मप्र कांग्रेस की बैठक में खुली कलह, दिग्विजय के बयान पर उठे सवाल

कांग्रेस की PAC बैठक में दिग्विजय सिंह के बयान पर तीखी नाराजगी सामने आई। नेताओं ने संगठनात्मक नुकसान की आशंका जताई, जबकि पार्टी ने चार मुद्दों पर चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति बनाई।

भोपाल।

मध्य प्रदेश कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी (PAC) की वर्चुअल बैठक पार्टी के भीतर बढ़ती असहजता और मतभेदों की खुली अभिव्यक्ति बन गई। बैठक में वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के उस बयान को लेकर तीखी बहस हुई, जिसमें उन्होंने उज्जैन भूमि आवंटन प्रकरण पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के आरोपों से अलग राय व्यक्त की थी।

कई नेताओं ने इसे संगठनात्मक संदेश के लिहाज से नुकसानदेह बताया और कहा कि यदि पार्टी के शीर्ष नेता सार्वजनिक मंचों पर अलग-अलग बयान देंगे, तो कार्यकर्ताओं के लिए जनता के बीच पार्टी का पक्ष रखना मुश्किल हो जाएगा।

‘दलाल’ विवाद पर दिग्विजय की सफाई

बैठक के बाद बढ़े विवाद के बीच दिग्विजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्पष्ट किया कि उनके और जीतू पटवारी के बीच किसी प्रकार का विवाद नहीं है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट है और वे पार्टी के किसी नेता के लिए ‘दलाल’ जैसे शब्द का प्रयोग नहीं कर सकते।

दिग्विजय ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने जिस ‘दलाल’ शब्द का जिक्र किया था, वह एक पत्रकार के नाम के संदर्भ में था, न कि किसी कांग्रेस नेता के लिए।

जीतू पटवारी का हमला जारी

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये मूल्य की जमीनें विभिन्न ट्रस्टों को महज एक रुपये की लीज पर दी जा रही हैं, जिनका लाभ कथित तौर पर RSS और भाजपा से जुड़े लोगों को मिल रहा है।

उन्होंने राम जन्मभूमि ट्रस्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां वित्तीय अनियमितताओं के आरोप पहले भी उठ चुके हैं। पटवारी ने कहा कि कांग्रेस इन मामलों को लेकर पीछे नहीं हटेगी और जवाबदेही तय कराने की लड़ाई जारी रखेगी।

‘अयोध्या से महाकाल तक आस्था पर चोट’

पटवारी ने भाजपा पर धार्मिक आस्थाओं के राजनीतिक उपयोग और आर्थिक अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए कहा कि अयोध्या से लेकर महाकाल तक कई मामलों में गंभीर प्रश्न उठे हैं।

उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार की संपत्तियों को लेकर पार्टी के पास लगातार नई जानकारियां आ रही हैं। कांग्रेस जल्द ही एक डिजिटल पोर्टल शुरू करेगी, जहां जनता मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों की कथित वैध-अवैध संपत्तियों से जुड़ी जानकारी साझा कर सकेगी।

बैठक में उठे सवाल

कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने बैठक में कहा कि यदि एक ओर जीतू पटवारी किसी मामले को भ्रष्टाचार से जोड़ रहे हैं और दूसरी ओर वरिष्ठ नेता सार्वजनिक रूप से अलग राय रख रहे हैं, तो कार्यकर्ताओं के सामने असमंजस की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने पूछा कि जनता के बीच पार्टी आखिर किस लाइन के साथ जाएगी और किसे सही माना जाएगा। मसूद ने संगठन के भीतर स्पष्ट और एकरूप संदेश देने की जरूरत बताई।

‘ऐसे बयान हमें राजनीतिक नुकसान पहुंचाएंगे

पूर्व विधायक प्रवीण पाठक ने बैठक में तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ता लगातार संघर्ष कर रहे हैं। यदि पार्टी के वरिष्ठ नेता ही प्रदेश नेतृत्व की सार्वजनिक आलोचना करेंगे, तो इससे संगठन कमजोर होगा। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ सकते हैं और विपक्ष के रूप में कांग्रेस की विश्वसनीयता को भी प्रभावित कर सकते हैं।

मामला आलाकमान तक पहुंचा

विवाद बढ़ने पर प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने बताया कि जीतू पटवारी पहले ही पूरे घटनाक्रम की जानकारी कांग्रेस नेतृत्व को दे चुके हैं। चौधरी ने कहा कि मामला अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के संज्ञान में है और शीर्ष नेतृत्व जो भी निर्णय करेगा, वह जल्द सार्वजनिक किया जाएगा।

पुराने बयान बने नए विवाद की वजह

दिग्विजय सिंह ने बड़वानी में कहा था कि जिस ट्रस्ट को जमीन दी गई है, वह निजी संस्था नहीं बल्कि सरकारी न्यास है और संभवतः जीतू पटवारी को मामले की पूरी जानकारी नहीं थी। इसके जवाब में जीतू पटवारी ने कहा कि उन्होंने जो सवाल उठाए हैं, वे अब भी कायम हैं और मुख्यमंत्री को उनका जवाब देना चाहिए। उन्होंने अपने आरोपों से पीछे हटने से इनकार किया।

मतभेद बरकरार, लेकिन आंदोलन की तैयारी तेज

अंदरूनी खींचतान के बावजूद कांग्रेस ने राज्य और केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रामक राजनीतिक अभियान चलाने की रणनीति बनाई है। पार्टी ने तय किया है कि आने वाले दिनों में चार प्रमुख मुद्दों पर चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा।

इन चार मुद्दों पर सरकार को घेरेगी कांग्रेस

1. उज्जैन भूमि आवंटन विवाद

पार्टी इस मामले को गांव-गांव तक ले जाने की तैयारी में है। कांग्रेस का आरोप है कि भूमि आवंटन में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं।

2. NEET पेपर लीक मामला

कांग्रेस परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य के सवाल को लेकर आंदोलन करेगी।

3. CBSE परीक्षा में कथित गड़बड़ियां

पार्टी इसे शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मुद्दा मानते हुए सरकार से जवाब मांगेगी।

4. खाद वितरण में अव्यवस्था

किसानों को समय पर खाद उपलब्ध नहीं होने और वितरण में कथित गड़बड़ियों को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में अभियान चलाया जाएगा।