केन-बेतवा परियोजना: आदिवासी गांव में मुस्लिम परिवार को मुआवजा, उमंग सिंघार का आरोप

भोपाल में उमंग सिंघार ने कहा कि परियोजना बना रही नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी ने भाजपा को चंदा दिया। यह चंदा इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए 60 करोड़ रुपए का बताया गया है। सिंघार का कहना है कि इसीलिए सरकार कंपनी के हित में काम कर रही है। प्रभावित आदिवासियों और किसानों की शिकायतें नजरअंदाज हो रही हैं। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच और सोशल ऑडिट की मांग की।

केन-बेतवा परियोजना के बारे में एक बड़ा आरोप लगाया गया है। भोपाल में उमंग सिंघार ने कहा है कि परियोजना बना रही नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी ने भाजपा को चंदा दिया। यह चंदा इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए 60 करोड़ रुपए का बताया गया है। सिंघार का कहना है कि इसीलिए सरकार कंपनी के हित में काम कर रही है। प्रभावित आदिवासियों और किसानों की शिकायतें नजरअंदाज हो रही हैं। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच और सोशल ऑडिट की मांग की। सिंघार ने बताया कि उन्होंने पन्ना और छतरपुर के प्रभावित गांवों का दौरा किया।

कूपी गांव में वे करीब पांच से सात घंटे विस्थापित परिवारों के बीच रहे। उनका आरोप है कि आंदोलन कर रहे आदिवासियों और किसानों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। सिंघार का कहना है कि 80 साल तक की बुजुर्ग महिलाओं के साथ भी मारपीट हुई। कई महिलाओं ने उन्हें पुलिस कार्रवाई की आपबीती सुनाई। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार कंपनी के लिए आदिवासियों पर इतनी सख्ती क्यों कर रही है।

केन-बेतवा परियोजना के बारे में सिंघार का आरोप

भोपाल में सिंघार ने कहा कि परियोजना बना रही नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी ने भाजपा को चंदा दिया। यह चंदा इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए 60 करोड़ रुपए का बताया गया है। सिंघार का कहना है कि इसीलिए सरकार कंपनी के हित में काम कर रही है। प्रभावित आदिवासियों और किसानों की शिकायतें नजरअंदाज हो रही हैं। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच और सोशल ऑडिट की मांग की।

सिंघार ने बताया कि उन्होंने पन्ना और छतरपुर के प्रभावित गांवों का दौरा किया। कूपी गांव में वे करीब पांच से सात घंटे विस्थापित परिवारों के बीच रहे। उनका आरोप है कि आंदोलन कर रहे आदिवासियों और किसानों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। सिंघार का कहना है कि 80 साल तक की बुजुर्ग महिलाओं के साथ भी मारपीट हुई। कई महिलाओं ने उन्हें पुलिस कार्रवाई की आपबीती सुनाई।

सिंघार का आरोप: सरकार कंपनी के हित में काम कर रही है

सिंघार ने सवाल उठाया कि सरकार कंपनी के लिए आदिवासियों पर इतनी सख्ती क्यों कर रही है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों की शिकायतें नजरअंदाज हो रही हैं। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच और सोशल ऑडिट की मांग की।

सिंघार ने खरिहानी गांव का उदाहरण दिया। यहां 11 करोड़ रुपए का मुआवजा स्वीकृत हुआ था। इसमें से आठ करोड़ रुपए ऐसे लोगों को दिए गए, जिन्होंने 1980 से 1990 के बीच गांव छोड़ दिया था। सिंघार का कहना है कि इस आदिवासी गांव में कोई मुस्लिम परिवार रहता ही नहीं। उनके मुताबिक फिर यह राशि मुस्लिम परिवार के खाते में कैसे पहुंची, यह जांच का विषय है।

सिंघार की मांग: पूरे मामले की स्वतंत्र जांच और सोशल ऑडिट

सिंघार ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच और सोशल ऑडिट की मांग की। उन्होंने कहा कि आदिवासियों की शिकायतें नजरअंदाज हो रही हैं। उन्होंने पूरे मामले की जांच के लिए मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से कहा है।

सिंघार ने बताया कि उन्होंने सोशल ऑडिट कमेटी बनाने का सुझाव दिया था। इसमें प्रभावित परिवार, प्रतिनिधि और वकील शामिल होते। लेकिन प्रशासन इसके लिए तैयार नहीं हुआ।

  • सिंघार ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच और सोशल ऑडिट की मांग की।
  • सिंघार ने खरिहानी गांव का उदाहरण दिया, जहां 11 करोड़ रुपए का मुआवजा स्वीकृत हुआ था।
  • सिंघार ने पूरे मामले की जांच के लिए मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से कहा है।