इस्राइल के अल-अक्सा मस्जिद में तोड़फोड़ पर अरब और मुस्लिम देशों ने निंदा की है। इस्राइली बसने वालों और चरमपंथी समूहों ने गुरुवार को अल-अक्सा मस्जिद परिसर में तोड़फोड़ की। इस्राइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन-ग्विर ने भी भारी पुलिस सुरक्षा के तहत साइट का दौरा किया। फिलिस्तीनी अधिकारियों ने कहा कि इस्राइली बलों ने मस्जिद के द्वार पर सख्त प्रतिबंध लगाए, बड़ी संख्या में फिलिस्तीनी उपासकों और छात्रों को प्रवेश से वंचित किया और कई लोगों पर हमला किया।
इस्राइल ने 1967 में पूर्वी यरुशलम पर कब्जा कर लिया और 1980 में इसे औपचारिक रूप से अपने अधिकार में ले लिया। 2024 में, अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने फैसला सुनाया कि इस्राइल का फिलिस्तीनी क्षेत्र, पूर्वी यरुशलम सहित, पर कब्जा अवैध है।
अल-अक्सा मस्जिद में तोड़फोड़ की घटना
गुरुवार को अल-अक्सा मस्जिद परिसर में इस्राइली बसने वालों और चरमपंथी समूहों द्वारा तोड़फोड़ की गई। इस घटना में कई लोग घायल हुए और कई अन्य को गिरफ्तार किया गया।
इस्राइली पुलिस ने मस्जिद के द्वार पर सख्त प्रतिबंध लगाए और कई फिलिस्तीनी उपासकों और छात्रों को प्रवेश से वंचित किया।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया
अल-अक्सा मस्जिद में तोड़फोड़ की घटना पर अरब और मुस्लिम देशों ने निंदा की है। मिस्र, इंडोनेशिया, जॉर्डन, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रियों ने एक संयुक्त बयान जारी किया।
इस बयान में कहा गया है कि इस्राइली बसने वालों और चरमपंथी समूहों द्वारा अल-अक्सा मस्जिद पर तोड़फोड़ करना एक अवैध और अतिवादी कार्य है।
अल-अक्सा मस्जिद का महत्व
अल-अक्सा मस्जिद इस्लाम की तीसरी सबसे पवित्र स्थल है। यह मस्जिद यरुशलम में स्थित है और इसका महत्व इस्राइल और फिलिस्तीनी दोनों के लिए है।
इस्राइल ने 1967 में पूर्वी यरुशलम पर कब्जा कर लिया और 1980 में इसे औपचारिक रूप से अपने अधिकार में ले लिया। लेकिन अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि इस्राइल का फिलिस्तीनी क्षेत्र पर कब्जा अवैध है।
- अल-अक्सा मस्जिद इस्लाम की तीसरी सबसे पवित्र स्थल है।
- इस्राइल ने 1967 में पूर्वी यरुशलम पर कब्जा कर लिया।
- अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि इस्राइल का फिलिस्तीनी क्षेत्र पर कब्जा अवैध है।
भविष्य की संभावनाएं
अल-अक्सा मस्जिद में तोड़फोड़ की घटना के बाद, इस्राइल और फिलिस्तीनी दोनों के बीच तनाव बढ़ गया है।
इस्राइल और फिलिस्तीनी दोनों को शांति की दिशा में काम करना होगा और अल-अक्सा मस्जिद की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। शांति और सुरक्षा के लिए दोनों पक्षों को मिलकर काम करना होगा। इसके अलावा, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को भी इस मुद्दे पर ध्यान देना होगा और शांति की दिशा में काम करना होगा। इस्राइल और फिलिस्तीनी शांति के लिए यह जरूरी है।