अजा एकादशी 2026: भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी का व्रत आज यानी 7 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जा रहा है। यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन व्रत, पूजा-पाठ और संयम का विशेष महत्व है। पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 6 सितंबर की शाम से शुरू होकर 7 सितंबर की शाम तक रहेगी।
मान्यता है कि एकादशी के दिन केवल उपवास रखना ही पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि मन, वाणी और कर्मों में भी संयम रखना चाहिए। ऐसे में आज कुछ कामों से बचने की सलाह दी जाती है।
1. चावल और अनाज का सेवन न करें
एकादशी व्रत में चावल, गेहूं, दाल और अन्य अनाज का सेवन नहीं किया जाता है। व्रत रखने वाले लोग अपनी परंपरा और क्षमता के अनुसार फलाहार या अन्य सात्विक आहार लेते हैं। धार्मिक मान्यताओं में एकादशी के दिन अनाज से परहेज करने की परंपरा बताई गई है।
2. तुलसी के पत्ते न तोड़ें
भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व है, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी की पत्तियां तोड़ने से बचने की परंपरा है। पूजा के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले तोड़कर रखे जा सकते हैं। पूजा में पहले से रखे हुए तुलसी दल का इस्तेमाल किया जा सकता है।
3. क्रोध और विवाद से बचें
एकादशी को धार्मिक रूप से संयम और भक्ति का दिन माना जाता है। इसलिए इस दिन किसी से झगड़ा करना, अपशब्द बोलना, क्रोध करना या किसी को अपमानित करना उचित नहीं माना जाता। भक्तों को शांत मन से भगवान विष्णु का स्मरण और मंत्र जाप करने की सलाह दी जाती है।
4. नशे और तामसिक भोजन से दूर रहें
एकादशी के दिन मांसाहार, शराब और अन्य नशीले पदार्थों से पूरी तरह दूर रहने की धार्मिक परंपरा है। इसके अलावा तामसिक भोजन से भी बचने की सलाह दी जाती है। व्रत के दौरान सात्विकता और इंद्रिय संयम पर जोर दिया जाता है।
अजा एकादशी पर क्या करें?
अजा एकादशी के दिन सुबह स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करें। उन्हें पीले फूल, फल और तुलसी अर्पित करें। श्रद्धानुसार व्रत का संकल्प लें और विष्णु मंत्र या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। धार्मिक मान्यताओं में रात में भगवान विष्णु का भजन और जागरण भी शुभ माना गया है।
8 सितंबर को होगा व्रत का पारण
अजा एकादशी का पारण 8 सितंबर 2026 को द्वादशी तिथि में किया जाएगा। नई दिल्ली के लिए उपलब्ध पंचांग के अनुसार पारण का समय सुबह 6:02 बजे से 8:32 बजे तक है। हालांकि अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के आधार पर समय में अंतर हो सकता है।
जरूरी बात
ये नियम धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं। अलग-अलग संप्रदाय और परिवारों में एकादशी व्रत के नियम अलग हो सकते हैं। व्रत रखने वाले लोग अपनी स्वास्थ्य स्थिति और क्षमता के अनुसार ही उपवास करें।