ममता को एक और झटका: राज्यसभा से भी टूटने लगी TMC, सुष्मिता देव ने छोड़ी पार्टी

तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी संकट गहराता जा रहा है। राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव के इस्तीफे ने ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार नेताओं के पार्टी छोड़ने से बंगाल की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है।

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नई दिल्ली।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी सियासी उथल-पुथल थमने का नाम नहीं ले रही है। विधानसभा और लोकसभा के बाद अब राज्यसभा में भी पार्टी को लगातार झटके लग रहे हैं।

बुधवार को ममता बनर्जी की करीबी मानी जाने वाली सांसद सुष्मिता देव ने राज्यसभा की सदस्यता और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया। उनके इस कदम को टीएमसी के भीतर बढ़ती असंतुष्टि का बड़ा संकेत माना जा रहा है।

तीन दिन में दूसरा राज्यसभा सांसद बाहर

सुष्मिता देव का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब कुछ दिन पहले ही राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर भी पार्टी छोड़ चुके हैं।

उन्होंने अपने इस्तीफे में पार्टी नेतृत्व और शासन शैली पर सवाल उठाते हुए टीएमसी की राजनीतिक गिरावट के लिए ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया था। लगातार दो वरिष्ठ नेताओं के बाहर होने से पार्टी नेतृत्व पर दबाव बढ़ गया है।

भाजपा में जाने की अटकलें तेज

इस्तीफे के बाद सुष्मिता देव की असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा के साथ मुलाकात की तस्वीर सामने आने से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

सूत्रों का दावा है कि वह जल्द ही भाजपा का दामन थाम सकती हैं। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

लोकसभा और विधानसभा में भी बढ़ी मुश्किलें

टीएमसी के भीतर असंतोष केवल राज्यसभा तक सीमित नहीं है।

पार्टी के कई सांसद और विधायक पहले ही अलग रुख अपना चुके हैं।

लोकसभा में अलग संसदीय समूह बनाने की मांग और विधानसभा में बागी विधायकों की सक्रियता ने ममता बनर्जी की चुनौतियां और बढ़ा दी हैं।

क्या बंगाल की राजनीति में बदल रहा है समीकरण?

लगातार हो रहे इस्तीफों और नेताओं के पलायन ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज कर दी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह सिलसिला जारी रहा तो टीएमसी को संगठन और सदन दोनों स्तरों पर बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

ममता को एक और झटका: राज्यसभा से भी टूटने लगी TMC, सुष्मिता देव ने छोड़ी पार्टी