रवि अवस्थी,भोपाल // सफल राजनेता वही,जो सर्वमान्य रूप से जनता के बीच स्वीकार हो। विरोधी भी जिसकी व्यवहार कुशलता के कायल हों। वह उसके निशाने पर भले ही रहे लेकिन उसके केंद्र में भी हो। मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ऐसे ही जननेता हैं। जो अपने सरल व्यवहार,कड़ी मेहनत व निरंतर सक्रियता से लोकप्रियता की पायदान पर लगातार आगे बढ़ रहे हैं। उनके अपने संगठन प्रदेश भाजपा में ही यदि किसी मास लीडर की बात हो तो शिवराज पहला नाम है जो इसके लिए तय मापदंड पर खरे उतरते हैं। यही वजह है कि मुख्यमंत्री के तौर पर लगातार चौथी बार भी उन्हें ही सत्ता की बागडोर सौंपी गई।
संगठन के ध्येय मंत्र को किया आत्मसात
किसी शेर की पहली पंक्ति है,हुकूमत वही करते हैं जो दिलों पर राज करते हैं। शिवराज ऐसे ही विरले राजनेताओं में एक हैं। जिन्होंने अपनी पार्टी के ध्येय वाक्य को पूरी तरह आत्मसात किया। वह सर्वस्पर्शी हैं,’तो सबका साथ,सबका विकास व सबका विश्वास’ पर भी उनका भरोसा है। मुसीबत के वक्त पीड़ितों की बीच खड़े रहने की बात हो या आनंद के मौके पर अपनी खुशी बांटने की,शिवराज ने एक कुशल राजनेता की भांति इस काम को अब तक बखूबी अंजाम दिया है।
दूरस्थ क्षेत्रों के ग्रामीण हों या राजधानी के वाशिंदे,वह सबके दिलों में बसे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों एवं उनके मंत्रिमंडल सहयोगी, बतौर मुख्यमंत्री शिवराज के कामकाज व प्रदेश के विकास में उनके योगदान की सराहना करना नहीं भूलते।
संगठन नेतृत्व के भी वह उतने ही अजीज हैं। यही वजह है, कि तमाम सियासी अटकलों व धारणाओं को गलत ठहराते हुए वह अपने कर्तव्य पथ पर बढ़ते रहे। कहा भी जाता है ,”सफलता के शिखर पर पहुंचने से अधिक मुश्किल है,इस पर लगातार बने रहना” लेकिन समन्वय की सियासत पर चलते हुए मुख्यमंत्री शिवराज ने अपनी हर मुश्किल को आसान बनाया।
** किशोरावस्था में ही जागा समाज सेवा का भाव
सीहोर जिले के ग्राम जैत के सामान्य परिवार में 5 मार्च 1959 को जन्मे शिवराज के मन में पीड़ितों की सेवा का भाव बाल्यकाल से ही रहा। गरीबी को उन्होंने नजदीक से देखा। इनकी पीड़ा को भी समझा।किशोरावस्था में ही,श्रमिकों की कडी मेहनत और बदले में मिलने वाली नाम मात्र की मजदूरी के खिलाफ खड़े होकर उन्होंने अपनों का भी विरोध झेला।
कहावत है-‘पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं’। श्रमिकों के समर्थन में निकाली विरोध रैली ने उनके भविष्य के जो संकेत उस वक्त दिए,वे आज फलीभूत हो रहे हैं। महिलाओं का सम्मान,उनके सशक्तिकरण का भाव और बच्चों के प्रति उनका स्नेह किसी से छिपा नहीं है।
जनप्रतिनिधि चुने जाने से पूर्व ही वह गरीब कन्याओं के विवाह कराना और सत्ता का साथ मिलने पर इसे अभियान बना देने का काम सिर्फ शिवराज ही कर पाए। इसका अनुसरण बाद में औरों ने भी किया। गरीब,असहाय बेटी का विवाह या निकाह ही क्यों ,उसके जन्म से लेकर उसकी शिक्षा—दीक्षा व अन्य सामाजिक दस्तूर का दायित्व भी उन्होंने अपने कंधों पर लिया।अपने इन्हीं सामाजिक दायित्व बोध के कारण वह कब प्रदेश के बच्चों के मामा ,बहनों के लाड़ले भाई व बुजुर्गों के ‘श्रवण कुमार’ बन गए,इसका इल्म भी उन्हें शायद बहुत बाद में ही हुआ होगा।
** ‘लाड़ली बहना’ गरीब महिलाओं को बड़ी सौगात
सूबे के मुखिया के लिए प्रदेश एक परिवार है तो स्वाभाविक है,राज्य की महिलाएं इसकी धुरी हैं। अपने 64वें जन्मदिन पर जो सौगात लाड़ली बहना योजना के माध्यम से शिवराज एक करोड़ से अधिक गरीब महिलाओं को देने जा रहे हैं ,वह इन महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। हजार रुपए मासिक की रकम उस गरीब महिला के लिए अधिक मायने रखती है,जो एक—एक रुपए के लिए मोहताज है।
