उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा और बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने नाप-तौल (लीगल मेट्रोलॉजी) से जुड़े नियमों में व्यापक बदलाव का मसौदा जारी किया है। प्रस्तावित नियमों के तहत यदि कोई व्यापारी कम तौल देता है या गलत माप वाले उपकरणों का उपयोग करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
सरकार का कहना है कि नए नियमों से उपभोक्ताओं को सही वजन और माप सुनिश्चित होगा, वहीं ईमानदारी से कारोबार करने वाले व्यापारियों को भी लाभ मिलेगा।
पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन
प्रस्तावित संशोधनों के तहत लाइसेंस जारी करने, नवीनीकरण और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरी तरह ऑनलाइन करने की योजना है। इससे आवेदन प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और अधिक सुविधाजनक बनने की उम्मीद है। साथ ही अधिकारियों को निरीक्षण और जांच के लिए अधिक अधिकार भी दिए जाएंगे, ताकि नियमों का प्रभावी ढंग से पालन कराया जा सके।
लाइसेंस व्यवस्था में भी बदलाव
सरकार ने व्यापारियों, निर्माताओं और माप-तौल उपकरणों की मरम्मत करने वाले लाइसेंसधारकों के लिए नई लाइसेंस फीस का प्रस्ताव रखा है। नए नियमों के अनुसार लाइसेंस पहली बार पांच वर्ष के लिए वैध होगा। इसके बाद प्रत्येक तीन वर्ष में इसका नवीनीकरण कराना अनिवार्य होगा। समय पर नवीनीकरण नहीं कराने पर लाइसेंस अमान्य माना जा सकता है।
पेट्रोल पंप और मशीनों की जांच के लिए तय होंगे शुल्क
प्रस्तावित नियमों में पेट्रोल पंपों के डिस्पेंसर, इलेक्ट्रॉनिक कांटे, औद्योगिक वजन मशीनों और अन्य माप उपकरणों की सरकारी जांच के लिए भी निर्धारित शुल्क तय किए गए हैं। सरकार का मानना है कि इससे पूरे देश में जांच प्रक्रिया में एकरूपता आएगी और अलग-अलग क्षेत्रों में मनमाने शुल्क वसूले जाने की शिकायतों पर रोक लगेगी।
गलत माप देने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
यदि जांच के दौरान कोई व्यापारी या प्रतिष्ठान अमानक वजन, गलत माप या दोषपूर्ण मशीनों का उपयोग करता हुआ पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार ऐसे मामलों में 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। गंभीर मामलों में अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
जनता से मांगे गए सुझाव
सरकार ने संशोधित ड्राफ्ट नियमों को सार्वजनिक कर दिया है। व्यापारी संगठनों, उद्योग प्रतिनिधियों, उपभोक्ता संगठनों और आम नागरिकों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं। प्राप्त सुझावों की समीक्षा के बाद ही नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
क्या है लीगल मेट्रोलॉजी कानून?
लीगल मेट्रोलॉजी कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में उपयोग किए जाने वाले सभी वजन और माप उपकरण—जैसे तराजू, इलेक्ट्रॉनिक वेट मशीन, पेट्रोल पंप डिस्पेंसर और अन्य मापन यंत्र—निर्धारित मानकों के अनुरूप और सटीक हों। इसका मकसद उपभोक्ताओं को कम तौल या गलत माप देकर होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाना और निष्पक्ष व्यापार को बढ़ावा देना है।
सरकार के प्रस्तावित नए नाप-तौल नियम उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करने और बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। यदि ये नियम लागू होते हैं, तो गलत माप और कम तौल जैसी शिकायतों में कमी आने की उम्मीद है। साथ ही व्यापारियों को भी निर्धारित मानकों और लाइसेंस संबंधी नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।