इस्लामाबाद: पाकिस्तान में प्रांतों के पुनर्गठन को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। देश के चार मौजूदा प्रांतों को छोटे प्रांतों या प्रशासनिक इकाइयों में बांटने का प्रस्ताव चर्चा में है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर भी इस विचार के समर्थक हैं। यदि यह योजना आगे बढ़ती है, तो इससे देश के प्रशासनिक ढांचे के साथ-साथ राजनीतिक शक्ति संतुलन पर भी असर पड़ सकता है।
फिलहाल पाकिस्तान में पंजाब, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान चार प्रांत हैं। रिपोर्टों में इनकी संख्या बढ़ाकर 12 से 15 तक करने या देश को करीब 160 छोटी प्रशासनिक इकाइयों में बांटने जैसे विकल्पों का जिक्र किया गया है। हालांकि, इन प्रस्तावों पर अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है।
क्यों उठ रही नए प्रांत बनाने की मांग?
पाकिस्तान में नए प्रांत बनाने की मांग के पीछे प्रमुख तर्क प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है। देश के कुछ प्रांत आबादी और क्षेत्रफल के लिहाज से काफी बड़े हैं। ऐसे में दूरदराज के इलाकों तक सरकारी सेवाएं पहुंचाने, विकास कार्यों की निगरानी करने और स्थानीय समस्याओं का समाधान करने में मुश्किलें आती हैं।
पंजाब पाकिस्तान का सबसे अधिक आबादी वाला प्रांत है। 2023 की जनगणना के अनुसार, यहां करीब 12.77 करोड़ लोग रहते हैं। इसके मुकाबले क्षेत्रफल में सबसे बड़ा बलूचिस्तान लगभग 1.49 करोड़ की आबादी वाला प्रांत है। समर्थकों का मानना है कि छोटे प्रशासनिक क्षेत्रों से शासन व्यवस्था को स्थानीय जरूरतों के मुताबिक संचालित करना आसान हो सकता है।
पंजाब और सिंध पर क्यों टिकी हैं निगाहें?
पाकिस्तान के पंजाब और सिंध प्रांत इस बहस के केंद्र में हैं। पंजाब में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) का मजबूत राजनीतिक आधार रहा है, जबकि सिंध पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) का प्रमुख गढ़ माना जाता है।
इन दोनों प्रांतों को छोटे हिस्सों में बांटने से मौजूदा राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। छोटे प्रांत बनने पर नए राजनीतिक नेतृत्व और सत्ता केंद्रों के उभरने की संभावना होगी। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इससे केंद्र सरकार और सैन्य प्रतिष्ठान का प्रभाव बढ़ सकता है। हालांकि, यह संभावित राजनीतिक असर से जुड़ा विश्लेषण है, कोई स्थापित परिणाम नहीं।
असीम मुनीर की भूमिका पर चर्चा
पाकिस्तान में नए प्रांतों का मुद्दा पहले भी उठता रहा है। योजना मंत्री अहसान इकबाल सहित कई नेताओं ने छोटे प्रांत बनाने या जिला स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत पर बात की है।
हालिया रिपोर्टों में कहा गया है कि असीम मुनीर भी मौजूदा प्रांतीय ढांचे में बदलाव चाहते हैं। उनका तर्क बताया गया है कि बड़े प्रांतों का प्रशासन प्रभावी ढंग से चलाना मुश्किल है। दूसरी ओर, इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के हित और प्रांतीय स्वायत्तता भी अहम हैं। इसलिए इसे केवल प्रशासनिक बदलाव के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा।
सिंध में विरोध, संवैधानिक अड़चन भी बड़ी
नए प्रांत बनाने की राह आसान नहीं है। पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 239 के तहत प्रांतीय सीमाओं में बदलाव के लिए संवैधानिक संशोधन आवश्यक है। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत के साथ संबंधित प्रांतीय विधानसभा की भी निर्धारित मंजूरी जरूरी होती है।
सिंध विधानसभा पहले ही प्रांत को बांटने के प्रस्तावों के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर चुकी है। ऐसे में सिंध के विभाजन को लेकर राजनीतिक सहमति बनाना बड़ी चुनौती होगा। इसके अलावा संसाधनों के बंटवारे, वित्तीय अधिकारों और प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर भी चर्चा करनी पड़ेगी।
क्या पाकिस्तान का नक्शा जल्द बदल जाएगा?
फिलहाल पाकिस्तान में नए प्रांतों को लेकर अलग-अलग विकल्पों पर चर्चा जारी है। एक विकल्प मौजूदा प्रांतों की संवैधानिक सीमाएं बदलना है, जबकि दूसरा छोटे प्रशासनिक क्षेत्रों और स्थानीय सरकारों को अधिक अधिकार देना है।
इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि पाकिस्तान में जल्द ही 12 से 15 नए प्रांत बन जाएंगे। किसी भी बड़े बदलाव के लिए राजनीतिक सहमति, संवैधानिक प्रक्रिया और संबंधित प्रांतीय विधानसभा की मंजूरी जरूरी होगी। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पाकिस्तान की सरकार इस बहस को प्रस्तावों तक सीमित रखती है या इसे औपचारिक संवैधानिक प्रक्रिया की ओर ले जाती है।