आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन का असर अब बैंकिंग सेक्टर में भी तेजी से दिखाई देने लगा है। ब्रिटेन के बड़े बैंक बार्कलेज ने साल 2026 के अंत तक करीब 5,000 नौकरियों में कटौती करने की योजना बनाई है। यह संख्या बैंक के कुल कर्मचारियों का लगभग 5 प्रतिशत है। बैंक का उद्देश्य टेक्नोलॉजी की मदद से परिचालन लागत घटाना और मुनाफे में सुधार करना है। खास बात यह है कि यह फैसला ऐसे समय आया है, जब बैंक ने तीसरी तिमाही में 2.3 अरब पाउंड का मुनाफा दर्ज किया है।
Barclays Layoffs: किन कर्मचारियों की जा सकती है नौकरी?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बार्कलेज में प्रस्तावित 5,000 पदों की कटौती में से लगभग 1,000 पद पहले ही खत्म किए जा चुके हैं। बाकी कटौती 2026 के अंत तक पूरी करने की योजना है।
बैंक के अधिकारियों के मुताबिक, कुल कटौती में करीब 60 प्रतिशत नौकरियां सपोर्ट फंक्शन से जुड़ी होंगी। इनमें डेवलपर सहित ऐसे पद शामिल हैं, जिनके काम को टेक्नोलॉजी और AI की मदद से अधिक कुशल बनाया जा सकता है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि बैंक के सभी कर्मचारियों की नौकरी सीधे AI की वजह से जा रही है। बार्कलेज अपनी लागत कम करने, संगठनात्मक ढांचे को सरल बनाने और पुराने सिस्टम को आधुनिक बनाने की व्यापक रणनीति पर काम कर रहा है।
AI और ऑटोमेशन से कैसे बदलेगा बैंकिंग सेक्टर?
AI के बढ़ते इस्तेमाल से बैंकों के काम करने के तरीके में बदलाव आ रहा है। डेटा का विश्लेषण, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, ग्राहक सेवाओं के कुछ हिस्से और बैक-ऑफिस प्रक्रियाओं को ऑटोमेशन की मदद से अधिक तेजी से पूरा किया जा सकता है।
बार्कलेज भी पिछले कई वर्षों से अपनी टेक्नोलॉजी और डिजिटल व्यवस्था को आधुनिक बनाने में निवेश कर रहा है। बैंक के प्रबंधन का मानना है कि बेहतर तकनीकी ढांचे और सरल प्रक्रियाओं से कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ सकती है और परिचालन खर्च कम हो सकता है।
हालांकि, AI का प्रभाव हर नौकरी पर एक जैसा नहीं होगा। कुछ भूमिकाओं में कर्मचारियों को नई तकनीक के साथ काम करने का अवसर मिलेगा, जबकि कुछ कार्यों की जरूरत घट सकती है।
5,000 नौकरियों में कटौती, फिर भी बैंक ने कमाया 2.3 अरब पाउंड का मुनाफा
बार्कलेज ने तीसरी तिमाही में लगभग 2.3 अरब पाउंड का मुनाफा दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 12 प्रतिशत अधिक था।
इसके बावजूद, बैंक का प्रदर्शन विश्लेषकों की उम्मीदों पर पूरी तरह खरा नहीं उतरा। खास तौर पर फिक्स्ड-इनकम ट्रेडिंग कारोबार में कमजोरी देखने को मिली, जिससे इन्वेस्टमेंट बैंक के प्रदर्शन पर असर पड़ा।
इस दौरान बैंक ने खर्चों में कटौती और कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने के लिए भी कदम उठाए। कर्मचारियों की संख्या घटाने की योजना इसी व्यापक लागत प्रबंधन रणनीति का हिस्सा है।
इससे स्पष्ट होता है कि किसी कंपनी का मुनाफा बढ़ने के बावजूद वह भविष्य में लागत घटाने और तकनीकी बदलावों के लिए कर्मचारियों की संख्या कम करने का फैसला ले सकती है।
बार्कलेज के CEO ने क्या कहा?
बार्कलेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सीएस वेंकटकृष्णन ने बैंक के नतीजों और कारोबार के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने विशेष रूप से फिक्स्ड-इनकम ट्रेडिंग कारोबार के प्रदर्शन को लेकर निराशा जताई।
टेक्नोलॉजी और AI की भूमिका पर उनका कहना रहा कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बैंकिंग क्षेत्र की कार्यक्षमता बढ़ाने में और महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हालांकि, इसका लाभ उठाने के लिए आधुनिक तकनीकी ढांचा तैयार करना भी जरूरी है।
बैंक का जोर केवल कर्मचारियों की संख्या कम करने पर नहीं, बल्कि अपने प्लेटफॉर्म को आधुनिक बनाने, सिस्टम को बेहतर ढंग से जोड़ने और कामकाज की प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर भी है।
क्या दूसरे बैंकों में भी बढ़ेगी छंटनी?
बार्कलेज का फैसला वित्तीय क्षेत्र में AI और ऑटोमेशन के बढ़ते प्रभाव की ओर संकेत करता है। दुनिया भर की कंपनियां खर्च कम करने, कामकाज की गति बढ़ाने और प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए नई तकनीकों को अपना रही हैं।
बैंकिंग सेक्टर में इसका असर विशेष रूप से उन कार्यों पर पड़ सकता है, जिन्हें डिजिटल माध्यमों से पूरा किया जा सकता है। हालांकि, इससे सभी बैंकों में एक जैसी छंटनी होगी, ऐसा निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता। हर संस्थान की व्यावसायिक रणनीति, तकनीकी तैयारी और कर्मचारियों की जरूरत अलग होती है।
भारत में भी बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ रहा है। ऐसे में कर्मचारियों के लिए AI टूल्स, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल बैंकिंग जैसी क्षमताएं सीखना उपयोगी हो सकता है।
कर्मचारियों के लिए क्या है इसका मतलब?
बार्कलेज की योजना बताती है कि तकनीकी बदलावों के बीच कर्मचारियों के कौशल का महत्व बढ़ रहा है। आने वाले समय में केवल पारंपरिक कार्यों का अनुभव पर्याप्त नहीं हो सकता; नई तकनीकों के साथ काम करने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी।
हालांकि, AI को केवल नौकरियां खत्म करने वाली तकनीक के रूप में देखना सही नहीं होगा। इससे कुछ कार्यों की जरूरत कम हो सकती है, जबकि नई तकनीकी भूमिकाएं और विशेषज्ञता की मांग भी पैदा हो सकती है।
फिलहाल, बार्कलेज में 5,000 पदों की कटौती की योजना इस बात का उदाहरण है कि कंपनियां लागत प्रबंधन और तकनीकी बदलावों को किस तरह अपनी कारोबारी रणनीति का हिस्सा बना रही हैं।