शहरी क्षेत्रों में ही सामाजिक सुरक्षा पेंशन की मामूली राशि पाने,प्रतिमाह बेसब्री से इंतजार व तारीख पर बैंकों के समक्ष अल सुबह से लगती लंबी कतार इसकी बानगी है। न सिर्फ गरीब महिलाओं की चिंता बल्कि उन बेटियों की भी उतनी ही फिक्र जिन्हें पढ़ा -लिखा कर आत्मनिर्भर बनाना है।
** अंत्योदय की सोच ने बदली तस्वीर
मुख्यमंत्री शिवराज की इसी सोच ने लाड़ली लक्ष्मी जैसी योजना को ईजाद किया। उच्च शिक्षा के लिए भी इन्हें प्रोत्साहित करने लाड़ली लक्ष्मी फेज—2 व मुख्यमंत्री स्कूटी योजना शुरू हुईं। नए साल के बजट में तो कुल बजट का करीब 33 फीसद हिस्सा ही प्रदेश की इस आधी आबादी के नाम कर दिया गया। फिक्र तो समाज के उस वर्ग की भी रही,जिसे विकास की मुख्यधारा में पूरी तरह लाने लगातार सहयोग व अधिकार संपन्न बनाने की है।
आदिवासी विकासखंडों व अगले चरण में सभी जनजातीय बाहुल्य पंचायतों में पेसा एक्ट को प्रभावी तरीके से लागू किया जाना,8 सौ से अधिक वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में बदलकर उन्हें भी अन्य लोगों के समान अधिकार देना,राजस्व कानून में बदलाव कर विभिन्न कारणों से हुए नुकसान की भरपाई के लिए क्षतिपूर्ति राशि की बढ़ोतरी,युवाओं के लिए स्वरोजगार सृजन के प्रयास,जनजातीय वर्ग के युवाओं को राशन परिवहन रोजगार मूलक योजना से जोड़ना,प्रदेश में करीब 3.85 लाख स्व सहायता समूहों से जुड़ी 47 लाख से अधिक ग्रामीण महिलाओं को स्व रोजगार मुहैया कराने सरकारी योजनाओं,कार्यक्रमों से जोडना आदि ऐसे अनेक कार्य हैं जो मुख्यमंत्री शिवराज के हृदय में बसे अंत्योदय के भाव का उजागर करते हैं।
** मंशा सामाजिक सरोकार की ही
कल्याणकारी योजनाओं को जमीन पर उतारने यानी अंतिम पंक्ति तक के व्यक्ति को इसका लाभ पहुंचाने को लेकर भी शिवराज गंभीर रहे हैं। गत दिनों प्रदेशभर में लगाए गए जनसेवा शिविर व इसके बाद संबंधित हितग्राहियों को योजना का लाभ देकर इसका स्वीकृत पत्र दिया जाना इसकी बानगी है। विरोधी इसे सियासी कर्मकांड मानते हैं,लेकिन देखा जाए तो इसके मूल में भी उनकी मंशा ,सामाजिक सरोकार की ही है।
दरअसल,बीते 75 सालों के दौरान तंत्र में विकसित ‘जड़ता’ से राजनेता भी वाकिफ हैं। फर्क इतना है कि अभिव्यक्ति को लेकर सत्तासीन की अपनी कुछ सीमाएं हैं। बावजूद इसके शिवराज,तंत्र की ‘जड़ता’ पर प्रहार करने से नहीं चूकते।मंत्रालय में रंगीन तस्वीर परोसे जाने की बात हो या सुशासन की परिभाषा में बिना लेनदेन काम करने की नसीहत। वह सरकार की इस कमी को उजागर करने में भी साफगोई पर भरोसा रखते हैं।
** बतौर मुख्यमंत्री हर पारी बेमिसाल
उपलब्धियों के लिहाज से शिवराज जी का प्रत्येक कार्यकाल बेमिसाल रहा है,लेकिन चौथे कार्यकाल में उनके कामकाज के तौर-तरीकों व चिंतन में गजब का बदलाव देखा गया। राज्यपाल मंगुभाई पटेल यदि अपने बजट अभिभाषण में यह कहते हैं ,कि शिवराज सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा करने में केंद्र के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है ,तो यह अतिशयोक्ति नहीं है।
बीते दस वर्षों में प्रदेश की विकास दर में 319 प्रतिशत की छलांग,पिछले वित्तीय वर्ष में इसका 16.43 प्रतिशत बने रहना व प्रति व्यक्ति आय में साल दर साल हो रही बढ़ोतरी,देश की जीडीपी में मप्र की 4.8 प्रतिशत की भागीदारी दर्शाती है कि मध्यप्रदेश आत्मनिर्भरता की और बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह यदि यह दावा करते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था 5 हजार अरब डॉलर करने के प्रधानमंत्री के संकल्प को पूरा करने ,मध्य प्रदेश वर्ष 2026 तक साढ़े पांच सौ अरब डॉलर का योगदान करेगा,तो यह उनके आत्मविश्वास को प्रदर्शित करता है। उनका यह दावा हवा में नहीं है। कोरोना काल में जब दुनिया के अनेक देश आर्थिक मंदी झेल रहे थे। उस वक्त भी मध्य प्रदेश में विकास की गति का पहिया निरंतर घूमता रहा।
