संसद में महिलाओं को 33% आरक्षण: मध्य प्रदेश विधानसभा में संकल्प ध्वनिमत से पारित, सवाल बरकरार

“संसद में महिलाओं को 33% आरक्षण दिए जाने संबंधी शासकीय संकल्प सोमवार को मप्र विधानसभा में ध्वनिमत से पारित हुआ।सत्ता पक्ष इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में पहल बता रहा है। जबकि विपक्ष इसे महज औपचारिकता मान रहा है। असली सवाल अब भी वही है-महिला आरक्षण जमीन पर कब लागू होगा? “

रवि अवस्थी,भोपाल।(9826019364)

संसद में महिलाओं को 33% आरक्षण देने के मुद्दे पर राजनीति तेज है। इसी कड़ी में मध्यप्रदेश विधानसभा ने विशेष सत्र बुलाकर महिला आरक्षण लागू करने के समर्थन में शासकीय संकल्प पारित कर दिया। यह संकल्प अब केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

हालांकि, आरक्षण का वास्तविक क्रियान्वयन अभी भी परिसीमन और संविधान संशोधन जैसी प्रक्रियाओं में उलझा हुआ है।

दिलचस्प यह रहा कि इस मामले में मध्यप्रदेश ने अन्य भाजपा शासित राज्यों से पहले पहल करते हुए राजनीतिक बढ़त लेने की कोशिश की।

सत्र की शुरुआत से ही टकराव

विशेष सत्र की शुरुआत से ही सत्ता और विपक्ष आमने-सामने दिखे। जैसे ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव संकल्प पेश करने उठे, नेता प्रतिपक्ष ने प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए विरोध दर्ज कराया।

पूरे दिन चले सत्र में महिला आरक्षण के समर्थन और इसके लागू होने में हो रही देरी पर तीखी बहस हुई। कांग्रेस ने स्पष्ट कहा कि अगर आरक्षण देना है तो तुरंत लागू किया जाए, परिसीमन का इंतजार क्यों?

विपक्ष का वॉकआउट, नियमों पर बहस

सत्र के दौरान शासकीय और अशासकीय संकल्प को लेकर नियमों की व्याख्या पर भी जोरदार बहस हुई। अंततः असहमति जताते हुए कांग्रेस विधायकों ने सदन से बहिर्गमन किया। इससे पहले सड़क पर भी विरोध के स्वर देखने को मिले।

कृष्णा गौर का ओजस्वी वक्तव्य

राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने बिना लिखित भाषण पढ़े ही महिला आरक्षण के समर्थन में धाराप्रवाह वक्तव्य दिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में बिल पास न होने से महिलाओं की उम्मीदों को ठेस पहुंची है। इसके लिए विपक्ष जिम्मेदार है।

उन्होंने इसे महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया।

सीएम का कांग्रेस पर तीखा हमला

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण में देरी के लिए वही जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि बिना परिसीमन और संविधान संशोधन के यह संभव नहीं है, जबकि कांग्रेस खुद इन प्रक्रियाओं का विरोध करती रही है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वह राजनीति से ऊपर उठकर संकल्प का समर्थन करे।

आंकड़ों के जरिए घेरा विपक्ष को

सीएम ने बताया कि वर्तमान में लोकसभा में केवल 13.6% महिला सांसद हैं (543 में से 74)। यदि आरक्षण लागू होता, तो यह संख्या बढ़कर 273 तक पहुंच सकती थी। उन्होंने इसे “महिलाओं के हक से वंचित करने” का मामला बताया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आपातकाल के समय संविधान संशोधन लाने का पाप किसने किया था?

यह कांग्रेस का पाप है कि हमने अपनी बहनों के साथ अन्याय करते हुए इस भावना के आधार पर उन्हें रोकने का प्रयास किया।

अगर संविधान संशोधन में परिसीमन के बलबूते पर 1972 में प्रति लोकसभा 10 लाख की आबादी थी, तो आज विधानसभाओं और लोकसभा के बीच आधी आबादी का गला घोंटकर उनका रास्ता रोकने का काम कांग्रेस ने किया। आज ज्यादा अच्छा होता कि आप माफी मांगते कि 50 साल पहले हमने बहनों का 33% आरक्षण रोका।

मैं प्रधानमंत्री मोदी जी को धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने विनम्रता के साथ कहा कि आप श्रेय ले लो, विज्ञापन छपवा लो, हमें कोई श्रेय नहीं चाहिए, लेकिन यह देश की आधी आबादी का प्रश्न है। आप इस बात पर सहमत हो जाओ कि हमारे पास बहुमत है या नहीं। आपके पास 1984 में भी बहुमत था।

नकारात्मक प्रवृत्ति की भी कोई सीमा होती है। कांग्रेसी मित्र कमाल करते हैं। जब सत्ता में होते हैं तब भी परिसीमन का विरोध और जब विपक्ष में होते हैं तब भी विरोध। यह आधी आबादी को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं? उनका हक कौन नहीं दिलाना चाहता, यह आपकी ही गलती है।

विपक्ष का पलटवार: ‘कथनी-करनी में फर्क’

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार से पूछा कि आरक्षण लागू कब होगा? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सिर्फ संकल्प पास कर औपचारिकता निभा रही है। साथ ही उन्होंने राज्य में महिलाओं की वास्तविक स्थिति,ओबीसी आरक्षण और योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाए।

सिंघार ने कहा-महिला आरक्षण के लिए नए परिसीमन का इंतजार क्यों? इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए,लेकिन बीजेपी अपने सियासी स्वार्थ के लिए इसकी आड़ ले रही है।

दन में हंगामा और तीखी टिप्पणियां

बहस के दौरान कई बार माहौल गरमा गया। कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया के ऐतिहासिक टिप्पणी पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया और बयान को कार्यवाही से हटाना पड़ा। वहीं, भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बीच तीखे तंज और आरोप-प्रत्यारोप भी चलते रहे।

सदन के बाहर भी विरोध, ट्रैक्टर पर पहुंचे विधायक
विधानसभा के बाहर भी कांग्रेस का विरोध जारी रहा। विधायक अभिजीत शाह ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर पहुंचने की कोशिश में पुलिस से भिड़ गए। जिससे धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। बाद में वे गेहूं की बालियां लेकर सदन पहुंचे, जो किसानों और जमीनी मुद्दों को उठाने का प्रतीक बताया गया।

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