श्रावणी मेला 2026 में श्रद्धालु सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार गंगा मिट्टी का उपयोग करते हैं, जो उनके जलपात्र को पवित्र बनाता है। गंगा मिट्टी में देवी गंगा का दिव्य अंश माना जाता है, जो श्रद्धालुओं को शुभ और पूजनीय लगता है। यह परंपरा आस्था के साथ स्थानीय लोगों की आजीविका का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है।
गंगा मिट्टी का महत्व और उपयोग
श्रावणी मेला में सुलतानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए रवाना होने वाले लाखों कांवरियों के कंधे पर केवल उत्तरवाहिनी गंगा का पवित्र जल ही नहीं होता, बल्कि गंगा तट की पवित्र मिट्टी भी साथ चलती है।
गंगा का जलस्तर बढ़ने पर उपयुक्त मिट्टी मिलना कठिन हो जाता है, इसलिए दुकानदार पहले से इसका संग्रह कर लेते हैं।
गंगा मिट्टी के रहस्य
गंगा मिट्टी में देवी गंगा का दिव्य अंश माना जाता है, जो श्रद्धालुओं को शुभ और पूजनीय लगता है। यह परंपरा आस्था के साथ स्थानीय लोगों की आजीविका का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है।
श्रद्धालु गंगा मिट्टी को अपने घर ले जाकर गृह पूजा, धार्मिक अनुष्ठान और मांगलिक कार्यों में भी उपयोग करते हैं।
गंगा मिट्टी के उपयोग के तरीके
श्रावणी मेला शुरू होने से पहले स्थानीय परिवार गंगा तट से उपयुक्त मिट्टी एकत्र कर छोटे-छोटे गोले तैयार करते हैं।
मेला के दौरान घाटों के आसपास पूजा सामग्री की दुकानों पर यही गंगा मिट्टी श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराई जाती है।
- गंगा मिट्टी में देवी गंगा का दिव्य अंश माना जाता है।
- श्रद्धालु गंगा मिट्टी को अपने घर ले जाकर गृह पूजा, धार्मिक अनुष्ठान और मांगलिक कार्यों में उपयोग करते हैं।
- गंगा मिट्टी का उपयोग श्रद्धालुओं की आजीविका का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।