लखनऊ।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार को हुई भीषण अग्निकांड ने एक बार फिर शहरी भवनों में सुरक्षा मानकों की पोल खोल दी। इस हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जिनमें अधिकांश छात्र और युवा पेशेवर शामिल हैं। शुरुआती जांच बता रही है कि आग से ज्यादा जानलेवा साबित हुई सुरक्षा इंतजामों की कमी और नियमों की अनदेखी। लखनऊ की यह त्रासदी केवल एक अग्निकांड नहीं, बल्कि भवन सुरक्षा, निगरानी तंत्र और प्रशासनिक जवाबदेही की सामूहिक विफलता का दर्दनाक उदाहरण बन गई है।
ऑटोमैटिक लॉक ने बढ़ाई त्रासदी
जिस इमारत में आग लगी, उसका नक्शा मूल रूप से आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत था, लेकिन वर्षों पहले उसे व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा। भवन के दूसरे तल पर संचालित लाइब्रेरी और स्टूडियो में दर्जनों छात्र और कर्मचारी मौजूद थे। आग फैलते ही कई लोगों ने जान बचाने के लिए बाथरूम में शरण ली, लेकिन धुएं के कारण उनका दम घुट गया।
इमरजेंसी एग्जिट नहीं
आवासीय भवन को बनाया कमर्शियल
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ लोगों ने खिड़कियों और तारों के सहारे बाहर निकलकर जान बचाई, जबकि एक छात्र ने पहली मंजिल से छलांग लगा दी। दूसरी ओर, कार्यालय का बायोमेट्रिक आधारित ऑटोमैटिक लॉक सिस्टम भी संकट की घड़ी में मुसीबत बन गया। कर्मचारियों का दावा है कि आग लगने के बाद मुख्य द्वार समय पर नहीं खुल सका, जिससे कई लोग अंदर ही फंस गए।
जांच में यह भी सामने आया है कि भवन में इमरजेंसी एग्जिट की व्यवस्था नहीं थी। यही वजह रही कि आग और धुएं के बीच लोगों को सुरक्षित बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिल पाया। फायर ब्रिगेड को पीछे की दीवार तोड़कर शव और फंसे लोगों को निकालना पड़ा।
बाथरूम में छिपे छात्र दम घुटने से मारे गए
प्रशासनिक जांच में पता चला है कि आवासीय भवन को वर्ष 2014 में व्यावसायिक उपयोग में बदल दिया गया था। नगर निगम भी पिछले कई वर्षों से उससे कमर्शियल टैक्स वसूल रहा था। अब तत्कालीन अधिकारियों, इंजीनियरों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। करीब 16 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी बताई जा रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है। वहीं डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक घटनास्थल की भयावहता देखकर भावुक हो गए। घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर शहरों में कितनी ऐसी इमारतें हैं जो कागजों में कुछ और हैं और हकीकत में कुछ और।
KGMU ट्रॉमा सेंटर में भर्ती 9 घायलों की सूची
| क्रमांक | नाम | उम्र (वर्ष) | पता |
|---|---|---|---|
| 1 | जयंत गुप्ता | 26 | एलडीए कॉलोनी, ऐशबाग, लखनऊ |
| 2 | लवप्रीत कौर | 26 | बी-6 एमआईजी, सेक्टर-सी, अलीगंज, लखनऊ / दिल्ली |
| 3 | शैलेंद्र | 24 | सी-126, अलीगंज-के, लखनऊ / पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड) |
| 4 | पंकज गोस्वामी | 24 | अल्मोड़ा, उत्तराखंड |
| 5 | अभिषेक | 27 | भोपाल, मध्य प्रदेश |
| 6 | पंकज जोशी | 25 | चंपावत, उत्तराखंड |
| 7 | आसिफ | 32 | लखनऊ |
| 8 | भुवन श्रीवास्तव | 29 | डालीगंज, लखनऊ |
| 9 | गौरव कुमार | 29 | मेरठ, उत्तर प्रदेश |