हूतियों की पाकिस्तान को धमकी, अब तुम्हारा ही नंबर है, गले का फांस बना मक्का समझौता

सऊदी अरब पर हूतियों के लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच पाकिस्तान और तुर्की को सैन्य हस्तक्षेप के खिलाफ चेतावनी दी गई है। वहीं मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत तीनों देशों की सामूहिक सुरक्षा प्रतिबद्धता चर्चा के केंद्र में आ गई है। फिलहाल पाकिस्तान ने किसी नए सैन्य अभियान की घोषणा नहीं की है।

रियाद: सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब पाकिस्तान और तुर्की तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। सऊदी अरब पर लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच हूतियों ने पाकिस्तान और तुर्की को भी चेतावनी दी है कि अगर दोनों देश सैन्य रूप से सऊदी अरब के साथ यमन के संघर्ष में शामिल होते हैं, तो उन्हें जवाब दिया जाएगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच नया मक्का संयुक्त रक्षा समझौता क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से चर्चा में है।

हूतियों ने 19 सितंबर को सऊदी अरब की राजधानी रियाद में संवेदनशील ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाने का दावा किया। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने रियाद की ओर दागी गई एक मिसाइल को रोकने और कई अन्य हमलों को नाकाम करने की जानकारी दी। हूतियों ने सऊदी अरब के पश्चिमी तट पर स्थित यानबू में एक अरामको सुविधा को निशाना बनाने का भी दावा किया। 

हूतियों की पाकिस्तान और तुर्की को चेतावनी

हूतियों की ओर से कहा गया है कि यदि पाकिस्तान या तुर्की सऊदी अरब की ओर से यमन में सीधे सैन्य हस्तक्षेप करते हैं, तो उन्हें जवाब दिया जाएगा। पाकिस्तानी मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, हूतियों ने संभावित हस्तक्षेप की स्थिति में दोनों देशों के खिलाफ कड़े जवाब की चेतावनी दी है। 

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हालांकि, पाकिस्तान की ओर से अभी तक हूतियों के खिलाफ किसी नए सैन्य अभियान की घोषणा नहीं की गई है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने पहले कहा था कि मक्का रक्षा समझौते के तहत फिलहाल किसी सैन्य प्रतिक्रिया पर चर्चा नहीं हो रही है और जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान कार्रवाई करेगा। 

क्या है मक्का संयुक्त रक्षा समझौता?

सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने अगस्त 2026 में मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते का मूल उद्देश्य तीनों देशों के बीच सामूहिक सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करना है।

समझौते के अनुसार, तीनों में से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति को तीनों पर हमला माना जाएगा। हालांकि, इस प्रावधान को व्यवहार में किस तरह लागू किया जाएगा, इसके सभी परिचालन पहलू सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किए गए हैं। 

पाकिस्तान ने सऊदी की रक्षा को लेकर क्या कहा?

पाकिस्तान की सेना की ओर से हाल में सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट बयान दिया गया है। पाकिस्तानी सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कहा कि पाकिस्तान सऊदी अरब की रक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर हर स्तर तक जाने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तानी सैनिक पहले से ही सऊदी अरब में मौजूद हैं और वहां पवित्र स्थलों की सुरक्षा में भूमिका निभा रहे हैं। 

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हालांकि, इस बयान के बावजूद यह पुष्टि नहीं हुई है कि सऊदी अरब ने हूतियों के खिलाफ अतिरिक्त पाकिस्तानी सैनिकों या सीधे सैन्य हस्तक्षेप की मांग की है।

तुर्की भी सऊदी की मदद को तैयार

तुर्की ने भी सऊदी अरब की संभावित सैन्य जरूरतों को पूरा करने की इच्छा जताई है। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा कि हूतियों के लगातार हमलों के कारण सऊदी अरब को कुछ सैन्य या तकनीकी सहायता की जरूरत हो सकती है और तुर्की रक्षा समझौते के तहत मदद के लिए तैयार है। 

मक्का को लेकर भी बढ़ा तनाव

इस पूरे विवाद में मक्का का नाम आने से तनाव और बढ़ गया है। सऊदी अरब ने दावा किया था कि हूतियों की ओर से मक्का की दिशा में भेजे गए ड्रोन को रोक दिया गया। हूतियों ने इस आरोप से इनकार करते हुए कहा कि उनका लक्ष्य मक्का या किसी अन्य इस्लामी पवित्र स्थल को निशाना बनाना नहीं है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सऊदी अरब पर हूतियों के हमले आगे कितने बढ़ते हैं और क्या मक्का रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तान और तुर्की की भूमिका व्यावहारिक रूप से बढ़ती है। अभी तक पाकिस्तान ने किसी नए सैन्य अभियान की घोषणा नहीं की है, लेकिन लगातार हमलों और हूतियों की चेतावनियों ने इस नए रक्षा समझौते को गंभीर क्षेत्रीय सुरक्षा परीक्षा के सामने ला दिया है।