हबीबगंज औद्योगिक क्लस्टर: मेक इन इंडिया का जमीनी मॉडल

संक्षेप
राजधानी भोपाल का हबीबगंज इंडस्ट्रियल एरिया MSME आधारित औद्योगिक क्लस्टर के रूप में उभरा है।

₹350 करोड़ टर्नओवर,मजबूत निर्यात और 5,000 से अधिक परिवारों को रोजगार देकर यह आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत @2047 को गति दे रहा है।

प्रमुख बिंदु

— हबीबगंज इंडस्ट्रियल एरिया में 14 MSME इकाइयाँ सक्रिय, जो कोर इंडस्ट्रियल सेक्टर को सपोर्ट कर रही हैं।

— कुल निवेश ₹150 करोड़ से अधिक, वार्षिक टर्नओवर लगभग ₹350 करोड़।

— यूरोप, मध्य पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया को ₹180 करोड़ के आसपास निर्यात।

— 1,200 प्रत्यक्ष और 3,000 अप्रत्यक्ष रोजगार, 5,000+ परिवारों की आजीविका।

— आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और विकसित भारत @2047 के लक्ष्यों से सीधा जुड़ाव।

रवि अवस्थी,भोपाल।
राजधानी भोपाल का हबीबगंज इंडस्ट्रियल एरिया मध्य प्रदेश के MSME सेक्टर की औद्योगिक क्षमता और रोजगार सृजन का मजबूत उदाहरण बनकर उभरा है।

सीमित संसाधनों के बावजूद यहां की इकाइयाँ उत्पादन, निर्यात और मानव संसाधन विकास के जरिए आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत @2047 के आर्थिक लक्ष्यों को गति दे रही हैं।

क्लस्टर प्रोफाइल: उत्पादन और विशेषज्ञता

उद्योगपति राकेश कुमार अग्रवाल,हबीबगंज इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। वह कहते हैं—हबीबगंज इंडस्ट्रियल एरिया में 14 विशेषीकृत MSME इकाइयाँ संचालित हैं।

जो प्रेसिजन मैन्युफैक्चरिंग,फैब्रिकेशन, कंपोनेंट निर्माण और इंजीनियरिंग सेवाओं में सक्रिय हैं। ये इकाइयाँ पावर जनरेशन, रेलवे, रक्षा और हेवी इंजीनियरिंग जैसे कोर सेक्टर को सपोर्ट करती हैं।

निवेश, टर्नओवर और निर्यात स्थिति

— क्लस्टर में कुल निवेश ₹150 करोड़ से अधिक है।

— वार्षिक टर्नओवर: लगभग ₹350 करोड़

— निर्यात मूल्य: करीब ₹180 करोड़

— निर्यात बाजार: यूरोप, मध्य पूर्व, दक्षिण-पूर्व एशिया

यह आंकड़े दर्शाते हैं कि छोटे और मध्यम उद्योग भी वैश्विक सप्लाई चेन में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।

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रोजगार प्रभाव: MSME का सामाजिक योगदान

अग्रवाल के अनुसार,हबीबगंज क्लस्टर लगभग 1,200 श्रमिकों को प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराता है। वहीं लॉजिस्टिक्स, मेंटेनेंस, सप्लाई चेन और संबद्ध सेवाओं के माध्यम से 3,000 से अधिक लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है। कुल मिलाकर 5,000 से अधिक परिवारों की आजीविका इस औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ी है।

स्किल डेवलपमेंट और कार्यबल संरचना

एसोसिएशन अध्यक्ष कहते हैं-यहां का कार्यबल तकनीकी रूप से प्रशिक्षित है, जिसमें स्थानीय युवाओं और महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय है।

MSME इकाइयाँ निरंतर स्किल अपग्रेडेशन प्रोग्राम्स चला रही हैं, जिससे श्रमिक नई तकनीक और ऑटोमेशन के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें।

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आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया से जुड़ाव

उन्होंने कहा कि हबीबगंज की MSME इकाइयाँ स्वदेशी कंपोनेंट्स और असेंबली का निर्माण कर आयात निर्भरता कम कर रही हैं। इन-हाउस इनोवेशन, लोकल सोर्सिंग और गुणवत्ता मानकों के पालन से यह क्लस्टर मेक इन इंडिया के औद्योगिक लक्ष्यों के अनुरूप कार्य कर रहा है।

भविष्य की संभावनाएँ: निवेश और विस्तार

 सहायक नीतियों, सुरक्षित टेन्योर और संस्थागत फाइनेंस की उपलब्धता के चलते आने वाले वर्षों में यहां लगभग ₹200 करोड़ के अतिरिक्त निवेश की संभावना है।

उद्योग मानकों के अनुसार हर ₹1 करोड़ निवेश से औसतन 12 नए रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।

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इन्फ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स बढ़त
रानी कमलापति रेलवे स्टेशन और प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों से बेहतर कनेक्टिविटी के कारण लॉजिस्टिक्स लागत कम हुई है। इससे MSME इकाइयों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में सुधार हुआ है।

यह क्लस्टर दिखाता है कि जमीनी स्तर के MSME किस तरह रोजगार, निर्यात और स्वावलंबन के जरिए राष्ट्रीय आर्थिक लक्ष्यों में योगदान दे सकते हैं।

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