पाली छात्रवृत्ति घोटाला: जांच के बीच मिली पदोन्नति, अब कार्रवाई की तैयारी

पाली छात्रवृत्ति घोटाले में विभागीय जांच रिपोर्ट मुख्यालय पहुंच गई है। प्रभारी प्राचार्य पर आरोप सही पाए गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि जांच लंबित रहने के दौरान ही उन्हें पदोन्नति का लाभ भी दे दिया गया।

भोपाल।(9826019364)

उमरिया जिले के पाली स्थित राजकीय कन्या शिक्षा परिसर के छात्रवृत्ति घोटाले में विभागीय जांच पूरी होने के बाद प्राचार्य पर कार्रवाई की तैयारी है। हैरानी की बात यह है कि जांच लंबित रहने के दौरान ही उन्हें पदोन्नति का लाभ भी दे दिया गया। अब जांच रिपोर्ट मुख्यालय पहुंचने के बाद पूरे मामले में विभागीय फैसले का इंतजार है।

जांच रिपोर्ट मुख्यालय पहुंची, कार्रवाई का इंतजार

सूत्रों के अनुसार, शहडोल संभाग के उपायुक्त जे.पी. यादव ने जांच रिपोर्ट विभागीय मुख्यालय भेज दी है। रिपोर्ट में प्रभारी प्राचार्य सरिता जैन पर लगे आरोप प्रथमदृष्टया सही पाए गए हैं। अब अंतिम निर्णय विभागीय मुख्यालय को लेना है।

विभाग के अपर संचालक सुधीर कुमार जैन ने रिपोर्ट मिलने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि प्रकरण को नियमानुसार आगे की कार्रवाई के लिए अग्रेषित कर दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि इस मामले को जनप्रचार ने प्रमुखता से उजागर किया था। इसके बाद विभागीय आयुक्त तरुण राठी के संज्ञान में मामला आने पर प्रशासन सक्रिय हुआ।

मैदानी अफसरों ने छिपाई बात,जांच के बीच ही मिल गई पदोन्नति

मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि विभागीय जांच जारी रहने के दौरान ही प्राचार्य सरिता जैन को पदोन्नति का लाभ दे दिया गया। 12 जुलाई को जारी पदोन्नति सूची में उन्हें सातवें वेतनमान का लाभ प्रदान किया गया।

सूत्रों का कहना है कि सामान्यतः किसी लोकसेवक के खिलाफ विभागीय जांच लंबित होने पर पदोन्नति जैसे लाभ रोक दिए जाते हैं। ऐसे में जांच के बीच पदोन्नति मिलने से विभागीय प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं।

सूत्रों का दावा है,कि आरोपी प्रभारी प्राचार्य के खिलाफ लंबित जांच की जानकारी समय रहते संभागीय उपायुक्त एवं जिला कार्यालय की ओर से विभाग मुख्यालय को नहीं दी गई,जबकि  जांच गत मई में ही संस्थित कर दी गई थी।

राशि लेने की बात स्वीकार की

सूत्रों के मुताबिक, विभागीय जांच में प्रभारी प्राचार्य पर लगे आरोप प्रथमदृष्टया सही पाए गए। उन्होंने पहले जनप्रचार से चर्चा में छात्राओं से राशि लेने की बात स्वीकार की थी।उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अब शाला प्राचार्य के प्रभार से हटा दिया गया है।

प्रभारी प्राचार्य का कहना था कि राशि छात्राओं के लिए पुस्तकें खरीदने के उद्देश्य से ली गई थी। हालांकि, वह यह नहीं बता सकीं कि इसके लिए उन्हें कोई लिखित या मौखिक निर्देश किसने दिए थे।

वहीं, प्रभावित छात्राओं और उनके अभिभावकों का कहना है कि राशि लेने के बावजूद उन्हें कोई शैक्षणिक सामग्री नहीं मिली। उनका आरोप है कि छात्रवृत्ति की पूरी राशि भी वापस नहीं की गई।

जांच का दायरा बढ़ाने की मांग

इधर, छात्र संगठनों ने पूरे जिले के संबंधित विद्यालयों और छात्रावासों की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि करीब 250 छात्राओं की छात्रवृत्ति राशि से जुड़े इस मामले में केवल प्राचार्य की भूमिका की जांच पर्याप्त नहीं होगी। यदि व्यापक जांच हुई तो अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

क्या है पूरा मामला?

पाली स्थित राजकीय कन्या शिक्षा परिसर की कई छात्राओं और उनके अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि छात्रवृत्ति और अन्य शैक्षणिक मदों की राशि उनके बैंक खातों से निकलवाई गई। उनका कहना है कि राशि नहीं देने पर परीक्षा में फेल करने या पढ़ाई में परेशानी की आशंका जताई जाती थी। अब विभागीय जांच पूरी होने के बाद कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

इस संबंध में संभागीय उपायुक्त जेपी यादव ने कहा कि उन्होंने जांच प्रतिवेदन अपने अभिमत के साथ विभाग मुख्यालय को भेज दिया है। अब निर्णय मुख्यालय को लेना है।