शीतला सप्तमी का व्रत बच्चों की सेहत के लिए रखा जाता है

शीतला सप्तमी का व्रत बच्चों की सेहत के लिए रखा जाता है

हिन्दू परंपरा में शीतला सप्तमी का बहुत महत्व है। इस दिन देवी शीतला या शीतला माता की पूजा होती है। स्कंद पुराण में शीतला सप्तमी का महत्व बताया गया है। देश के कई हिस्सों में इनके मंदिर बने हैं, जहां इस दिन भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। यह त्योहार चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। शुरुआती दौर में बच्चों को चिकन पॉक्स या चेचक जैसी संक्रामक और जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए शीतला माता की पूजा की जाती थी। लेकिन अब शीतला सप्तमी के दिन महिलाएं परिवार के सदस्यों और विशेषकर बच्चों की सेहत के लिए देवी शीतला की पूजा करते हैं।

हिंदू पौराणिक कथाओं में शीतला माता चेचक की देवी हैं। उन्हें देवी पार्वती और देवी दुर्गा का अवतार माना जाता है। हिंदू धर्म में देवी शीतला बीमारियों और उपचार शक्ति, दोनों का प्रतिनिधित्व करती हैं। ‘शीतल’ शब्द का अर्थ है ‘ठंडा’ और ऐसा माना जाता है कि देवी शीतला संक्रामक रोगों से पीड़ित भक्तों को शीतलता प्रदान करती हैं। गर्मियों की शुरुआत में संक्रामक बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा होता है, इसलिए बच्चों को ऐसी बीमारियों से सुरक्षा देने के लिए शीतला माता की पूजा की जाती है |

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