अमेरिका-ईरान वार्ता से बदला समीकरण, भारत समेत दुनिया को राहत के संकेत

अमेरिका ने ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर लगी पाबंदियों में 60 दिन की ढील दी है। इससे भारत समेत कई देश फिर ईरानी तेल खरीद सकेंगे। ईरान ने IAEA निरीक्षकों की वापसी और होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित आवाजाही का भरोसा दिया।

बहरीन।

अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक बातचीत का पहला बड़ा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई देने लगा है। वाशिंगटन ने ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की बिक्री पर लगी पाबंदियों में 60 दिनों की अस्थायी ढील देकर संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच टकराव की जगह संवाद का रास्ता मजबूत हो रहा है।

भारत के लिए भी खुला विकल्प

अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने 21 अगस्त तक ईरानी तेल, पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के उत्पादन, आपूर्ति और बिक्री के लिए अस्थायी सामान्य लाइसेंस जारी किया है। इस फैसले से भारत समेत कई देशों के लिए ईरानी तेल खरीदने का रास्ता फिर खुल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक बाजार में आपूर्ति बढ़ेगी और तेल कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।

होर्मुज स्ट्रेट पर भरोसे की गारंटी

वार्ता के दौरान ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने का भरोसा दिया है। पिछले महीनों में इस क्षेत्र में तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई थी। अब जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य होने लगी है और बड़े तेल टैंकर फिर इस मार्ग का उपयोग कर रहे हैं।

परमाणु निगरानी की वापसी से बढ़ा विश्वास

समझौते का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को दोबारा काम करने की अनुमति देने पर सहमति जताई है। इससे ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताओं को कम करने में मदद मिल सकती है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने संकेत दिया है कि निरीक्षकों की वापसी की प्रक्रिया इसी सप्ताह शुरू हो सकती है।

बातचीत जारी, स्थायी समझौते की तलाश

स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच दूसरे दिन भी वार्ता जारी रही। करीब 80 मिनट की शुरुआती बैठक के बाद तकनीकी स्तर पर चर्चा आगे बढ़ रही है। दोनों पक्ष 60 दिन के युद्धविराम को दीर्घकालिक शांति समझौते में बदलने की संभावनाएं तलाश रहे हैं।

भरोसे की कमी अभी भी बरकरार

हालांकि बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ती दिख रही है, लेकिन ईरान ने साफ किया है कि उसकी सैन्य तैयारियों में कोई ढील नहीं दी गई है। तेहरान का कहना है कि पिछले अनुभवों को देखते हुए वह अमेरिका और इजराइल पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर सकता। इसी कारण वार्ता और सैन्य सतर्कता दोनों समानांतर रूप से जारी हैं।

ट्रम्प की चेतावनी और क्षेत्रीय तनाव

कूटनीतिक प्रयासों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान से लेबनान में हिजबुल्लाह को नियंत्रित करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि क्षेत्रीय गतिविधियों पर रोक नहीं लगी तो अमेरिका और कड़े कदम उठा सकता है। वहीं इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच तनाव भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

कतर में फंसे 6 अरब डॉलर पर भी उम्मीद

ईरान ने दावा किया है कि शुरुआती समझौते के तहत कतर में जमे उसके 6 अरब डॉलर की राशि वापस मिलने का रास्ता साफ हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।