वर्ष 2021-22 की आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पर गौर किया जाए तो इस दौर में भी मध्य प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय में इजाफा हुआ। आत्मनिर्भर मप्र के रोडमैप में विज्ञान,उद्योग,रोजगार सृजन,ग्रामीण विकास,खेल,शिक्षा,स्वच्छ पर्यावरण,पर्यटन विकास व सुशासन आदि शामिल हैं। बीते कुछ सालों के दौरान इन क्षेत्रों में भी जिस तेज गति से काम हुआ ,वह अद्भुत ही माना जाएगा।
खेल,पर्यटन व शिक्षा का वोट बैंक से शायद ही कोई नाता हो,लेकिन चुनावी वर्ष में भी राज्य सरकार यदि इनकी चिंता कर रही है तो इसका श्रेय प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह को ही जाता है। जो आत्मनिर्भर मप्र के लिए संकल्पबद्ध हैं। संकल्प को साध्य बनाने में उनका कोई सानी नहीं। लगातार दो साल से नियमित पौधरोपण कर उन्होंने यह साबित कर दिखाया कि वह संकल्प के धनी हैं।
** दिलाया मध्यप्रदेश को गौरव
ईंधन विकल्प के तौर पर मध्य प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की शुरुआत,एक जिला-एक उत्पाद अंतर्गत महुआ सहित अनेक लघु वनोपज के निर्यात को बढ़ावा,स्टार्टअप के क्षेत्र में युवा पीढ़ी के बढ़ते कदम व पहली बार जिला कलेक्टरों का गांव तक पहुंचकर जन समस्याओं की सुनवाई व निराकरण करना अनेक ऐसे उदाहरण हैं। जो मध्य प्रदेश को अन्य राज्यों से अलग खड़ा करते हैं।
कहने को 16 राज्यों में भाजपा की सरकार है,लेकिन प्रवासी भारतीय सम्मेलन,खेलो इंडिया यूथ गेम्स व सातवें अंतरराष्ट्रीय धर्म धम्म सम्मेलन की मेजबानी के लिए यदि मप्र का चुना जाता है तो इसका आधार मप्र का सिर्फ इसके हृदय प्रदेश होना नहीं,बल्कि बढ़ती अधोसंरचना,बेहतर सुविधाएं व इससे इतर प्रदेश के मुखिया का ’वसुधैव कुटुम्बकम’ व ‘अतिथि देवो भव:’ का वह भाव जो यहां आने वाले मेहमानों को गदगद करता है।
** वक्त की मांग के अनुरूप खुद को बदला
शिवराज का व्यक्तित्व उदारता का रहा है,लेकिन चौथे कार्यकाल में वक्त की मांग के लिहाज से उन्होंने स्वयं को बदला। एक और प्रदेश में अतिक्रमणकारियों व माफिया के खिलाफ तीखे तेवर अपनाए तो गरीबों को सताने वालों के आशियाने ध्वस्त कर उन्हें सबक भी सिखाया। लव-जिहाद व पत्थरबाजों को भी सबक सिखाने कड़े कानून बनाए।
इस कार्यकाल में उन्होंने इतिहास को बदलने वाले कई कदम उठाए। इनमें इस्लामनगर का जगदीशपुर,होशंगाबाद को नर्मदापुरम नाम देकर इनकी पहचान व वैभव लौटाने का काम किया। वहीं , उज्जैन में श्री महाकाल लोक निर्माण,ओंकारेश्वर में अद्वैत धाम,ओरछा में रामराजा लोक,चित्रकूट में राम लोक,सलकनपुर में देवी धाम तैयार किए जाने की अवधारणा आदि ऐसे कार्य हैं जो अविस्मरणीय साबित होंगे।
** सुशासन की दिशा में बढ़ते कदम
जरूरतमंद के काम बिना लेनदेन के समय पर हो जाएं ,यह सुशासन है। मुख्यमंत्री सुशासन की यह परिभाषा समय-समय पर बताते भी रहे हैं। दरअसल,उनका अगला लक्ष्य इसी दिशा में है।अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान की मदद से हजारों की संख्या में रिसर्च फेलो का चयन,उनका कौशल विकास व अब इन युवाओं की मैदानी नियुक्तियां इसी दिशा में उनका ऐसा ही एक कदम है।
इन्हें उन्होंने सरकार के जासूस का नाम दिया है। हालांकि सर्वव्यापी व रग-रग में बस चुके भ्रष्टाचार को खत्म करना एक दुरूह कार्य है।इसके लिए समन्वित प्रयास जरूरी हैं।
बहरहाल,उम्मीद की जानी चाहिए कि प्रदेश के समग्र विकास के इरादे से प्रशासनिक क्षेत्र में इन युवाओं की तैनाती सुशासन स्थापित करने में कारगर होगी। अपनी पार्टी के एक साधारण कार्यकर्ता से जननायक बने मुख्यमंत्री चौहान को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।