साल में चौथा ट्रांसफर! IAS नेहा ने अधिकारियों के ग्रुप में खोला ‘सिस्टम’ का राज

IAS नेहा मारव्या का 50 दिन में फिर तबादला हुआ। उन्होंने IAS ग्रुप में लिखा कि एक साल में यह चौथा ट्रांसफर है और शिकायतों पर कार्रवाई की जगह उनका ही तबादला किया गया।

भोपाल(9826019364)।
मध्यप्रदेश कैडर की 2011 बैच की IAS अधिकारी नेहा मारव्या सिंह का 50 दिन में फिर तबादला हुआ है।
इसके बाद उन्होंने IAS अधिकारियों के ग्रुप में अपना दर्द साझा किया।
5 सितंबर 2026 की तबादला सूची में नाम आने के बाद नेहा ने लिखा-
पिछले एक साल में यह चौथी बार है, जब उनका नाम ट्रांसफर लिस्ट में आया है।
उन्होंने कहा कि इस बार वह खुद को बेहद हतोत्साहित महसूस कर रही हैं।

📱 IAS ग्रुप में लिखा- शिकायत की, कार्रवाई की जगह मेरा ट्रांसफर

नेहा ने अपने संदेश में कहा कि वह समझती हैं कि IAS अधिकारी होने के नाते राज्य सरकार उन्हें जहां चाहे, वहां पदस्थ कर सकती है।
उन्होंने अब तक सरकार के आदेशों का सम्मानपूर्वक पालन किया है।
हालांकि, इस बार उनका कहना है कि मामला अलग है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग के कुछ कर्मचारियों ने उनके खिलाफ विद्रोह जैसा माहौल बनाया। उनके मुताबिक, कर्मचारियों ने मेज थपथपाकर उन्हें ट्रांसफर कराने की धमकी तक दी।
नेहा ने दावा किया कि उन्होंने अनुशासनहीनता, फाइलें रोके जाने और दुर्व्यवहार की शिकायत उचित माध्यम से की थी। उन्हें उम्मीद थी कि मामले में कार्रवाई होगी। लेकिन, उनके मुताबिक, कार्रवाई की जगह उनका ही तबादला कर दिया गया।

🔄 50 दिन में फिर बदली जिम्मेदारी

5 सितंबर को नेहा मारव्या को MD,अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम बनाया गया है।
साथ ही उन्हें अपर सचिव, मध्यप्रदेश शासन के समकक्ष पद घोषित किया गया है।
इससे पहले उनके पास आदिम जाति क्षेत्रीय विकास योजनाओं के संचालक,
MAPCET के प्रबंध संचालक, अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम के प्रबंध संचालक
और आदिम जाति अनुसंधान एवं विकास संस्थान के संचालक का अतिरिक्त प्रभार था।

पहले भी विवादों में रहा प्रशासनिक सफर

नेहा मारव्या का प्रशासनिक करियर पहले भी विवादों से जुड़ी खबरों में रहा है।
2017 में शिवपुरी जिला पंचायत CEO रहते हुए तत्कालीन कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव के साथ उनके मतभेद की खबर सामने आई थी।
दरअसल, नेहा ने कलेक्टर के इस्तेमाल में आ रही किराए की सफारी के भुगतान को लेकर आपत्ति जताई थी।
निर्धारित दर से अधिक भुगतान का हवाला देते हुए उन्होंने बिल रोक दिया था।
इसी दौरान कुछ समय के लिए वह प्रभारी कलेक्टर भी रहीं।

🏢 Sr.मनीष रस्तोगी से मतभेद भी चर्चा में

राजस्व विभाग में पदस्थापना के दौरान तत्कालीन प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी के साथ भी उनके मतभेद की खबरें सामने आई थीं।
रिपोर्टों के मुताबिक, नेहा ने आरोप लगाया था कि पदभार ग्रहण करने पहुंचने पर उन्हें कार्यालय में प्रवेश नहीं दिया गया और बाहर जाने को कहा गया।
यह मामला भी उस समय चर्चा में रहा था।

📍 डिंडौरी में भी करीब 8 महीने रहा कार्यकाल

जनवरी 2025 में नेहा मारव्या को पहली बार कलेक्टर की फील्ड पोस्टिंग मिली थी।
करीब 14 साल की सेवा के बाद उन्हें डिंडौरी कलेक्टर बनाया गया।
उनका कार्यकाल 29 जनवरी 2025 से 2 अक्टूबर 2025 तक रहा।
यानी करीब आठ महीने बाद ही उन्हें कलेक्टर पद से हटा दिया गया।
डिंडौरी में भी उनकी कार्यशैली को लेकर विवाद सामने आए थे।
अगस्त 2025 में भाजपा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने कलेक्टर पर गंभीर आरोप लगाए थे
उन्होंने मुख्यमंत्री से शिकायत करने की बात कही थी।

🗣️ आदिम जाति विभाग में कर्मचारियों से भी विवाद

डिंडौरी के बाद नेहा को आदिम जाति क्षेत्रीय विकास योजनाओं का संचालक बनाया गया।
यहां भी उनके काम करने के तरीके को लेकर विवाद की खबरें सामने आईं।
योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर उनके और तत्कालीन प्रमुख सचिव गुलशन बामरा के बीच मतभेद की स्थिति बनी।
इसके बाद कर्मचारियों की ओर से भी उनके खिलाफ मोर्चा खोले जाने की बात सामने आई।
मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचने की खबरें भी आईं।

📝 संदेश में बोलीं- ‘आज मैं, कल कोई और IAS अधिकारी’

अपने संदेश में नेहा ने लिखा कि पिछले एक साल में उनका चौथी बार ट्रांसफर हुआ है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कोई IAS अधिकारी इतना असुरक्षित हो सकता है कि अधीनस्थ कर्मचारियों के विरोध के कारण उसका तबादला हो जाए?
उन्होंने लिखा कि उनकी पोस्टिंग कई बार केवल 2-3 महीने की रही
जब तक वह किसी जिम्मेदारी को समझ पाती हैं, तब तक उन्हें हटा दिया जाता है।
नेहा ने यह भी आरोप लगाया कि लंबे समय तक उन्हें किनारे रखा गया और काम नहीं दिया गया।
अब स्थिति और खराब होने की बात उन्होंने कही।
अपने संदेश के अंत में उन्होंने लिखा कि
“साजिश करने वाले हमेशा जीतते हैं और मैं हारती हूं।
सिस्टम ने मुझे विफल कर दिया है।
आज मैं हूं, कल कोई और IAS अधिकारी निशाना बनेगा।”

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