वाशिंगटन।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि फिलहाल ईरान के साथ किसी अस्थायी समझौते को समाप्त करने का फैसला नहीं हुआ है। हालांकि ,हालिया घटनाओं ने दोनों देशों के रिश्तों को और तनावपूर्ण बना दिया है।

ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद भरोसे का माहौल कमजोर हुआ है। ऐसे में, मौजूदा परिस्थितियों में किसी नए समझौते की संभावना बेहद कम है।
उन्होंने ईरानी नेतृत्व पर भी तीखी टिप्पणी की। ट्रंप ने कहा कि वर्तमान नेतृत्व के साथ सार्थक बातचीत मुश्किल है। फलस्वरूप, अमेरिका अपने हितों को प्राथमिकता देगा।
उन्होंने संकेत दिए कि जरूरत पड़ने पर ईरान के साथ व्यापारिक संबंध और सीमित किए जा सकते हैं। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका हर कदम राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाएगा।
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तनाव की जड़ क्या है?

दोनों देशों के बीच विवाद दशकों पुराना है। वर्ष 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद दोनों देशों के रिश्ते लगातार बिगड़ते गए।
नतीजतन,आर्थिक प्रतिबंध, क्षेत्रीय संघर्ष और परमाणु कार्यक्रम सबसे बड़े विवाद बने। अमेरिका लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सवाल उठाता रहा है।
वहीं, ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। जबकि,अमेरिका इस दावे पर लगातार संदेह जताता रहा है।
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आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि टकराहट जारी रहने से पश्चिम एशिया में तनाव गहरा सकता है। ऐसे में, इसका असर वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।