बढ़वाई का लोकगीत बना महंगाई के खिलाफ जनभावना का चेहरा
मध्य प्रदेश में रायसेन के बढ़वाई गांव में जन्मा ‘महंगाई डायन खाए जात है’ लोकगीत चौपालों से निकलकर राष्ट्रीय पहचान बना। आज यह महंगाई और आर्थिक असमानता के खिलाफ आम जनता की आवाज़ का प्रतीक माना जाता है।

इस गीत की रचना जिले की गौहरगंज तहसील अंतर्गत आने वाले बढ़वाई के लोक कलाकार गयाप्रसाद प्रजापति ने की थी।
गीत में महंगाई को ‘डायन’ के रूप में चित्रित किया गया है, जो आम आदमी की आय और जीवन स्तर को लगातार निगल रही है।
सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार ने इस गीत को नई पीढ़ी तक पहुंचाया है।














