वित्तीय संसाधन जुटाने की होगी।
21 साल से अटका था नया मास्टर प्लान
भोपाल का पिछला स्वीकृत मास्टर प्लान 1995 में लागू हुआ था और उसकी अवधि 2005 में समाप्त हो गई थी।
इसके बाद नए प्लान के कई ड्राफ्ट तैयार हुए, लेकिन वे अंतिम रूप नहीं ले सके।
इसी बीच शहर का विस्तार होता गया।
नए इलाकों में निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ीं।
हाल के वर्षों में रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई और सीलिंग को लेकर विवाद भी सामने आया।
अब जनता दे सकेगी दावे-आपत्तियां
ड्राफ्ट के प्रकाशन के बाद अब आम नागरिक, कारोबारी, कॉलोनाइजर, संस्थाएं और अन्य संबंधित पक्ष अपने दावे, आपत्तियां और सुझाव दे सकेंगे।
इसके बाद प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। रिपोर्टों के अनुसार अंतिम मास्टर प्लान के प्रकाशन के लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति से जुड़ी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण रहेगी।
एक नजर में भोपाल मास्टर प्लान-2047
| प्रस्ताव | स्थिति |
|---|---|
| योजना क्षेत्र | 1016.90 वर्ग किमी |
| अनुमानित आबादी | 45 लाख |
| शामिल गांव | 254 |
| विकास योग्य क्षेत्र | 61,017.02 हेक्टेयर |
| हरित क्षेत्र | 27.01% |
| ग्रोथ कॉरिडोर | 51 किमी |
| प्रस्तावित सीवरेज लक्ष्य | 2047 तक पूरे शहर को जोड़ना |
| प्रमुख फोकस | पर्यावरण, यातायात, रोजगार, आवास और नागरिक सुविधाएं |