यूक्रेन में खत्म होगा महायुद्ध! पुतिन भी बातचीत को राजी

वॉशिंगटन
क्या यूक्रेन में बीते 9 महीने से चल रहा महायुद्ध अब थमने की ओर है? बीते दो दिनों के घटनाक्रम से तो ऐसा ही लगा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने गुरुवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात के बाद कहा था कि यदि पुतिन युद्ध करना चाहें तो वह बात करने के लिए राजी हैं। अब उनकी इस बात पर क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति भवन) से पॉजिटिव जवाब आया है। रूसी राष्ट्रपति की ओर से कहा गया है कि यदि यूक्रेन संकट का कोई हल निकलता है तो वह बातचीत के लिए तैयार हैं। इससे पहले बाइडेन ने कहा था कि यूक्रेन संकट का एक ही हल है कि व्लादिमीर पुतिन अपने सैनिकों को वापस बुला लें।

इसके अलावा उन्होंने कहा था कि यदि व्लादिमीर पुतिन सैनिकों को हटाएं और बातचीत को राजी हों तो मैं भी वार्ता के लिए तैयार हूं। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि व्लादिमीर पुतिन हमेशा बातचीत के लिए तत्पर रहे हैं, लेकिन रूस यूक्रेन से पीछे नहीं हटेगा। पेस्कोव ने कहा कि हमारे राष्ट्रपति हमेशा ही बातचीत के लिए तैयार रहे हैं। बशर्ते रूस के हित इससे प्रभावित न होते हों। व्लादिमीर पुतिन का कहना है कि उन्हें यूक्रेन पर अटैक करने का कोई अफसोस नहीं है। उनका कहना है कि पश्चिमी देशों की वर्चस्व की जंग को चुनौती देने के लिए उन्हें कदम उठाना पड़ा है।

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यूक्रेन के 20 फीसदी हिस्से के विलय का रूस ने किया है दावा

उनका कहना है कि 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद ही पश्चिमी देश रूस की सुरक्षा, संप्रभुता और अखंडता को चुनौती देते रहे हैं। वहीं यूक्रेन और पश्चिमी देशों का कहना है कि पुतिन यूक्रेन पर हमले को किसी भी तरह से सही नहीं ठहरा सकते। यूक्रेन का कहना है कि वह रूस के आखिरी सैनिक के उसके इलाके से हटने तक जंग जारी रखेगा। यूक्रेन के 5वें हिस्से पर रूस ने कब्जा जमा लिया है। इसके अलावा वहां जनमत संग्रह के जरिए विलय का भी दावा किया है। हालांकि यूक्रेन लगातार कहता रहा है कि हम इसे स्वीकार नहीं करते।

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गौरतलब है कि गुरुवार को ही रूस ने भारत को लेकर भी अहम टिप्पणी की थी। रूसी विदेश मंत्री सेरगेई लावरोव ने कहा था कि नाटो देश भारत को भी अपने साथ लाना चाहते हैं ताकि रूस और चीन की घेरेबंदी की जा सके। लावरोव का कहा था कि साउथ चाइना सी में लगातार अमेरिका और नाटो देश विवाद पैदा कर रहे हैं। उनकी कोशिश है कि इससे रूस और चीन को घेरा जा सके।

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