सांभर को पोहा का नाश्ता कराने की पोस्ट पड़ी महंगी ,शिकायत मुख्यालय पहुंची
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में रेस्क्यू किए गए सांभर को पोहा खिलाने का वीडियो वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया। वन्यजीव नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए शिकायत मुख्यालय पहुंची है और जांच की मांग उठी है।सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में रेस्क्यू किए गए सांभर को पोहा खिलाने का वीडियो वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया। वन्यजीव नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए शिकायत मुख्यालय पहुंची है और जांच की मांग उठी है।
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के चूरना वन क्षेत्र में एक सांभर को पोहा खिलाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद वन विभाग असहज स्थिति में आ गया है।
खास बात यह है कि वीडियो किसी पर्यटक या स्थानीय व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस वन अधिकारी का बताया जा रहा है जो सांभर के रेस्क्यू अभियान से जुड़ा था।
मामला सामने आने के बाद वन्यजीव संरक्षण नियमों के पालन और वन अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायत मुख्यालय तक पहुंचने के बाद पूरे घटनाक्रम की जांच कराए जाने की चर्चा है।
नाश्ता कराने का वीडियो बना विवाद की वजह
जानकारी के अनुसार चूरना क्षेत्र में एक सांभर का रेस्क्यू किया गया था। इसके बाद संबंधित एसडीओ फॉरेस्ट द्वारा उसे पोहा खिलाने का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया गया। वीडियो सामने आते ही वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों ने इसे नियमों के विपरीत बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई।
वन्यजीव विशेषज्ञों ने जताई चिंता
वन्यजीव मामलों के आरटीआई कार्यकर्ता अजय दुबे ने मुख्यमंत्री, वन मंत्री और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित शिकायत भेजी है।
उनका कहना है कि जंगली जानवरों को इंसानी भोजन देना उनके प्राकृतिक व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। इससे वन्यजीवों में मानव बस्तियों की ओर आकर्षण बढ़ने का खतरा रहता है।
दुबे का तर्क है कि पोहा में मौजूद नमक और अन्य तत्व वन्यजीवों को उसी स्थान या आबादी वाले क्षेत्रों की ओर दोबारा खींच सकते हैं, जिससे भविष्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति बन सकती है।
नियमों के उल्लंघन का आरोप
शिकायत में दावा किया गया है कि जंगली जानवरों को भोजन कराना और उन्हें मानव संपर्क का आदी बनाना वन्यजीव संरक्षण की मूल भावना के विपरीत है। मामले में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की विभिन्न धाराओं का हवाला देते हुए कार्रवाई की मांग की गई है।
जांच के संकेत, मुख्यालय तक पहुंची शिकायत
मामले ने तूल पकड़ने के बाद वन विभाग के वरिष्ठ स्तर पर इसकी जानकारी पहुंच गई है। सूत्रों के मुताबिक शिकायत के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच कराई जा सकती है। जांच में यह देखा जाएगा कि रेस्क्यू के बाद सांभर को भोजन कराना निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुरूप था या नहीं।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि रेस्क्यू अभियान का उद्देश्य जानवर को सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण में लौटाना होता है, न कि उसे मानव संपर्क या भोजन का आदी बनाना।