मध्यप्रदेश विधानसभा में पूछे जाने वाले सवालों के साथ कथित छेड़छाड़ और भ्रामक जवाबों को लेकर कांग्रेस के तीन विधायकों ने प्रमुख सचिव विधानसभा को पत्र लिखकर कड़ी नाराजगी जताई है।
आरोप है कि प्रश्नों के बिंदु हटाए जा रहे हैं, अधूरी जानकारी दी जा रही है और विभागीय जवाबों में विरोधाभास है।
तीनों विधायकों की कुल चार अलग-अलग शिकायतों ने सचिवालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
1. नारायण सिंह पट्टा की पहली शिकायत: पांच में से दो बिंदु हटाए गए
विधायक नारायण सिंह पट्टा (मंडला) ने 24 फरवरी को प्रश्न क्रमांक 2096 के तहत पांच बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी।
उनका आरोप है कि विधानसभा सचिवालय ने प्रश्न के ‘क’ और ‘ख’ बिंदु हटाकर केवल शेष तीन बिंदुओं को शामिल किया और उन्हीं पर विभाग से जवाब मंगाया।
पट्टा का कहना है कि हटाए गए दोनों बिंदु उच्च शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली से जुड़े गंभीर पहलुओं को उजागर करते थे। उन्होंने पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
मांगी गई थी 5 बिंदुओं पर जानकारी
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जवाब मिला नीचे के सिर्फ तीन बिंदुओं का
2. नारायण सिंह पट्टा की दूसरी शिकायत: जवाब में विरोधाभास और अधूरी जानकारी
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प्रश्नांश ‘क’ में विश्वविद्यालय के शासकीय नियंत्रण को लेकर विभाग ने स्वयं को प्रशासनिक नियंत्रणकर्ता बताया।
जबकि पूर्व में जारी पत्र (14 जून 2021) में विश्वविद्यालय को विभाग के अधीन न होने की बात कही गई थी।
‘ख’ में कुलगुरु नियुक्ति से जुड़े विज्ञापन, चयन समिति, नियुक्ति पत्र जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां नहीं दी गईं और अधिसूचना की प्रति देकर औपचारिकता पूरी की गई।
‘ग’ में कार्यकारी कुलाधिपति की नियुक्ति बोर्ड निर्णयानुसार बताई गई, लेकिन शासकीय आदेश संलग्न नहीं किया गया।
साथ ही 28 फरवरी 2025 के शासन पत्र में पूर्व नियुक्ति को अमान्य किए जाने के बावजूद नियुक्ति दर्शाए जाने पर भी विधायक ने सवाल उठाए हैं।
पट्टा ने इसे प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितता बताते हुए सघन जांच की मांग की है।
3. मधु भगत की शिकायत: नोटशीट और जांच निरस्तीकरण पर भ्रम
मधु भगत (परसवाड़ा) ने प्रश्न क्रमांक 2192 के जवाब को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है।
उनका कहना है कि उच्च शिक्षा विभाग ने 1 जनवरी 2015 की विभागीय नोटशीट के प्रचलन में न होने की बात कही। जबकि संबंधित नोटशीट उस दिनांक को प्रचलन में थी और उसके दस्तावेज उपलब्ध हैं।
साथ ही, प्रश्नांश ‘ख’ में जबलपुर संभाग के क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक द्वारा जांच समिति को निरस्त किए जाने की जानकारी दी गई।
लेकिन निरस्तीकरण आदेश और संबंधित अधिकारियों को सूचना देने के दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। भगत ने इसे स्पष्ट विरोधाभास बताते हुए दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
4. पंकज उपाध्याय की शिकायत: आजीविका मिशन के आंकड़ों में अंतर
पंकज उपाध्याय (जौरा) ने ग्रामीण आजीविका मिशन के सीईओ पर सदन में गलत जानकारी देने का आरोप लगाया है।
उनके अनुसार, विभाग ने जवाब में कहा कि लाकोस पोर्टल पर किसी महिला सदस्य या स्व-सहायता समूह की जानकारी डिलीट नहीं की गई।
जबकि 17, 22 और 26 फरवरी को पोर्टल पर अलग-अलग आंकड़े दिखाई दिए। उपाध्याय ने पोर्टल के स्क्रीनशॉट संलग्न कर प्रमुख सचिव से जांच और कार्रवाई की मांग की है।
सचिवालय की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
तीनों विधायकों की चार शिकायतों का केंद्र बिंदु एक ही है-सवालों के बिंदु हटाना,अधूरी या विरोधाभासी जानकारी देना और सदन को गुमराह करना।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल विभागीय जवाबदेही बल्कि विधानसभा सचिवालय की पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
अब निगाहें प्रमुख सचिव के स्तर पर होने वाली जांच और संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं।
‘कैंची’ पर विवाद: पहले भी उठा चुके हैं सवाल
विधायक पट्टा इससे पहले भी प्रश्न शाखा की कार्यप्रणाली पर आपत्ति जता चुके हैं। पिछले सत्र में उन्होंने मध्यप्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों से संबंधित प्रश्न लगाया था, लेकिन प्रश्न शाखा ने उसे पूरे प्रदेश के बजाय केवल मंडला जिले तक सीमित कर दिया।
चूंकि मंडला में कोई निजी विश्वविद्यालय संचालित नहीं है, इसलिए उन्हें अपेक्षित जानकारी नहीं मिल सकी। पट्टा ने तब भी इसे प्रश्न के मूल आशय से छेड़छाड़ बताया था।
सूत्रों का कहना है कि प्रश्नों को संक्षिप्त करने और उनका दायरा सीमित करने की प्रक्रिया को लेकर विधायकों के बीच असंतोष है।
हालांकि, आधिकारिक तौर पर सचिवालय का पक्ष है कि प्रश्नों को नियमों के अनुरूप और स्पष्टता बनाए रखने के लिए संपादित किया जाता है। वहीं, कुछ विधायकों के प्रश्नों को बिना कटौती के स्वीकार किए जाने की भी चर्चा है।
इनमें सिरोंज से उमाकांत शर्मा, दतिया से राजेंद्र भारती और रीवा से अभय मिश्रा जैसे नाम शामिल बताए जाते हैं। इन विधायकों के विस्तृत प्रश्न और उत्तर प्रायः यथावत रखे जाने की बात कही जाती है।